प्राकृतिक औषधि के रूप में शहद

प्राकृतिक औषधि के रूप में शहद

jar of honeyशहद प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक ऐसा अनमोल उपहार है जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसका निर्माण मधुमक्खियां अत्यंत परिश्रम व पुष्पों से रस इकटटा करके करती हैं। शहद में लगभग 38 प्रतिशत फ्रक्टोस, 37 प्रतिशत ग्लुकोज, 2 से 5 प्रतिशत सुकोज, प्रोटीन, एंजाइम्स, एसिड तथा लोहा, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैगनीज, कापर, सल्फर, क्लोरिन, फास्फोरस आदि लगभग 14 प्रकार के खनिज लवण पाये जाते हैं।
शहद में कई प्रकार के विटामिन विशेषकर बी-1, बी-2, बी-6 तथा विटामिन सी पाये जाते हैं। इस प्रकार मानव शरीर के विकास के लिए आवश्यक सभी तत्वों के प्रचुर मात्रा में पाये जाने के कारण ही शहद को संपूर्ण आहार का दर्जा प्राप्त है। शहद के छत्तों को देखने से अनायास ही एक अनिर्वचनीय स्वाद का स्मरण हो आना स्वाभाविक है।
शहद के संबंध में व्याप्त भ्रांतियां व उनका निवारण:-
शहद के संबंध में जनमानस में अनेक प्रकार की भ्रांतियां हैं जिनका निवारण इस प्रकार है –
भ्रांति:- शहद सिर्फ सुनहरे या लाल रंग का होता है।
तथ्य:- शहद जिस पुष्प से प्राप्त किया जाता है उसके अनुरूप उसका रंग पीला, सफेद, लाल, सुनहरा, भूरा हो सकता है। सभी रंग के शहद पूर्णत: शुद्ध होते हैं तथा गुणों की दृष्टि से सामान्य उपयोग में लगभग समान होते हैं।
भ्रांति:- एकदम साफ व आर-पार दिखने वाला शहद ही साफ होता है।
तथ्य:- प्राकृतिक रूप से शहद में परागकण पाये जाते हैं जो प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं। इसकी उपस्थिति के कारण शहद एकदम पारदर्शी न होकर कुछ परभासी होता है परन्तु शुद्धता से परिपूर्ण यह शहद गुणों का भंडार होता है।
भ्रांति:- शहद यदि जम जाता है तो वह अशुद्ध होता है।
तथ्य:- सरसों आदि फसलों के फूल से प्राप्त शहद सर्दियों में या कम तापमान पर जम जाता है। यह घी की तरह दानेदार भी हो जाता है। यह शहद की विशेष शर्करा डैक्सट्रोस के कम ताप पर कणीय रूप में आने की प्रवृत्ति के कारण होता है। विदेश में इस जमे हुए शहद से क्र ीम हनी बनाते हैं और इसकी विशेष मांग भी है।
भ्रांति:- पुराना शहद ज्यादा अच्छा होता है।
तथ्य:- सामान्य उपयोग के लिए पुराना शहद अच्छा नहीं होता, यह कुछ खटास युक्त हो जाता है, अत: ताजा शहद उपयोग करना चाहिए।
भ्रांति:- शहद सिर्फ सर्दियों में ही प्रयोग करना चाहिए।
तथ्य:- शहद का प्रयोग निस्संकोच साल भर तक किया जा सकता है। प्रचण्ड गर्मी में तो यह ठंडे शरबत के रूप में लू नाशक व अत्यधिक शीतलता प्रदान करता है।
भ्रांति:- जंगली मधुमक्खियों का शहद एपियरी हनी से ज्यादा अच्छा होता है।
तथ्य:- जंगली मधुमक्खी के छत्ते खुले होने के कारण शहद में वातावरणीय दुष्प्रभाव तथा अनुपयुक्त परिस्थिति के अधिक दिनों तक संचयन के कारण उसके गुणों में कमी आ सकती है। इसके विपरित एपियरी हनी (मधुमक्खी पालकों द्वारा उत्पादित शहद) उपयुक्त परिस्थितियों में पेटी में बंद मधुमक्खियों द्वारा प्राप्त होता है और मशीन द्वारा निकाला जाता है जो कि प्रदूषित
कारकों से मुक्त और ताजा रहता है, अत: एपियरी हनी जंगली शहद से श्रेष्ठ होता है।
प्रकृति का वरदान है शहद
शहद प्रकृति का एक अनुपम एवं अनमोल वरदान है, मनुष्यों के लिए। मानव सभ्यता ने अपने विकास के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की औषधियों एवं जड़ीबूटियों की खोज की, जिनमें शहद को भी एक औषधि के रूप में प्राप्त किया गया। वेदों से लेकर आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में भी शहद के महत्त्व एवं उपयोग के संदर्भ में विस्तृत वर्णन मिलता है।
औषधि के साथ-साथ मांगलिक अनुष्ठानों में इसे अमृत तुल्य मानते हुए गौ-दुग्ध, घृत, गंगाजल, तुलसी के साथ पंचामृत के निर्माण के लिए इसे प्रयोग में लाते हैं।
शहद अपने आप में एक औषधि तो है ही, साथ ही साथ अपने अमृत तुल्य गुणों के कारण यह अन्य औषधियों के साथ मिलकर अनेक गुणों को दोगुना कर देता है। यह औषधियों को शरीर में शीघ्र कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
शरबत या शिकंजी के रूप में इसका प्रयोग हीमोग्लोबीन बढ़ाने में सहायक होता है। शहद लू से बचाने वाला, निरोगी, बलवान व दीर्घायु प्रदान करने वाला होता है। इसके साथ ही साथ यह जीवाणु नाशक, कब्जनाशक, रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला, प्रजनन शक्ति बढ़ाने वाला, अनिद्रा, गठिया तथा हृदय रोगियों के लिए अत्यंत लाभप्रद है।
प्रतिदिन शहद सेवन की मात्रा
प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आयु और स्वास्थ्य के अनुसार शहद सेवन की मात्रा निर्धारित करनी चाहिए। यहां पर हम शहद सेवन की मात्र आयु के हिसाब से निर्धारित करने का प्रयत्न कर रहे हैं-
बच्चों के लिए = 10 से 20 ग्राम प्रतिदिन
किशोरों के लिए = 30 से 40 ग्राम प्रतिदिन
स्वस्थ पुरूष के लिए = 30 से 50 ग्राम प्रतिदिन
स्वस्थ महिला के लिए = 30 से 40 ग्राम प्रतिदिन
वृद्धों के लिए = 20 से 30 ग्राम प्रतिदिन
रोगी को चिकित्सक के परामर्श से शहद सेवन कराना चाहिए।
निष्कर्ष रूप में हम यह कह सकते हैं कि शहद में प्राकृतिक गुणों का भण्डार है। जिसने इसका स्वाद चखा होगा वही इसके अद्भुत गुणों को जान सकेगा। आजकल बाजार में नकली शहद भी बिकता है अत: हमें सावधानीपूर्वक असली शहद की पहचान करके ही शहद खरीदना चाहिए। बाजार में विभिन्न कंपनियों के शहद भी बिकते हैं। उनको हम देख-परख कर खरीद सकते हैं।
– डा. सांत्वना मिश्रा

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