पति के लिये भी संवरिए..औरत को घर में रहकर ज्यादा सजना संवरना चाहिए

पति के लिये भी संवरिए..औरत को घर में रहकर ज्यादा सजना संवरना चाहिए

रचना का पति एक दफ्तर में काम करता है। वह सुबह जाता है और शाम को पांच बजे के बाद घर लौटता है। रचना पति के आने से पहले हाथ मुंह धोकर, कपड़े बदलकर सज संवर जाती है। उसका पति कमल घर लौटता है तो वह मुस्कुराकर उसका स्वागत करती है। कमल फूल सी खिली पत्नी से मिलते ही दिन भर की थकान भूल जाता है।
निशा का पति रमेश भी एक दफ्तर में काम करता है। रमेश सुबह जाता है और पांच बजे के बाद लौटता है। निशा घर का सारा काम निपटाकर सो जाती है। पति के घर लौटने से पहले उठती है। वह न हाथ मुंह धोती है, न कपड़े बदलती है और न मेकअप करती है। सिलवटें पड़े कपड़े, बिखरे बाल और गंदी सी बनी हुई पति के आने पर दरवाजा खोलती है। रमेश निशा को देखकर खुश होने की जगह नाराज़ होते हुए कहता है, ‘तुम साफ सुथरी होकर मेकअप नहीं कर सकती?
‘मुझे अब कौन सी शादी करनी हैै या फिर किसी को रिझाना है जो सजूं या संवरूं। निशा की इन बातों को सुनकर रमेश और नाराज़ हो जाता है। वह निशा से बात नहीं करता। या तो अखबार पढऩे बैठ जाता है या फिर दोस्तों से गप्पें लगाने को निकल जाता है लेकिन रचना का पति कमल ऐसा नहीं करता। रचना चाय बनाकर ले आती है। चाय पीते हुये कमल दिन भर की बातें रचना से करता है। ऑफिस में दिन कैसे बीता और रचना भी दिन भर की बातें उसे बताती है। कमल घर आने के बाद रचना के इर्द गिर्द ही रहता है।
शक्कर जब बन जाए जहर, सेहत तबाह करती है शक्कर..!

हमारे यहां शादी का मतलब है जीवन भर का बंधन। शादी होने के बाद मर्द-औरत को जीवन भर साथ रहना पड़ता है। औरत शादी होने के बाद समझती है कि अब उसे सुन्दर दिखने की जरूरत नहीं है इसलिए वह इस तरह से लापरवाह हो जाती है। औरतें सजती संवरती हैं लेकिन जब उन्हें घर से बाहर बाजार जाना हो या किसी आयोजन में भाग लेने जाना हो। घर में रहकर सजने को वे महत्त्व नहीं देती।
यह पूर्णतया गलत है। औरत को घर में रहकर ज्यादा सजना संवरना चाहिए। शादी होने के बाद औरत को पति के साथ आजीवन रहना है। पति कहीं दूसरी औरत की तरफ न झुक जाये, इसके लिए जरूरी है कि वह सिर्फ आपका होकर रहे। पति आपका होकर तभी रहेगा जब आप उसके दिल में हरदम स्थान बनाये रहें।
पत्नी की उठायें पूरी जिम्मेदारी
आप स्थान तभी बनाये रख सकती हैं जब पति को नित्य नई सी लगें। इसके लिए आपको अभिसारिका की तरह बर्ताव करना होगा। नित्य नये रूप में सज संवरकर आप पति को रिझा सकती हैं। यह कोई मुश्किल काम नहीं है।
ऊपर दो उदाहरण दिये हैं। जो औरतें रचना की तरह का व्यवहार करती हैं वे पति को अपना बनाकर रखती हैं। जो औरतें निशा की तरह व्यवहार करती हैं उनके पति या तो दूसरी औरतों की तरफ झुक जाते हैं या फिर मित्र मंडली में ज्यादा समय गुजारते हैं।
पत्नी अगर चाहे तो पति को अपना बनाकर रख सकती है। यह तभी संभव है जब सिर्फ आपकी ही छवि पति के दिल में बसी रहे। नित्य नये रूप में आप अपने आपको सजा संवारकर ऐसा कर सकती हैं।
-किशन लाल शर्मा

Share it
Share it
Share it
Top