निर्यात में गिरावट से 70 हजार की छंटनी

निर्यात में गिरावट से 70 हजार की छंटनी

asochamनई दिल्ली। निर्यात में हुई भारी गिरावट के कारण पिछले साल की दूसरी तिमाही में लगभग 70 हजार कामगारों की छंटनी हुई और इसका सबसे अधिक प्रभाव अनुबंधित कर्मचारियों पर पड़ा।
एसोचैम के नये अध्ययन के अनुसार निर्यात इकाइयों में खासकर 2015 की दूसरी तिमाही के दौरान रोजगार की संभावनाओं में सबसे अधिक कमी आयी। वैश्विक मांग में आयी कमी के कारण कुछ इकाइयों को छंटनी करनी पड़ी और इसका सबसे अधिक प्रभाव नौकरियों के ठेके पर दिये जाने के कारण हुआ। अध्ययन के अनुसार अधिकतर निर्यात इकाई ठेके पर कर्मचारियों पर निर्भर हैं, इस कारण अनुबंधित नौकरियों में हुई भारी छंटनी से इस क्षेत्र की खस्ता हालत के संकेत मिलते हैं। आलोच्य अवधि में ठेके के कर्मचारियों की छंटनी तो की गयी लेकिन कर्मचारियों की संख्या में हुई गिरावट की भरपाई के लिए पर्याप्त संख्या में नियमित रोजगार भी नहीं सृजित किये गये। सका सबसे अधिक प्रभाव कपड़ा क्षेत्र पर पड़ा, जहां कुछ नियमित कर्मचारियों को तो काम पर रखा गया लेकिन भारी संख्या में अनुबंधित कर्मचारियों की संख्या में कमी आयी।
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चमड़ा क्षेत्र को छोड़कर लगभग सात क्षेत्रों में नियमित और ठेके दोनों तरह के कर्मचारियों की भारी छंटनी हुई है। चमड़ा क्षेत्र में कुछ अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए है। वित्त वर्ष 2015-16 की पहली दो तिमाहियों के दौरान देश के निर्यात में 17 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आयी। कम कीमत होने के बावजूद निर्यात की गिरावट चालू वित्त वर्ष में भी जारी है। अप्रैल-अगस्त 2016-17 के दौरान पहले की तुलना में 2.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ निर्यात कुल 10851994 लाख अमेरिकी डॉलर का रहा। एसोचैम के अनुसार मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए में निर्यात के बल पर अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना असंभव तो नहीं लेकिन काफी चुनौतीपूर्ण है।
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 एसोचैम का कहना है कि इसके लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को देश के विकास की नयी इबारत लिखने के लिए घरेलू अर्थव्यवस्था की ओर देखना चाहिए और ऐसा तब ही हो सकता है जब घरेलू मांग बढ़ायी जाये। एसोचैम के महासचिव डी.एस.रावत ने कहा कि रोजगार सृजन अतिरिक्त मांग पैदा करने का सबसे महत्वपूर्ण कारक है।
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 अधिक रोजगार का मलब है कि लोगों की खरीद क्षमता बढ़ेगी जिससे सेवाओं और वस्तुओं की मांग बढ़ेगी। रत्न एवं आभूषण, कपड़ा और तैयार वस्त्र के क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर सबसे अधिक दुष्प्रभाव दिखा है।

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