नक्सलवाद का हो समूल उन्मूलन

नक्सलवाद का हो समूल उन्मूलन

छत्तीसगढ़ के बस्तर में ऑपरेशन प्रहार में सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा 24 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराने का दावा किया जा रहा है। इस ऑपरेशन में तीन जवान शहीद हो गये और सात जवान घायल हुए हैं। मारे गये नक्सलियों में कई बड़े कमांडर भी शामिल हो सकते हैं। इस ऑपरेशन में नक्सलियों को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचने का दावा किया जा रहा है। बीजापुर के तररेम में हुए दो आईईडी विस्फोट में जहां तीन जवान घायल हुए तो वहीं एक जवान के पैर में गोली लगी, जिसको चौपर से रेस्क्यू किया गया। उक्त ऑपरेशन को एसटीएफ, डीआरजी और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन द्वारा संयुक्त रूप से अंजाम दिया गया। यह भी बताया जा रहा है कि इस आपरेशन को दो जगह बीजापुर और सुकमा जिले में एक साथ शुरू किया गया। ऐसा पहली बार हुआ कि सुरक्षाबल तोंडामरका तक पहुंचने में कामयाब रहे। तोंडामरका को नक्सलियों की मांद माना जाता है, जहां सुरक्षाबल नहीं पहुंच पाए थे।
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वैसे इस आपरेशन के बावजूद कुछ कुख्यात नक्सली अपने आप को बचाने में सफल रहे। नक्सली नेता गणेश उइके सहित उसके साथी फिर पुलिस के घेरे से बच निकले। बीजापुर और दंतेवाड़ा की ज्वॉइंट फोर्स बीजापुर के डोडी तुमनार जंगल में गणेश उइके को घेरने चार दिन से डेरा डाले हुए थी, लेकिन कैंप में पुलिस पहुंचने से पहले वह फरार हो गया। नक्सलियों का थिंक टैंक समझे जाने वाले गणेश उइके ने एक बार फिर फोर्स को चकमा दिया। इससे पहले भी उसे बैलाडिला के तराई में घेरने की कोशिश की गई थी। मौके से पुलिस द्वारा ग्रेनेड, लेथ मशीन, मिक्सर सहित अन्य नक्सल सामग्री जब्त की गई है। वैसे सुरक्ष बलों की यह सफलता कई मायने में काबिलेतारीफ है। क्यों कि देश में आतंकवाद के साथ-साथ नक्सलवाद भी एक बड़ी समस्या है तथा समय की गतिशीलता के साथ यह समस्या विकराल होती जा रही है। देश के नक्सल प्रभावित राज्यों में स्थिति की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस समस्या पर लगाम लगाने संबंधी सरकारी कोशिशें अब तक असफल ही होती आई हैं तथा नक्सली अपने नेट वर्क को मजबूत बनाने में लगातार सफल हो रहे हैं। मानवता विरोधी नक्सलियों द्वारा कई बार सुरक्षा बलों के सथ-साथ आम जन को भी निशाना बनाया जाता है। खुद के अन्याय- अत्याचार का शिकार होने का दावा करने वाले नक्सली देश के मासूम लोगों पर घोर अत्याचार कर रहे हैं। चूंकि सरकारों के पास नक्सलवाद से निपटने के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति , निश्चित समय सीमा और दूरदर्शिता नहीं है, इसलिये नक्सली अपने नेटवर्क के विस्तार एवं फायदे के लिये इन्हीं अनुकूल परिस्थितियों का फायदा उठा रहे हैं। नक्सल प्रभावित राज्यों की सरकरों द्वारा इस समस्या के उन्मूलन के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये की धनराशि खर्च किये जाने के साथ-साथ कई बार रणनीतिक कौशल का इस्तेमाल भी किया जा चुका है लेकिन नक्सलवाद की समस्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है। नक्सली हिंसा का रास्ता तो अपनाते ही हैं, साथ ही वह लोकतांत्रिक शासन प्रणाली पर विश्वास नहीं करते तथा आदिवासियों को इंसाफ दिलाने के नाम पर अपनी समांनांतर सत्ता का संचालन कर रहे हैं। उनकी सत्ता में सिर्फ हिंसा और रक्तपात का ही बोलबाला है।
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यह भारत जैसे लोकतांत्रिक देश एवं सभ्य समाज में किसी कलंक से कम नहीं है। इसलिये अब समय आ गया है कि इस कलंक को हमेशा-हमेशा के लिये मिटा देने के लिये रणनीतिक पहल होनी चाहिये। सरकारों द्वारा नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोडक़र राष्ट्र एवं समाज की मुख्य धारा में शामिल होने के भरपूर अवसर देने तथा नक्सलियों की मांगों एवं समस्याओं का लोकतांत्रिक तरीके से निराकरण की कोशिश भी की जाती है। सरकार की इस पहल की नक्सल प्रभावित राज्यों के लोगों को कई बार भारी कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसे में अब आवश्यक हो गया है कि नक्सलियों की शातिर चाल को हर हालत में विफल किया जाए। इससे चीन जैसे भारत विरोधी देशों को कड़ा संदेश देने में भी मदद मिलेगी।
नक्सली देश में हिंसा का तांडव मचाते हैं। वे भारत विरोधी कुछ देशों की मदद से यहां अपना नेटवर्क निरंतर मजबूत कर रहे हैं। भारत विरोधी दुनिया के कई देश भारत में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की सफलता एवं यहां की समृद्धि व खुशहाली से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं तथा ईर्ष्या और द्वेषवश वह नक्सलवाद के माध्यम से भारत विरोधी तानाबाना तैयार करते रहते हैं। ऐसे में एक तरफ आतंकवाद तो दूसरी तरफ नक्सलवाद भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है। देश में अगर कहीं भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में कुछ विसंगतियां हैं तथा समता, समानता एवं सामाजिक न्याय के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं तो इस समस्या का समाधान भी लोकतांत्रिक तरीके से ही निकाला जाना चाहिये। अपनी मांगें मनवाने और समस्याओं के समाधान के लिये देशवासियों का खून बहाने का कोई औचित्य नहीं है। देश में नक्सलवाद एक गंभीर समस्या है तथा इसका समूल उन्मूलन होना ही चाहिये। 

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