प्रकृति की अद्भुत लीलाएं..यह संसार एक विचित्र रंगमंच ..!

प्रकृति की अद्भुत लीलाएं..यह संसार एक विचित्र रंगमंच ..!

  यह संसार एक विचित्र रंगमंच है, जहां तरह-तरह के अजूबे देखने को मिलते हैं। वैज्ञानिक प्रयास करते हैं कि हर दृश्यमान वस्तु या घटनाक्रम के वे कारण जान सकें, फिर भी अनेक रहस्यों का समाधान वह अपनी तर्कबुद्धि से देने में असमर्थ होते हैं। इसी प्रकार की कुछ प्रकृति के अजूबे हैं जिन्हें यहां प्रस्तुत किया जा रहा है। आस्ट्रेलिया में एक चलती-फिरती पहाड़ी है जिसका नाम ‘ग्रामसीन’ है। यह पर्यटकों के लिए एक मनोरंजन पार्क की तरह है। यह पहाड़ी अपना स्थान बदलती रहती है। जानकारों के अनुसार इस पहाड़ी की तली में सौ फुट मोटी नमक की एक चट्टान है। पहाड़ी की जड़ उसी पर टिकी हुई हैं नीचे का नमक नमी, गर्मी और सर्दी से प्रभावित होकर उथल-पुथल करता रहता है और पहाड़ी को इधर उधर खींचता तथा धकेलता रहता है।
आस्ट्रिया का टौर्न पर्वत का नोड्रन जलप्रपात संसार के प्राकृतिक आश्चर्यों में से एक है। प्रतिदिन तीसरे पहर ठीक साढ़े तीन बजे उसके ऊपर एक इन्द्रधनुष उदय होता है। इसका समय इतना निश्चित है कि लोग उससे अपनी घड़ी मिलाकर टाइम सही रखते हैं। ब्रीजल के एक नगर वेलम टडोपरा में दोपहर के दो से चार बजे तक नियमित रूप से वर्षा होती है। इसमें कभी रूकावट नहीं आती। उस क्षेत्र के निवासी इन दो घंटों में मध्यान्ह अवकाश मनाते हैं। गर्म और ठंडे जल के झरने संसार में अनेक स्थानों पर पाये जाते हैं किन्तु इटली के आर्मिया क्षेत्र में अपने ढंग का एक विचित्र झरना है। उसमें सर्दी के दिनों में गर्म पानी निकलता है और भाप के बादल निकलते हैं जबकि गर्मी के दिनों में उसका पानी बर्फ जैसा ठंडा हो जाता है। जापान के सासवों नगर का एक नागरिक त्सोको नियमित रूप से त्रिपिटिक का पाठ करता था। वह जिस पन्ने पर अपना पाठ छोड़ता था, उसमें एक हरी पत्ती का विराम चिन्ह लगा देता था। आश्चर्य की बात यह थी कि वह जीवनभर एक ही पत्ती का प्रयोग करता रहा था और वह पत्ती कभी सूखी नहीं थी। अस्सी वर्ष की अवस्था में जिस दिन उसकी मृत्यु हुई, उस दिन वह पत्ती सूख गई। वह पत्ती इतने दिन हरी कैसे रही, इसका जवाब आज तक नहीं मिल पाया।
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प्रथम विश्वयुद्ध के समय ब्रिटेन का एक टोही वायुयान मोर्चे का सर्वेक्षण कर रहा था। उसके चालक और सर्वेक्षण कर्ता शत्रु की गोली के शिकार हो गए। वायुयान ऊपर ही उड़ता रहा। वह घण्टों आसमान में बिना पायलट के चक्कर काटता रहा। युद्ध समाप्त होने के बाद ही वह भूमि पर उतरा। आखिर वह कौन-सी शक्ति थी जो उस यान का संचालन कर रही थी? नादिया (पश्चिम बंगाल) जिले के कोलडिय़ा गांव में एक शिक्षक के घर पर एक ऐसा नारियल का पेड़ लगा है जिसकी शाखाओं से ही उसकी संतानें जन्म ले लेती हैं। पिछले तीन वर्षों में इस पेड़ ने लगभग सौ पौधों को जन्म दिया है। सभी पेड़ उस पेड़ के जड़ से ही उगे हैं। जब पत्तों में अंकुर आते हैं, तो उन्हें तोड़कर जमीन में गाड़ देने से उससे एक स्वतंत्र पौधा निकल आता है। अगर अंकुर युक्त पत्तियों को पेड़ से अलग नहीं किया जाता है तो वे सूखकर गिर जाते हैं। महाराष्ट्र के जलगांव जिले में अंजिष्ठा मार्ग पर ‘पहुर’ नामक एक छोटा-सा गांव है। वहां से लगभग तीन मील दूर ‘सीप’ गांव है। इस गांव में एक अद्भुत नीम का पेड़ है। इसके प्रत्येक डाल के पत्ते कड़वे हैं किन्तु एक डाल ऐसी है जिसकी पत्तियों का स्वाद मीठा है। किंवदन्तियों के अनुसार कड़ोवा महाराज नामक एक सिद्ध संत ने ईश्वर के अस्तित्व और उसकी शक्ति का परिचय देने के लिए ऐसा चमत्कार कर दिखाया था जो आज भी है।
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वृक्ष वनस्पतियों में ऐसी अनेक प्रकार की विचित्रताएं पायी जाती हैं जिन्हें देखकर बुद्धि चकरा जाती है। गर्म प्रदेशों में पाया जाने वाला वृक्ष ‘समानी सनम’ वनस्पति जगत में अपने ढंग़ का एक अनोखा वृक्ष है। वह रात में बादल की तरह बरसता है। यह पेड़ दिन भर अपने डण्ठलों से हवा की नमी को सोखता रहता है और अपना भण्डार भर लेता है। जैसे वातावरण की गर्मी शांत होती है, वह उस भण्डार को खाली करके वहां के प्राणियों की प्यास बुझाता है।
-परमानन्द परम

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