प्यार एक बहुत ही प्यारा, बहुत ही धीमा जहर है..!

प्यार एक बहुत ही प्यारा, बहुत ही धीमा जहर है..!

 सायनाइड का स्वाद कैसा होता है, आज तक कोई नहीं बता सका। ठीक उसी प्रकार प्यार कब, क्यों, कैसे होता है, ठीक ठीक कोई नहीं बता सका। प्यार अंधा होता है, प्यार दीवाना होता है, प्यार पागल होता है, बरसों से सुनते चले आये हैं। दरअसल प्यार एक बहुत ही प्यारा, बहुत ही धीमा जहर है। यूं तो प्यार आंखों के रास्ते दिल में उतरता है पर कई बार यह परवान चढऩे में थोड़ा वक्त लेता है।
प्यार का इजहार पहले कौन करे, महीनों इसी में बीत जाते हैं। दो प्यार करने वाले सामने वाले की ओर से पहल का इंतजार करते रहते हैं। दिलों में प्यार होने के बावजूद पहले आप, पहले आप में कोई तीसरा बाजी मार ले जाता है। शर्म, झिझक और संकोच के कारण कभी कभी प्यार जुबां पर नहीं आ पाता और दिल ही दिल में दम तोड़ देता है।
आज प्यार का इजहार करने के कई साधन हैं जैसे मोबाइल, ग्रीटिंग कार्ड, इंटरनेट चेटिंग, रेस्टोरेंट, पिकनिक पाइंट आदि। पुराने जमाने में प्यार करने वालों पर किस कदर पहरे व सख्ती थी। आज प्यार करने वालों को प्यार करने की खुली आजादी है।
एक वो दौर था जब प्रेम पर आधारित फिल्में बनती थीं। लैला मजनू, हीरा रांझा, सोनी महिवाल, मुगले आजम, अनारकली, पाकीजा, प्रेम रोग, बॉबी, ताज महल, लव स्टोरी, एक दूजे के लिए, बरसात की एक रात, बहू बेगम, साहब बीवी और गुलाम, मेरे महबूब, मेरे हुजूर, पालकी, आरजू, कभी कभी, आदि बेशुमार फिल्मों ने हमारे दिलों में पाक मोहब्बत का जज्बा पैदा किया। प्यार क्या होता है, क्यों होता है, इन फिल्मों ने सच्चे प्यार करने वालों को एक बहुत ही अच्छी गाइडलाइन दी। सच्ची और पाक मोहब्बत की नींव हमारे समाज में डाली।
संडे का दिन अपने लिए रखें..संडे के संडे करें अपनी देखभाल !

लेकिन आज भी प्यार का इजहार करने, शादी का प्रस्ताव रखने के लिये आमतौर पर युवकों को ही पहल क्यों करनी पड़ती हैं। समाज से लडऩे के लिये प्यार का इजहार करने के लिये युवतियां आगे क्यों नहीं आ पाती और शादी का प्रस्ताव रखने में क्यों हिचकिचाती हैं। शायद युवतियों में ही हीन भावना रहती है कि कहीं उन के पहले प्यार को कोई ठुकरा न दे।
लड़कियां अपने मनपसंद सपनों के राजकुमार को प्रपोज करने से यूं भी हिचकिचाती हैं कि यदि उस की एक ना ने उनके सारे सपने चूर-चूर कर दिये तो क्या होगा। इस से यही अच्छा है कि वो उस के द्वारा प्रपोज किये जाने का इंतजार करें। यदि यह सोचकर युवतियां प्यार का इजहार करने का विशेषाधिकार युवकों को देती हैं तो यह निहायत ही बेवकूफी भरी बात है। किसी लड़की का किसी लड़के को प्यार में पहले प्रपोज करना यह दिखाता है कि उस के अंदर आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं है और वह परिणाम की चिंता किये बगैर अपने दिल की बात कह सकती है। अपनी जिंदगी से संबंधित फैसले करने की उस में हिम्मत है क्योंकि सदियों पहले राजकुमारियां स्वयंवर के जरिये अपनी पसंद का राजकुमार चुनती थी यानी युवतियों को पहले प्रपोज करना चाहिये। आखिर उन्हें भी तो हक है अपनी पसंद का राजकुमार चुनने का, बताने का, देखने का।
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एक बात यहां यह भी जरूरी है कि प्यार की बुनियाद कभी भी झूठ पर नहीं रखनी चाहिये।
विवाह और प्यार दोनों ही बड़े पवित्र और नाजुक रिश्ते हैं। विवाह जैसे स्थाई जन्म जन्मान्तर के रिश्ते की नींव यदि आप झूठ पर रखेंगे तो रिश्ता बहुत जल्द टूट जायेगा। प्यार में यह बिलकुल नहीं होना चाहिये कि तू नहीं और सही, और नहीं और सही। आप का दिल जिस पर आ गया, उस को पाने के लिये थोड़ा इंतजार, थोड़ा दर्द, थोड़ी तड़प तो सहन करनी ही चाहिये।
उस प्यार का मजा ही क्या जिस में तड़प, जुदाई, बेचैनी, इंतजार न हो लेकिन यह इंतजार करना लम्बा भी नहीं होना चाहिये कि आप उस की हां सुनने के लिये उस के प्यार के इंतजार के इंतजार में राहों पर पलकें बिछाये रहें और पोस्टमैन आप को उस की शादी का कार्ड दे जाये। इस लिये अपने प्यार को प्रपोज करने में देर न करें। जब मौका मिले, आई पी एल की तरह छक्का जड़ दें और अपने सपनों के राजकुमार या राजकुमारी से कहें ‘क्या आप मुझ से शादी करोगे।’
-शादाब जफर शादाब

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