पहले प्यार का जादू..!

पहले प्यार का जादू..!

पहला प्यार हर स्वार्थ से ऊपर होता है। जाति-पाति से वाकिफ नहीं होता। किसी रिश्ते को नहीं मानता। उम्र के किसी भी हिस्से से नहीं बंधा होता और न ही रूपये पैसों की खाई को देखता है।
अधिकांशत: तेरह-चौदह साल के किशोर-किशोरियों के जीवन में ही प्रथम प्रेम एकाएक किसी आंधी की तरह आता है। इस प्रथम प्रेम में किशोर-किशोरी स्वाभाविक हाव-भावों से एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। वे स्वयं के रूप-पहनावे आदि के प्रति अत्यधिक सतर्क हो उठते हैं। अपने स्वभाव, व्यक्तित्व पर वे अत्यधिक ध्यान देना प्रारंभ कर देते हैं। अगर इस उम्र में प्रेमिका ने गंदे कपड़ों की तरफ ध्यान दिलाया तो लीजिए अगले ही दिन से साफ कपड़े पहनने शुरू। ‘तुम इस बार अच्छे नंबरों से पास हो जाओ तो जानूं।’ प्रेमी का आदेश पाते ही बुद्धू लड़की भी अपना सारा दम पढ़ाई में लगाकर जुट जाती है।
अभी पिछले हफ्ते तो मैंने बस में साथ वाली सीट पर एक दसवीं कक्षा के छात्र को माचिस की तीली से हाथ जलाते देखा तो चकित होकर कारण जानना चाहा। उसने लंबे-लंबे आंसुओं से बतलाया कि वो अपनी गर्ल फ्रेंड के जन्मदिन से सीधे होकर आ रहा है। वहां सबके सामने उसने मुझे सिगरेट पीने के कारण लताड़ा, सो अब इन हाथों को जला दूंगा ताकि आज के बाद इन हाथों में सिगरेट पकडऩे का दम ही न रहे।
दूसरी ओर कुछ लोगों को प्रथम प्रेम में बर्बाद होते भी पाया जाता है। इस प्रेम की जरा सी नाकामयाबी के बाद वे सिगरेट, शराब, हस्तमैथुन, गांजा, जुआ, व्यभिचार इत्यादि की लत लगा बैठते हैं और अपने कैरियर को पहले प्रेम की वेदी पर स्वाहा कर डालते हैं।
‘फस्र्ट लव’ मात्र मीठी याद तक ही सीमित हो, ऐसा नहीं है। प्रथम प्रेम में गजब की शक्ति पाई जाती है। इसमें अकेले ही पहाड़ से टकरा जाने का अदम्य उत्साह होता है। जरा सी चुनौती पर मौत का ग्रास बनने में क्षण भर भी देर नहीं लगती।
अब तक मेरा जिन उच्च अधिकारियों, इंजीनियरों, कलाकारों, लेखकों से संपर्क रहा है, उन सभी से भावुक बातचीत में मैंने जाना कि इस उपलब्धि के लिए बरसों पुराना प्रथम प्रेम ही जिम्मेदार है। आज उनके करियर में यदि ठहराव या बस बहुत हो गया जैसा संतोष है तो मात्र इसलिए कि अब इस बढ़ी उम्र में उस प्रेम की लौ की तपन समाप्त हो चुकी है अथवा काफी कम हो गयी है।
लड़का : कल से हम कही और मिलेंगे …

