नया साल मनाइये बांट कर खुशी..जीवन को एक नये तरीके से करिए शुरु

नया साल मनाइये बांट कर खुशी..जीवन को एक नये तरीके से करिए शुरु

 हर साल की तरह एक बार फिर से नया साल दस्तक दे रहा है। पुराने साल में अधूरे रहे सपने एक बार फिर से अंगड़ाई लेते दिखाई दे रहे हैं। एक बार फिर से ऐसा लगने लगा है कि जीवन को एक नये तरीके से शुरु किया जा सकता है ,एक बार फिर से बीती बातों और भूलों को बिसरा कर नया जीवन शुरु करने का मौका नया साल हर बार की तरह लेकर दरवाजे पर खड़ा है।
बेशक पुराने अनुभव निराश करने में कोई कसर नहीं ही छोडऩे वाले हैं पर निराशा से हाथ क्या लगेगा, सिवाय इसके कि मन दुखी होगा। नया काम शुरु करने से पहले दुखी होने से यदि कुछ अच्छा होता हो बेशक दुखी हुआ जाये और नई शुरुआत न की जाये पर सब जानते हैं कि दुख और निराशा किसी समस्या का कोई हल न पहले कभी हुआ है, न ही आगे कभी होने जा रहा है।
तो फिर क्यों न नये साल की शुरुआत एक नये सपने, एक नई उमंग के साथ की जाये ताकि नया साल एक नये ढंग से शुरु तो हो आगे तो जो होगा। सो होगा ही ।
एक व्यक्ति के तौर पर नये साल को शुरु करने का मतलब होना चाहिये जीवन में एक नई रवानी आये ,नये संबंध बनें ,नये व्यक्तियों से सम्पर्क हों, पुराने लोगों से संबंधों का नवीनीकरण हो ,पुराने गिले शिकवे दूर करके नये ढंग से एक नई शुरुआत हो जाये तो समझ लीजिये कि नया साल आ गया नहीं तो महज तारीखें बदलने भर से नया साल मान लेने से कुछ भी नया होने वाला नहीं है । नया साल 2016 हो 2017 अथवा इसके बाद का कोई और साल पर हर बार मतलब एक ही होना चाहिये कि हमें कुछ नया और अच्छा करना ही है। नये साल में इससे अच्छा और क्या हो सक्ता है कि हम किसी गरीब के लिये अपनी कमाई में से कुछ उसे दें सकें ,उसके या उसके बच्चों के लिये कुछ कर सकें तो उसके दिल से जो दुआयें निकलेंगी, वे हमारे लिये किसी बड़े उपहार से कम नहीं होंगी और ऐसी दुआयें लेने का मौका नये साल से बेहतर क्या हो सकता है !
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नये साल पर यदि हम गौर से देखें तो पूरी दुनियां आज प्रदूषण के संकट से जूझती नजर आ रही है। बढ़ता हुआ प्रदूषण हर रोज नई बीमारी, नया संकट, नया खतरा पैदा कर रहा है। यदि हम सब मिलकर केवल एक एक पौधा भी लगायें तो न केवल हमें और हमारे देश को ही राहत मिलेगी बल्कि सारी दुनियां भी ग्लोबल वार्मिंग जैसे बड़े खतरे का सामना कहीं ज्यादा मजबूती से कर पायेगी। देखा जाये तो यह कोई बहुत बड़ा काम है भी नहीं , पर इसका महत्त्व कितना ज्यादा होगा, इसे कोई भी समझदार व्यक्ति आसानी से महसूस कर सकता है।
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नये साल में हम यदि यह संकल्प लें कि हम अशिक्षा से लड़ाई्र में अपने देश के साथ खड़े होंगे तो हम अपने आसपास के केवल एक या दो बच्चों को उनकी शिक्षा की दृष्टि से गोद ले लें और उन्हें अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलवा दें तो शायद इससे बेहतर ढंग नहीं हो सकता नये साल को सेेलिब्रेट करने का । दो चार घंटे की पार्टी में नाच कूद या खाने पीने सें कहीं ज्यादा संतोष और सकून देगा नये साल का ऐसा उत्सव।
तरीके और भी बहुत सारे हैं पर चुनना आपको ही है कि 2011 की एक जनवरी को शुरु होने जा रहे नये साल को आप कैसे मनाते हैं पर नये साल का स्वागत यदि किसी अच्छे काम से कर पाये ंतो एक बहुत अच्छी शुरुआत आप इस बार कर रहे होंगे।
-घनश्याम बादल

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