पत्नी की उठायें पूरी जिम्मेदारी

पत्नी की उठायें पूरी जिम्मेदारी

पति की नौकरी यदि इस प्रकार की है कि उन्हें अक्सर टूर पर जाना पड़ जाता है तो पत्नी की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। उसे अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ पति की जिम्मेदारियों का भी निर्वाह करना पड़ता है। साथ ही दिन-प्रतिदिन की समस्याओं से भी स्वयं ही निपटना पड़ता है। ऐसे में पत्नी का सारी समस्याओं से मुंह मोड़कर बैठ जाना उचित नहीं है। पति किसके लिए कमा रहे हैं। जब वे आपके एवं बच्चों के लिए इतनी मेहनत करते हैं तो आपकी भी उनके प्रति कोई जिम्मेदारी बनती है। कम से कम उनके पीछे उनकी जिम्मेदारियों को तो हंसी-खुशी निभायें।
घर-परिवार में बीमारी, रिश्तेदारों का आना-जाना, बच्चों का स्कूल आदि अन्य काम लगे ही रहते हैं। जब भी कोई इमरजेंसी पड़ती है तो पति की जरूरत भी खूब महसूस होती है। उनका पास न होना बहुत महसूस होता है लेकिन यह समय आपकी परीक्षा का है, इसलिए ऐसी स्थिति में बड़े धैर्य एवं समझदारी से निपटें। पति की अनुपस्थिति में अपने फैमिली डॉक्टर या एक-दो करीबी मित्रों का पता व फोन नंबर जरूर नोट करके रखें। जरूरत पडऩे पर आप उनसे सहायता ले सकती हैं।
अपनी सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखें। पति की अनुपस्थिति में सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए घर की सुरक्षा का। खिड़की-दरवाजे अच्छी तरह बंद रखें। खिड़कियों पर ग्रिल एवं दरवाजों पर सेफ्टी चेन लगवा कर रखेंगे तो अच्छा है। घर में गहने-पैसे कहां रखे हैं, ये बातें अपने नजदीकी रिश्तेदारों एवं मित्रों को भी न बतायें। बच्चों से भी अपना कीमती सामान दूर रखें।कर आदि के सामने अपनी अलमारी कभी न खोलें। पति की अनुपस्थिति में पुरूष रिश्तेदारों आदि से भी दूरी बनाकर रखें। उन्हें घर पर न बुलायें। यदि वे अचानक घर पर आ जायें एवं रात को ठहरने की जिद करें तो अपनी किसी विश्वसनीय सहेली या पड़ोसन को अपने पास रोक लें। उनसे बेवजह हंसी-मजाक न करें वरना वे आपके अकेलेपन का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। अपनी सुरक्षा आपके ही हाथ में है। किसी को भी अपने अकेले होने की सूचना न दें। यदि बच्चे बड़े हैं तो उन्हें उनकी जिम्मेदारियों से परिचित करायें। यदि बच्चे छोटे हैं तो उन्हें भी समझा दें कि उनके पापा घर पर नहीं हैं इसलिए उन्हें किस तरह समझदारी से रहना है। आस-पड़ोस में या सड़क या रास्ते में किसी से अनावश्यक ही न झगड़ें। छोटी-छोटी बातों को झगड़े का विषय न बनायें। जितना हो सके, लड़ाई-झगड़े से दूर ही रहना चाहिए।
केक बनाइए और खिलाइये

पति घर पर नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप समाज में उठना-बैठना छोड़ दें बल्कि आपकी जिम्मेदारियां तो पति की अनुपस्थिति में और भी दुगुनी हो जाती हैं। सामाजिक संबंध निभाना न भूलें। नाते-रिश्तेदारों एवं पड़ोसियों के सुख-दुख में आना-जाना न छोड़े। इससे आपके सामाजिक संबंध भी बने रहेंगे और आप स्वयं को अकेला भी महसूस नहीं करेंगी।
हां, अगर कोई देर रात का कार्यक्रम है तो उसमें दिन में कोई उपहार ले जाकर भेंट करके अपनी उपस्थिति दर्ज करा आयें। अपने पड़ोसियों से भी मधुर संबंध बनाकर रखें चूंकि पड़ोसी ही दुख-सुख में सबसे पहले काम आते हैं।
– शिखा चौधरी 

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