नूतन वर्ष-अभिनंदन और नववर्ष मनाने के रीति-रिवाज

नूतन वर्ष-अभिनंदन और नववर्ष मनाने के रीति-रिवाज


नव वर्ष की शुभ बेला में सभी का स्वागत और नव वर्ष की शुभकामनाएं। रवि-रथ पर सवार होकर स्वर्णिम रश्मियां जगत के प्रांगण में अपने अनुपम आलोक की छटा बिखेरने उतर रही हैं जो ठोस प्रतीक हैं मानव जाति के नव उत्कर्ष का, असीम हर्ष का।
नव वर्ष का दिन कैलेण्डर वर्ष का प्रथम दिवस होता है। कई लोग सोचते हैं कि यह नया दिन बुराइयों को छोडऩे और अच्छाइयों को अपनाने का दिन होता है। लोग पिछले पुराने वर्ष को भूलकर नए वर्ष में पूरे वर्ष के बारह महीनों कुछ अच्छा करने का संकल्प लेते हैं।
46वीं ई. पूर्व रोमन के राजा जूलियस सीजर्स ने 1 जनवरी के दिन को ‘नव वर्ष’ के रूप में स्थापित किया था। उसने इस दिन को द्वारों के राजा जेनस को समर्पित किया था और जेनस के नाम पर जनवरी माह का नामकरण किया था जिसके दो मुख थे-एक आगे देखता था और दूसरा पीछे की ओर देखता था। रोमन लोग पवित्र पेड़ की शाखाएं उपहार स्वरूप एक दूसरे को देते थे। बाद में उन्होंने राजा जेनस की तस्वीर से मुद्रित मुद्राएं देनी प्रारम्भ कीं। वे लोग राजा के लिए भी उपहार लाते थे। बाद में ईसाई लोगों ने इस प्रथा को बंद कर दिया।
पुराने पर्शियन लोग अण्डे भेंट स्वरूप देते थे जो उत्पादन का प्रतीक थे। इंग्लैंड में पादरियों ने नए वर्ष के कई रीति-रिवाज रोमन लोगों के अपनाए थे जिसने ब्रिटिश साम्राज्य पर 43ई. पूर्व आक्रमण किया था। साधारणत: गहने और सोना भेंट स्वरूप दिए जाते थे। इसके अन्तर्गत महारानी ऐलिजाबेथ प्रथम को भारी मात्रा में रत्नजडि़त दस्ताने मिले थे। अंग्रेज अपनी पत्नियों को नव वर्ष के दिन सोने की पिन और दूसरी चीजें खरीदने के लिए पैसे देते थे। सन् 18०० में यह परम्परा लुप्त हो गई, लेकिन फिर भी खर्च हेतु पैसे देने का रिवाज है।
नए वर्ष का आनन्द मनाने का तरीका विभिन्न देशों में भिन्न-भिन्न हैं। जितना पुराना हमारा समाज है, उतना ही पुराना यह रिवाज भी है। साधारणत: नूतन वर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन इसे हर स्थान पर समय के अनुसार अलग-अलग मनाया जाता है। हमारे ही देश के विभिन्न सम्प्रदायों के लोग अलग-अलग दिन ‘नव वर्ष’ मनाते है। मध्यकालीन यूरोप के अधिकतर देशों के लोग 25 दिसंबर से लेकर 12 दिनों तक त्यौहार मनाते हैं।
नव वर्ष मनाने के संसार के भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न रीति-रिवाज हैं। 
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प्राचीन काल में नए साल के प्रति चीनी लोगों का दृष्टिकोण अलग था। वे साल के पहले दिन को पहला दिन मानते थे। इस दिन को मनाने के लिए वे अपने घरों की सफाई करते, कर्ज चुकाते और छुट्टी मनाते थे। आज भी वे अपने कामों से छुट्टी ले लेते हैं। आतिशबाजियां चलाकर वे खुशी प्रकट करते हैं।
जापान के लोग 12 का घंटा बजते ही ‘ओतान जो बी ओने दे तो गोजाईमासु’ अर्थात् ‘हैप्पी बर्थ डे टू यू’गाते हैं, एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। नए कपड़े पहनते हैं, मित्रों से मिलते हैं। वे हर घर के फाटक पर देवदार और बांस की डालियां सजाते हैं और झींगा, केकड़े और लाल टैंगरीन टांगते हैं जो दीर्घायु और सुख की कामनाओं का प्रतीक है।
इस्राइल में नव वर्ष को ‘रोश हशानाह’ कहते हैं। यह दिन सितम्बर माह के अन्त या अक्टूबर माह की शुरूआत में तुरही बजाकर मनाया जाता है।
स्पेन में 31 दिसम्बर की रात को घोड़े दौड़ाए जाते हैं। ऐलसीड महान योद्धा ने अपने घोड़ों को शराब पिलाकर अपने देश को स्वतंत्र कराने के लिए युद्ध लड़ा था तो थके होने के बावजूद भी घोड़ों ने उसे विजय दिलाई थी।
न्यूयार्क के टाइम्स स्क्वेअर में हजारों लोग इक_े होते हैं। अद्र्धरात्रि को घटियां बजती हैं, पटाखे चलाते हैं और ‘हैप्पी न्यू ईअरÓ कहते हैं। फ्रांस में नए साल पर एक दूसरे को उपहार देते हैं। इंग्लैंड के स्काटलैंड में इस दिन जो मेहमान सबसे पहले घर में प्रवेश करता है, घर का मालिक उसे गले लगाता है, क्योंकि उसे भाग्यशाली समझा जाता है। उस समय खुशी का वातावरण रहता है। सभी नाचते-गाते हैं।
भारत में 31 दिसम्बर की रात 12 बजे जनवरी के उदय के साथ ही लोग लकडिय़ां जलाकर नाचते गाते हैं। जगह-जगह भोंपू और सीटियां सुनाई पड़ती हैं। लोग पटाखे चलाते है-नव वर्ष के आगमन में। नया वर्ष नूतन सवेरा, नई चीजें, नई आशाएं, आकाक्षाएं और संकल्प लेकर आता है।
संसार के सभी लोग बांहें फैलाकर नव वर्ष का स्वागत करते हैं। नया वर्ष सुखमय संसार का और नव प्रकाश का संदेश लेकर आए। घना तम दूर हो और सभी के हृदय में आस्था और दृढ़ संकल्प के दीप प्रज्वलित हों। असत्य, अन्याय व भ्रष्टाचार का नाश हो। संसार के सभी लोग उल्लसित मन से नव वर्ष का स्वागत करें।
आप सभी को नूतन वर्ष की शुभकामनाएं। नूतन वर्ष मंगलमय हो।
-रवि रश्मि ‘अनुभूति  

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