धर्म के नाम पर भी किसी तरह का भेद-भाव न करें..सामंजस्य बनाये रखें पड़ोसियों के साथ…

धर्म के नाम पर भी किसी तरह का भेद-भाव न करें..सामंजस्य बनाये रखें पड़ोसियों के साथ…

 अरस्तू ने ठीक ही कहा है – ‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।’ वस्तुत: समाज के अभाव में मनुष्य का सर्वांगीण विकास बिलकुल ही संभव नहीं है। समाज में पड़ोसियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण नजर आती है अत: नीचे दी गई कुछ बातों को ध्यान में रखकर पड़ोसियों के साथ मधुर व्यवहार को कायम रखा जा सकता है-
– 21 वीं सदी की इस दौड़ में जातीयता की भावना को दूर रख एक ही जाति ‘इंसान’ के सिद्धान्त के आधार पर पड़ोसियों के साथ अपनापन बनाये रखें।
– धर्म के नाम पर भी किसी तरह का भेद-भाव न करें।
– घरेलू बातों का आदान-प्रदान यथासंभव न करने का प्रयास करें।
जब आपको एक औरत पसन्द करती है, तब आप एक पति हैं.. !

– आर्थिक मामलों में न तो पड़ोसियों को बड़ा या छोटा मानें और न ही स्वयं को असहाय मानकर पड़ोसियों से दूर रहें बल्कि मित्रवत व्यवहार रखें।
– जमीन-संबंधी छोटे-मोटे मामलों को नजऱअंदाज करने का प्रयास करें।
– पड़ोसियों से जलन की भावना तो मन में बिलकुल न आने दें।
– संकट यथा बीमारी आदि में समय-समय पर कुशल क्षेम अवश्य पूछें।
‘प्रेम विवाह’ के रास्ते में रूकावट बनते जाति धर्म के बंधन…!

– बच्चों के झगड़ों के निपटारा करने में अपने-आप को न उलझायें।
– रुपये-पैसे, घरेलू सामग्रियों एवं भोज्य-पदार्थों का आदान-प्रदान कम से कम करें।
– कभी-कभी चाय, नाश्ता आदि पर एक-दूसरे को बुलाकर घनिष्ठता बढ़ायें
– रजनीश कुमार

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