पं. दीनदयाल उपाध्याय को योगी आदित्यनाथ सरकार का अनमोल सम्मान

पं. दीनदयाल उपाध्याय को योगी आदित्यनाथ सरकार का अनमोल सम्मान

महापुरुषों को सम्मान देना इस देश के हर नागरिक का दायित्व है लेकिन विडंबना इस बात की है कि महापुरुषों को भी राजनीतिक खेमे में बांट दिया गया है। हाल ही में मायावती ने डाॅ. भीमराव अंबेडकर का जन्मदिन भाजपा द्वारा मनाने, संत रैदास के मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने और पंक्ति भोज में शामिल होने पर ऐतराज किया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उन्होंने खुली चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें अंबेडकर और कांशीराम की वाकई कोई चिंता है तो वे प्रदेश में इन महापुरुषों के नाम पर बने स्मारकों और पार्कों की मरम्मत कराएं और कहना न होगा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने उनका बयान आने के दूसरे ही दिन एक मोटी रकम मरम्मत के लिए स्वीकृत कर दी थी।
मायावती को अगर सभी महापुरुषों की चिंता रही होती तो वे केवल अंबेडकर और कांशीराम के नामोल्लेख तक ही सीमित नहीं रहतीं। मायावती लंबे अरसे से सत्ता से बाहर हैं। ऐसे में उन्हें लगता है कि उनके द्वारा बनवाए गए पार्कों और स्मारकों की उपेक्षा हो रही होगी लेकिन ऐसा नहीं है। सपा सरकार में भी डाॅ. राम मनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के नाम पर पार्क और स्मारक बने। ज्यादातर योजनाएं भी उन्हीं के नाम पर चलाई गईं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जब भाजपा सरकार बनी तो उसने समाजवादी नाम से जितनी भी योजनाएं चल रही थीं, सब पर रोक लगा दी। यही नहीं, अखिलेश यादव के फोटोयुक्त राशन काॅर्ड भी कैंसिल कर दिए।
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इस पर सपा को ऐतराज भी हुआ लेकिन भाजपा को अपने विकास कार्यों का श्रेय पूर्व की सपा सरकार को क्यों देना चाहिए? इस लिहाज से योगी सरकार के इस निर्णय पर अंगुली उठाई भी नहीं जा सकती। योगी सरकार ने इस दौरान एक बड़ा निर्णय लिया। महापुरुषों के नाम पर दी जाने वाली अधिकांश छुट्टियों पर रोक लगा दी। मायावती, अखिलेश और राहुल गांधी के स्तर पर उनके इस निर्णय का भी प्रतिवाद किया गया लेकिन जनता के बीच इस निर्णय को सरकार की एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा गया। उसे लगा कि शिक्षण संस्थानों में अवकाश के दिन बढ़ गए थे, पढ़ाई का समय कम हो गया था। सरकार ने इस बात का दावा किया कि वह महापुरुषों की जयंती या पुण्यतिथि के दिन उनके बारे में उस दिन के अंतिम पीरियड में जानकारी दी जायेगी। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की जायेगी तो विपक्ष के विरोध का सुरसा मुख स्वतः बंद हो गया था। महापुरुष दरअसल अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के जरिए बनते हैं,जाति के आधार पर न। फिर भी जाति की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों ने महापुरुषों को भी अपनी राजनीति का जरिया बना लिया।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में दसवीं कैबिनेट की बैठक में जेठ के आखिरी मंगलवार को वैसे तो तीन अहम निर्णय लिए गए लेकिन पं. दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर लिए गए निर्णय विशेष उल्लेखनीय हैं। 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय स्टेशन के यार्ड में दीनदयाल उपाध्याय का शव लावारिस हालत में मिला था। उस समय वे जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और मार्क्सवादी, समाजवादी और पूंजीवादी विचारधारा से अलग भारतीय हिंदू दर्शन पर आधारित एकात्म मानव दर्शन की विचारधारा को विस्तार देने के अभियान में जुटे थे। इसके बाद से ही मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नामांतरण उनके नाम के आधार पर करने की मांग भाजपा नेता कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने तो मुगलसराय में आयोजित एक सभा में मुगलसराय का नाम दीनदयाल नगर करने की घोषणा भी कर दी थी लेकिन केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने की वजह से उनकी यह घोषणा अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। अब जब फिर से केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई है तो फिर इस मांग का जोर पकड़ना और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का फलीभूत होना स्वाभाविक ही था। मंगलवार को हुई योगी मंत्रिमंडल की दसवीं बैठक में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन करने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार शीघ्र ही इस मामले में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजेगी। मध्य पूर्व रेलवे का यह महत्वपूर्ण स्टेशन 1862 में बना था। दीन दयाल उपाध्याय जनशताब्दी वर्ष पर बनी समिति के लिए सूचना विभाग को नोडल डिपार्टमेंट बनाने को भी उसने हरी झंडी दी है। पर्यटन विभाग पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मस्थल पर कार्यक्रम आयोजित करेगा। इस बावत होर्डिंग आदि लगाई जा रही हैं। सूचना विभाग दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व और कृतित्व को अभिव्यक्त कर हर जिले में प्रदर्शनी लगाएगा। इसके अलावा प्रदेश के हर विश्वविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की स्थापना होगी। उन पर सेमिनार, परिचर्चा और संगोष्ठी होगी।
