नारी ही ब्रह्म विद्या, अन्नपूर्णा, ऋद्धि एवं सिद्धि है

नारी ही ब्रह्म विद्या, अन्नपूर्णा, ऋद्धि एवं सिद्धि है

 women-goldनारी में वह अद्भुत ऊर्जा समाहित है, जो किसी भी असंभव से असंभव कार्य को संभव बनाने का सामर्थ्य रखती है। परिवार की सुख समृद्घि, समाजोत्थान एवं राष्ट्र का नव निर्माण नारी की सहभागिता के बिना असंभव है। नारी ही ब्रह्म विद्या, अन्नपूर्णा, ऋद्धि एवं सिद्धि है। नारी को समाज की धुरी कहा गया है। सुसंस्कारित शिक्षा में नारी की अहम् भूमिका होती है। चूंकि माता के आश्रय में ही रहकर शिशु रूपी पौधा फलता-फूलता है एवं माता के ही संस्कारों को प्राप्त करते हुए शैक्षणिक तौर पर ज्ञान की दहलीज पर खड़ा होता है, इसलिये समाज में आदिशक्ति मानी जाने वाली नारी माता के रूप में बच्चों के प्रारम्भिक शिक्षण हेतु मुख्य आधार स्तम्भ है।
परिवार को प्रथम पाठशाला कहा जाता है, जिसमें माता को शिशु के प्रथम गुरू की संज्ञा दी गई है। बच्चों का सर्वागीण विकास माता के स्नेहिल आशीष एवं शिक्षण पर आधारित है। बच्चे, माता के आश्रय, गोद में ही रहकर सुसंस्कारित होते है। माता एवं पिता के व्यक्तित्व का बच्चों पर निश्चय ही गहन प्रभाव पड़ता है। यहां तक सामाजिक धारणा है कि जब कोई नवजात शिशु जन्मता है तो लोग यह कहते हैं कि शिशु माता अथवा पिता किसके नाक-नक्शे अर्थात चेहरे के समान दिखाई देता है। घर में माता के सानिध्य में बच्चों का अधिकांश समय व्यतीत होता है। अतएव माता बच्चों की कमियों, खामियों, सद्गुणों से भली भांति परिचित रहती हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में माता ही ऐसी होती है, जो बच्चों को सुसंस्कारित एवं चरित्रवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कहानी..कहां है खुशियां

शालेय शिक्षा मात्र पुस्तकीय ज्ञान करा सकती है, अच्छा विद्वान बना सकती है, नौकरी दिला सकती है परन्तु सद्चरित्रवान, सुसंस्कारित एवं आदर्श नागरिक केवल माता ही बना सकती है। शालेय शिक्षा की महत्ता मात्र नौकरियों के लिये ही है परन्तु जीवन की यात्रा में व्यवहारिक ज्ञान का होना नितान्त आवश्यक है। कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने इन पंक्तियों में इस तथ्य की अभिव्यक्ति दी है ‘शिक्षा तुम्हारा नाश हो, तुम नौकरियों के लिये बनी।’ किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मुख्य आधार स्तम्भ शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था है। उद्देश्यहीन शिक्षा प्रणाली से ज्ञान अर्जन कर जीवन पथ पर स्वर्णिम सफलता की कल्पना संदिग्ध है। चूंकि व्यवहारिक ज्ञान एवं आध्यात्म रहित शिक्षा अर्थहीन है। अतीत में हमारा भारत परम्पराओं, विज्ञान, सामाजिक संगठन और चेतना में सबसे आगे रहा। साहित्य, कला एवं संस्कृति का संवाहक यह राष्ट्र विश्व के लिये अनुकरणीय उदाहरण है। इसका मुख्य कारण था हमारी सम्पूर्ण सार्थक शिक्षा। वास्तव में यदि देखा जाय तो शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है- ‘मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम बनाना।’ जब शिक्षा ग्रहण करने वाले और शिक्षा देने वाले को यह जानकारी न हो कि वह शिक्षा क्यों ग्रहण कर रहा है एवं शिक्षा क्यों दे रहा है तो ऐसी स्थिति में देश के भविष्य पर अवश्य ही प्रश्न चिन्ह उपस्थित होता ही है। नारी वर्ग समाज का एक विशिष्ट अंग है। भारतीय समाज में नारी को आदिशक्ति, शक्ति स्वरूपा एवं गृह लक्ष्मी आदि सम्माननीय सम्बोधन दिये गये हैं। नारी सामाजिक विकास की मुख्य कड़ी है। नारियों ने अपने आपको कभी पूर्णत: नहीं समझा न ही अपनी सार्वभौमिक शक्तियों को आत्मसात किया।
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नारियों में मात्र शिक्षण ही नहीं वरन्ï समूचे विश्व की सार्वभौमिक प्रगति एवं क्रांतिकारी जन जागृति लाने की अद्भुत क्षमता है। आज आवश्यकता है नारी शक्ति को जागृत करने की, उसे पहचानने की, सामाजिक, पर्यावरणिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में नारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की, उनका समुचित उपयोग करने की। नारी के बिना ज्ञानवान प्रगतिशील समाज का अस्तित्व खतरे में हो सकता है।
प्राय: देखा गया है कि बच्चों के अध्यापन कार्य हेतु शिक्षकों से ज्यादा शिक्षिकाएं सफल होती हैं। चूंकि नारियों में मातृत्व स्नेह की अद्भुत क्षमता विद्यमान है। उच्च आदर्शवादी संस्कारित, व्यवहारिक ज्ञान एवं आध्यात्म से युक्त शिक्षा नारी के आश्रय में ही रहकर फलीभूत होती है। बच्चों को शिक्षा-दीक्षा से सुसंस्कारित करने, जागरूकता लाने एवं उन्हें स्वाबलम्बी बनाने हेतु नारियों की सहभागिता परम आवश्यक है। अतएव पाश्चात्य प्रदूषण युक्त परिवेश में बढ़ते चरणों एवं उससे भारतीय सुसंस्कारित अप्रतिम स्वरूप पर हो रहे निरन्तर आघात से भारतवर्ष को एकमात्र नारी शक्ति ही बचा सकती है। सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणिक, कला-साहित्यिक एवं नैतिक मूल्यों के पुनर्जीवन की जीवन्तता एवं स्वर्णिम भविष्य की कल्पना को साकार करने हेतु नारी का जागृत होना नितान्त आवश्यक है। अत: नारी अपने अस्तित्व एवं सामथ्र्य को पहचान कर अपनी कर्तव्य परायणता से राष्ट्र के भावी नव निर्माता बच्चों को ज्ञान बोध कराकर परिवार, समाज एवं राष्ट्र के सर्वागीण विकास में अपनी सहभागिता हेतु कृत संकल्पित हो, नव निर्माण के पथ पर अपने पावन चरण बढ़ाने हेतु सद्प्रयास सुनिश्चित करे। (प्रेम फीचर्स)
नरेन्द्र नाथ ‘चट्टान’ दैनिक रॉयल बुलेunnamedटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर royal bulletin टाइप करे और एप डाउनलोड करे..आप हमारी हिंदी न्यूज़ वेबसाइट
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