पति-पत्नी और वो….

पति-पत्नी और वो….

मोहन की पत्नी मृणाली सुंदर और खूबसूरत है, फिर भी वह अधेड़ सरोज से प्यार करता है। मृणाली सीधी और सरल स्वभाव की है। वह पति की हर बात को आज्ञा समझकर आंखें मूंदकर मान लेती है। पति से कभी लड़ती समझती नहीं। जिद्द नहीं करती है। समर्पण तो बहुत तरसाने के बाद ही करती है।
राजन की पत्नी अनीता गोरी चिट्टी और सुंदर है। वह शांत स्वभाव की, पुराने ख्यालात की शालीन औरत है। पत्नी के होने पर भी राजन, मेघना को चाहता है। प्यार करता है। मेघना सुंदर नहीं है लेकिन वह माडर्न ख्यालात की तेज तर्रार औरत है। उसके विचार, खुलेपन और स्वभाव की वजह से राजन उसे चाहता है।
नगेन्द्र की पत्नी रागिनी है जो सुंदर लेकिन पुरानी सोच की है। वह मॉडर्न ख्यालों की नीता को चाहता है।
यहां मैंने कुछ उदाहरण दिये हैं। आप अगर ढूंढेंगे तो ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है। ऐसे उदाहरण बहुत से मिल जायेंगे।
अविवाहित पुरूष किसी औरत से प्यार करे, इसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन विवाहित पुरूष परस्त्री से प्रेम करे तो यह सोचने की बात है। विवाहित पुरूष परस्त्री को क्यों चाहने लगता है। क्यों पत्नी के होते दूसरी औरत से प्रेम करने लगता है।
पत्नी और प्रेमिका में अंतर क्या है। पत्नी अपनी होती है। पत्नी के साथ जीवनभर का साथ होता है। पत्नी के तन मन पर पति का अधिकार होता है। दूसरे शब्दों में पत्नी उपलब्ध होती है जबकि प्रेमिका अनुपलब्ध। प्रेमिका के साथ प्रेमी किसी रिश्ते की डोर से नहीं बंधा होता। उसके तनमन पर किसी का अघिकार नहीं होता। वह पत्नी की तरह उपलब्ध नहीं होती और मानव का स्वभाव है जो चीज उपलब्ध होती है, उसमें उसकी रूचि कम हो जाती है। और जो चीज अनुपलब्ध हो, उसकी कामना मानव करने लगता है। उसको पाने की इच्छा उसके मन में जागृत हो उठती है।
पत्नी और प्रेमिका में एक अंतर और है। नून, तेल, लकड़ी की समस्या पत्नी उठाती है। घर गृहस्थी के खर्चों की बातें पत्नी करती है। पत्नी के प्रति पति के दायित्व जुड़े होते हैं। पति को पत्नी की हर जरूरत का ख्याल रखना पड़ता है। प्रेमिका से किसी तरह का दायित्व नहीं जुड़ा होता। नून तेल लकड़ी की बातें प्रेमिका नहीं करती। उसे प्रेमी की घर गृहस्थी से कुछ लेना देना नहीं होता।
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प्रेमिका प्रेमी को अपना बनाये रखने के लिए हर फार्मूला अपनाती है। नाज-नखरे दिखाती है। इतराती है, इठलाती है। जिद्द करती है। प्रेमी के सामने अपने को आकर्षक और सुंदर दिखाने का हर संभव प्रयास करती है। प्रेमिका वो सब कुछ करती है जिससे प्रेमी उस पर लट्टू बना रहे। प्रेमी को अपना बनाये रखने के लिए समर्पण से भी परहेज नहीं करती।
पत्नी ऐसा कुछ नहीं करती। इसकी एक सबसे बड़ी वजह है। हमारे यहां आज भी यह माना जाता है कि शादी का मतलब जीवन भर का साथ। हर विवाहित औरत जानती है, मुझे पति के साथ आजीवन रहना है। शादी के बाद एक दो साल तक तो पत्नी में जोश रहता है और बनठन कर रहती है लेकिन बाद में घर गृहस्थी के चक्कर में ऐसी उलझती है कि न अपने रंग रूप-साज श्रृंगार का ध्यान रख पाती है। न ही किसी तरह के नाज नखरे दिखाती है और अगर मां बन जाये तो उसका ध्यान पति में कम बच्चे में ज्यादा हो जाता है।
इसका नतीजा यह होता है कि आदमी को पत्नी कुछ सालों बाद बासी फूल नजर आने लगती है और प्रेमिका ताजा खिला फल। पत्नी की हर अदा में भोंड़ापन नजर आने लगता है जबकि प्रेमिका की भोडी और बेहूदा हरकतें भी मन को भाने लगती हैं। प्रेमिका भी जानती है प्रेमी उसका जब तक ही रह सकता है जब तक उसमें आकर्षण है। वह प्रेमी को अपना बनाए रखने के लिए ही फार्मूला अपनाती है।
पत्नी अगर चाहती है कि पति हमेशा उसी का रहे, किसी पराई औरत के चक्कर में न पड़े तो उसके लिए यहां कुछ सुझाव हैं:-
– पति को अपना बनाए रखने के लिए साज श्रृंगार बहुत जरूरी है। प्राय: औरतें इस ओर ध्यान नहीं देती। सर पर पड़े कपड़े, उलझे बाल देखकर पत्नी बासी सी लगती है। औरत को चाहिए कि पति के सामने सज संवर कर रहें।
– पति काम पर जाये तो उसे दरवाजे तक छोडऩें आये। काम से आने पर उसका मुस्कुरा कर स्वागत करें।
– – हर समय घर गृहस्थी के काम में न लगी रहें। कुछ समय निकालकर पति के पास भी बैठें।
– पति के चाहने पर ही समर्पण न करें। सेक्स में सहयोग भी करें। बिस्तर में ठंडी न पड़ी रहें। सेक्स का आनंद तभी आता है जब मर्द औरत दोनों उसमें भाग लें।
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– मां बन जाने पर प्राय: औरतों का पूरा ध्यान बच्चे पर केंद्रित हो जाता है। बच्चे के चक्कर में पति की उपेक्षा न करें। पति को भी समय दें।
– पति की पसंद नापसंद का ख्याल रखें। पति को जो पसंद हो, उसे जरूर करें।
जन्मदिन व मैरिज डे पर पति को विश करना व गिफ्ट देना न भूलें। गिफ्ट ऐसा दें जो पति के काम का हो।
– छुट्टी वाले दिन पति के साथ पिकनिक पर जरूर जायें व साल में कम से कम एक बार कहीं बाहर टूर पर जरूर जायें। ऐसा करने से दांपत्य में नयापन आता है। जोश स्फूर्ति का एहसास होता है।
पति के हर काम में कमी न निकालें। न ही दूसरों के सामने उसके अहं को ठेस पहुंचाये। पति की प्रगति व उन्नति पर खुश हों तथा प्रशंसा करना न भूलें।
ऐसी बहुत सी बातें हो सकती हैं, छोटी छोटी चीजें हो सकती हैं, जिनको करने से पत्नी, पति को सिर्फ अपना बनाकर रख सकती है।
– किशन लाल शर्मा

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