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जनपद स्तरीय पुस्तकालय को दीन दयाल उपाध्याय का नाम दिया जाएगा। तहसील ब्लाक स्तर पर भी उनके नाम पर पुस्तकालय खुलेंगे। खेलकूद विभाग उनके नाम पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करवाएगा। लोक गायक उनकी सांस्कृतिक विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। उनके नाम पर पौधरोपण भी होगा। परिवहन विभाग में प्रचार-प्रसार प्रतियोगिता भी आयोजित करेंगे। इस दौरान दीनदयाल पुरस्कार में एक लाख रुपये दिए जाएंगे। पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली नंगला चंद्रभान में सूचना विभाग की टीम जायेगी। योजना पर्यटन की दृष्टि से बनाई जाएगी। दीनदयाल उपाध्याय को सरकार की ओर से उनकी जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिया जाने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा सम्मान है, उपहार है। किसी महापुरुष को सम्मान देने का इससे बेहतर जरिया दूसरा नहीं हो सकता। इस बहाने सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय की एकात्म मानववाद की विचारधारा को आगे बढ़ा सकने में सक्षम होगी।
मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रक्रिया तो पहले ही तेज कर दी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को चिट्ठी लिखकर सहमति भी मांगी थी। लेकिन उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने केंद्रीय गृहमंत्रालय के उक्त पत्र में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने चंदौली से सांसद बनने के बाद मुलसराय स्टेशन का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन करने की मांग की थी। रेल मंत्रालय ने उनकी चिट्ठी पर गृह मंत्रालय से नाम बदलने की कार्यवाही आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। गृह मंत्रालय ने इस बारे में पत्र लिखकर मामला आगे बढ़ाया। डॉ. महेंद्र पांडेय ने इस बारे में यूपी सरकार से अपील की थी कि वह केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाकर दीनदयाल उपाध्याय से जुड़ी लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान करे।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार और भाजपा ने 2016 में पं. दीनदयाल उपाध्याय का जन्मशताब्दी वर्ष मनाना प्रारंभ किया था। 25 सितंबर को बीजेपी ने दीनदयाल उपाध्याय की 100वीं जयंती पर केरल के कालीकट में विशेष अधिवेशन किया था। कालीकट वह स्थान है जहां दीनदयाल उपाध्याय को 1967 में भाजपा के पूर्ववर्ती संस्करण अखिल भारतीय जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था। इसमें शक नहीं कि रेल मंत्रालय ने दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में एकात्मता ट्रेन, अंत्योदय एक्सप्रेस और दीनदयालु कोच नाम से रेलवे की नई योजनाएं शुरू की थी। मुगलसराय रेल स्टेशन के नाम परिवर्तन की पहल भी इस दिशा में बड़ा कदम है। योगी सरकार के प्रस्ताव के बाद मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नामांतरण लगभग तय माना जा रहा है। उम्मीद है कि इस पर जल्द ही गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय की सहमति की मुहर लग जाएगी। इस तरह का एक प्रयास भदोही के भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह भी कर चुके हैं। समाजवादी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर उन्होंने राममनोहर लोहिया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की दोस्ती का वास्ता दिया था और इसका सम्मान करते हुए केंद्र सरकार के प्रस्ताव को जल्द मंजूरी दिलाने की मांग की थी। विकथ्य है कि पहले भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, राम मनोहर लोहिया, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव समेत कई नेताओं के नाम पर रेलवे स्टेशनों का नामकरण किया जा चुका है। मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर किए जाने की मांग भी इस कड़ी में बेहद पुरानी है।
-सियाराम पांडेय ‘शांत’

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