पूरी हो सकती है दांपत्य सुख की चाहत…!

पूरी हो सकती है दांपत्य सुख की चाहत…!

दांपत्य सुख की चाहत किसे नहीं होती? आज के भाग-दौड़ के व्यस्त जीवन में पति के पास पत्नी के लिए समय ही नहीं बचता। रात का कुछ क्षण सामीप्य के लिए मिलता भी है तो थकान-तनाव के कारण पत्नी अपने पति के शारीरिक प्रेम को पा सकने में असमर्थ रहती है। धीरे-धीरे यह स्थिति बढ़ती ही चली जाती है और सुखद दांपत्य जीवन में दरार पडऩी प्रारंभ हो जाती है।
दांपत्य सुख की चरम परिणति यौन-सुख को माना जाता है। जिस परिवार में पति-पत्नी के बीच सुखद यौन-सम्बन्ध बना रहता है, उस परिवार में तनाव की स्थिति उपस्थित होती ही नहीं है। अगर कभी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो भी जाती है तो उसे मामूली समझकर पति-पत्नी मिलकर निदान कर पाने में सक्षम होते हैं।
कुछ वास्तुदोष भी ऐसे होते हैं जो पति-पत्नी के मधुर यौन-संबंध के बीच बाधक बनकर विषम परिस्थितियों को पैदा कर देते हैं। अगर शयन-कक्ष के वास्तुदोषों को समाप्त कर दिया जाय तो अवश्य ही यौन-सुख से वंचित पति-पत्नी चरमसुख की प्राप्ति करते हुए सुखद दांपत्य जीवन व्यतीत करेंगे, यह मेरा विश्वास है। शयनकक्ष के वास्तुदोषों को निम्नानुसार दूर किया जा सकता है।
फैंगशुई वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम का हिस्सा पारिवारिक संबंधों से सीधा ताल्लुक रखता है। अगर आप अपने जीवन साथी को लेकर बिलकुल गंभीर हैं तो शयन-कक्ष के दक्षिण-पश्चिम की दीवार को हल्का पीला, नारंगी या संतरे के रंग की तरह बना दें। इस दीवार से सटाकर
गैंदे के फूल का गमला रख दें। आप पायेंगे कि इस उपाय से आपका जीवन साथी आपको चरम यौन सुख को प्रदान करने वाला बन गया है।
बिस्तर का दक्षिणी-पश्चिमी कोना कामदेव का कोण माना जाता है। इस कोने में ताजे गुलाबों का एक गुलदस्ता या फिर कोई गुलाबी क्रिस्टल, गुलाब के आकार की घड़ी, चिडिय़ों का जोड़ा या फिर सागर किनारे अठखेलियां करते स्त्री-पुरूष का विशाल चित्र लगाने से ‘काम ऊर्जा’ तरोताजा रहती है। दो चूडिय़ां या फिर दो अंगूठियों को मोमबत्ती में लाल फीते से बांधकर शयन-कक्ष के दक्षिणी-पश्चिमी कोने में टांग देने से या फिर टेबल आदि पर रख देने से दांपत्य जीवन के ‘काम आनन्द’ को अमरता प्राप्त होती है।
भवन का दक्षिण क्षेत्र आनन्द का प्रतीक होता है। इस क्षेत्र को बैंगनी रंग से रंगकर चमकदार रोशनी से युक्त कर दें। शयन-कक्ष की दक्षिण दीवार पर मोर पंख का गुच्छा लटका दें। मोर पंख आपसी समझ पैदा करने में सहायक होता है।
सिरहाने के नीचे लाल कपड़ा में बांधकर पांच तुलसी के पत्ते, पांच काली मिर्च एवं पांच लौंग को बांधकर रख देने से पति की कामशक्ति में वृद्धि होती है। प्रात: काल उठते ही उस पोटली को उठाकर पूर्व दिशा की ओर फेंक दें। ऐसा न करने पर उस बिस्तर पर बैठने वाला प्रत्येक पुरूष कामुक दृष्टि से देखेगा। इस प्रयोग को एक माह तक लगातार करें।
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शयन-कक्ष के उत्तर-पश्चिम दिशा में धातु के बने गहनों की जोड़ी या फिर हाथी का एक प्रतीक रखें। हाथी को मुसीबतों से छुटकारा दिलाने वाला शुभ प्रतीक माना जाता है। इस क्षेत्र में साफ ऊनी वस्त्र से ढके एक कछुए की प्रतिमा रखने से पत्नी की यौन सुख की चाहत बढ़ती है। पलंग का सिर (तकिया वाला हिस्सा) पश्चिम की ओर रखने से काम शक्ति में वृद्धि होती है। पश्चिम का क्षेत्र आनन्द का क्षेत्र माना जाता है। पलंग के चारों पौओं में काले रिबन में मछली की हड्डी (कांटे) को बांध देने से भी उस पलंग पर सोने वाले दंपत्ति में कामशक्ति की वृद्धि होती है।
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अगर कोई पति सम्भोग (सहवास) के प्रति उदासीन रहता हो और पत्नी के अधिकार की पूर्ति न करता हो तो वह पत्नी प्रतिदिन पांच छोटी इलायची को अपने ब्रा के अन्दर रखकर रात को शयन करे। इसका ध्यान रखना आवश्यक है कि इलायची का स्पर्श स्तनों से होता रहे।
प्रात: काल उठकर उस इलायची के दानों का चाय में डालकर या भोज्य पदार्थ में डालकर पति को दें। यह उपाय एक माह तक निरन्तर करते रहने पर पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। इसका प्रयोग कुंवारी लड़कियों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
– आनंद कुमार अनंत

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