नरेन्द्र मोदी से देश-विदेश प्रभावित..मोदी में ही पाकिस्तान को ललकारने की अद्भुत क्षमता

नरेन्द्र मोदी से देश-विदेश प्रभावित..मोदी में ही पाकिस्तान को ललकारने की अद्भुत क्षमता

modi-18 लगभग ढाई साल पहले नरेन्द्र मोदी देश के प्रधान मंत्री बने थे तो, इस बात को लेकर सबको अचरज हुआ कि लोकतंत्र में क्या ऐसा चमत्कार हो गया कि गुजरात से केन्द्र की ओर कूच कर वे देश के प्रधानमंत्री बन गए। बड़े-बड़े राजनीतिक रणबांकुरों को उन्होंने सत्ता से दूर कर दिया।क्या एक ठेठ देशी से दिखने वाले नरेन्द्र मोदी देश को आन्तरिक वाह्य- दोनों दृष्टियों से नेतृत्व दे सकते हैं- यह सवाल हर कहीं पूछा जा रहा था। मगर लोकतंत्र में, देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी को लेकर एक प्रयोग कर ही डाला, क्रान्ति का आगाज कर ही दिया। आन्तरिक स्तर पर तमाम राजनीतिक पार्टियों ने निश्चित रूप से नरेन्द्र मोदी की टांग खींचने की योजना बनाई, कोशिश की और आजमाया भी। गैर भाजपाइ दलों ने बौखला जाने की हद तक टांग खिंचाई की। मगर नरेन्द्र मोदी आज की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों की गंभीरता की दृष्टि से एक जुझारु, संकल्पबद्ध व आत्मविश्वास संपन्न प्रधानमंत्री साबित हुए। पहले की सरकारें भी पाकिस्तान पर दबाव बनाती थी, सीमा पर गोली-बारी होती थी, शायद  मोदी में ही पाकिस्तान को ललकारने की अद्भुत क्षमता है। जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो निश्चित रूप से उन्होंने आंतरिक के साथ-साथ वाह्य मोर्चों पर भी अपनी पकड़ बनाने की पूरी कोशिश की। विपक्ष ने उनकी हवाई यात्राओं के किराए का हिसाब-किताब लगाने में अपना समय जाया किया। मगर नरेन्द्र मोदी एक सोची-समझी अन्तर्राष्ट्रीय रणनीति के तहत काम कर रहे थे। वे विदेशों में कोई सैलानी या पर्यटक नहीं थे। वे एक ऐसे कर्णधार नेता के रूप में थे जो आतंकवाद के भयंकर दौर से गुजर रहे देश को उबारना चाहता है और इस पर जबर्दस्त अन्तर्राष्ट्रीय बहस छेडऩा चाहता है।  नरेन्द्र मोदी के जबर्दस्त प्रयास से आतंकवाद प्रभावित लगभग विश्व के सारे देशों ने उन्हें वरदहस्त दिया और अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति स्थापित करने की दिशा में समर्थन भी दिया।
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अगर नरेन्द्र मोदी इतना जनमत नहीं बना पाते तो आज सर्जिकल स्ट्राइक की यह पृष्ठभूमि नहीं बनती। उन्होंने सारे विश्व का ध्यान इस बात की ओर आकृष्ट किया कि भारत पाकिस्तान प्रशिक्षित व प्रायोजित अतिवाद के कब्जे में है और आतंकवादियों ने भारतीय सीमाओं में अपना कब्जा जमाया, इसलिए सर्जीकल स्ट्राइक जैसी स्थिति पैदा हो गई। सिर्फ विदेशी ही नहीं बल्कि आम भारतवासी भी इस बात से कायल हो गये कि नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्राओं में एक बड़ी हद तक दमखम थी। अपनी वाकपटुता का परिचय देकर, अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित कर उन्होंने देश-विदेश का ध्यान आतंकवाद की ओर खींचा। उन्होंने राष्ट्र के कर्णधार की हैसियत से  बताया कि पाकिस्तान से निपटने के लिये उन्होंने किस तरह का अन्तर्राष्ट्रीय घेरा बनाया। फिर पाकिस्तानी हरकतों का मुंहतोड़ जवाब दिया।
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आज सिर्फ भारत नहीं बल्कि विश्व भी इस बात का कायल है कि नरेन्द्र मोदी का चक्रव्यूह कितना व किस हद तक कामयाब, कारगर व सटीक साबित हुआ। आखिर कब तक नरेन्द्र मोदी सब्र करते। भद्द पिटवाकर देश चलाना उन्हें पसन्द नहीं, वे धुरंधर बल्लेबाज हैं, जो चौके-छक्के लगाते हैं। जनता ने उनके कंधों पर जो दारोमदार डाल दिया है, वे उसे निभाने में लग गए। अपनी जवाबदेही व हाजिर जवाबी से उन्होंने पूरे विश्व की मदद ले ली। सबको अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामी आतंकवाद से अवगत कराया। नरेन्द्र मोदी की सफलता व जुझारुपन का अन्दाजा लगाने के लिए पूरा पक्ष, पूरा विपक्ष, पूरा राष्ट्र- सबकी एकबद्धता काफी है। पाकिस्तानी नेताओं को गैर भाजपाइयों से जो हमदर्दी थी, वह भी खत्म हो गई क्योंकि सर्जीकल स्ट्राइक को लेकर सारा भारत एक हो गया और पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया। (विनायक फीचर्स)आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर  पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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