मेरे एक बचपन के साथी अनुराग गोयल हैं जो चौदह-पंद्रह साल की उम्र में पड़ोस में रहने वाली एक अत्यंत अमीर लड़की से दिल लगा बैठे। गरीबी के कारण प्यार परवान न चढ़ सका तो इस मामूली से लड़के में अमीर बनने की सनक चढ़ गई और आज उस सनक के परिणामस्वरूप उसकी कई दुकानें, हैं, अनेक कर्मचारी हैं, अपनी गाड़ी है, शानदार कोठी है पर अनुराग को यह मलाल रहता है कि उसे यह सब देर से मिला। अगर पहले मिलता तो वो पहले प्यार को पा लेता। पहला प्यार हमारे लिए कितना हितकारी सिद्ध हो सकता है, इसके उदाहरण मैं अपने आसपास के लोगों के न देकर स्वयं का ही देता हूं। मैं बचपन में मंद बुद्धि और बेहद शरारती था। किशोरावस्था तक आते-आते सिगरेट, फिल्में, अत्यंत हीन व्यक्तित्व का स्वामी हो गया और किसी से बातचीत में बेहद शर्मीला था।
मैं उस वक्त पढ़ाई में किस कदर निम्न था आप जान सकते हैं कि दसवीं कक्षा के एक हिंदी ‘बी’ पेपर जिसमें मुझे मुहावरे, प्रार्थना पत्र, निबंध लिखने थे, से बचने के लिए उस दौरान पास के सिनेमा हाल में फिल्म देखने भाग गया। उस वर्ष मैंने सत्ताइस प्रतिशत अंक हासिल किए।
प्रथम प्रेम का जादू मुझ पर यों चला कि इसके बाद पहले प्रेम को पाने की गरज से आगे चलकर मैं कक्षा का तीव्र विद्यार्थी बना। कहानियों, निबंधों, भाषणों व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में ढेरों पुरस्कार जीते और हिंदी से ही एम.ए. उत्तीर्ण किया।
मेरा लक्ष्य अपने मुंह मियां मिटठू बनना नहीं है बल्कि बताना चाहता हूं कि मेरी उपलब्धियों के लिए मेरी मेहनत, लगन, उत्साह को ही घर और घर से बाहर सराहा जाता रहा मगर कोई नहीं जान सका कि वास्तव में यह सब प्रथम प्रेम का परिणाम है। आज भी उस प्रेम की कसक को महसूस करते ही कुछ नया करने की चाह पैदा होती है।
तस्वीर का दूसरा रुख यही है कि इन सब के बावजूद भी अगर पहला प्यार शादी में तब्दील हो जाता है तो प्राय: दुख, क्लेश, संकट, झगड़े आदि ही देखने में आते हैं क्योंकि कम उम्र, परिपक्वता की कमी, बेरोजगारी, मां-बाप व रिश्तेदारों का मुंह मोडऩा आदि कई कारण हैं और पति-पत्नी एक दूसरे पर लांछन लगाकर झगड़ते रहते हैं। शायद इसीलिए प्रख्यात साहित्यकार से.रा. यात्री बतलाते हैं कि ‘कभी भी अपने पहले प्यार’ से विवाह न करो अन्यथा जीवन भर हाथ मलते रह जाओगे।
शरीर को पुष्ट बनाता है केला

पहला प्यार ज्यादातर किशोरावस्था में होता है और पहली नजर में ही हो जाता है, इसलिए इसकी अवधि अक्सर कम ही होती है। ऐसा देखने में आता है कि थोड़ी सी बदनामी के बाद मां-बाप की धमकी या पिटाई के बाद अथवा स्थान परिवर्तन के कारण या अन्य किसी ऐसी ही वजह से प्रथम प्रेम एक मीठी गलती में परिवर्तित हो जाता है।
लेकिन प्रथम प्रेम, प्रथम मिलन, प्रथम स्पर्श कोई भूले नहीं भूलता और यह हर शख्स के बदन में कंपकंपी पैदा करने वाली, अपने सीधेपन और भोलेपन की याद दिलाने वाली वो व्यक्तिगत यादें हैं जिसे विवाहोपरांत कोई अपने अलावा किसी से शेयर नहीं करना चाहता।
जिस तरह मां-बाप एक ही होते हैं ठीक उसी प्रकार पहला प्यार भी सिर्फ एक बार ही होता है जिसकी याद आपकी सर्वाधिक अमूल्य धरोहर है जो अंतिम सांस तक नहीं भुलाई जा सकती। अत: अपने प्रथम प्यार की याद अपने उत्थान में लगाइये। आगे बढऩे में उपयोग कीजिए।
जब-जब आपकी उपलब्धियों का, आपकी खुशहालियों का आपके प्रथम प्रेम साथी को पता लगेगा तो उसे आपको खोने का दुख होगा और आपको इस बात का अहसास होते ही अपने जीवन की सार्थकता का आभास होगा।
– सुशील कुमार खरबंदा

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