धनतेरस पर शुभ है बर्तनों की खरीदारी,,पर ये टालता है अकाल मृत्यु का योग भी….!

धनतेरस पर शुभ है बर्तनों की खरीदारी,,पर ये टालता है अकाल मृत्यु का योग भी….!

dhanterasधनतेरस की महत्ता  दीवाली से कम नहीं है। इस दिन लोग जमकर बर्तनों व धातु से संबंधित चीजों की खरीददारी करते हैं। माना जाता है कि धनतेरस पर मां लक्ष्मी का घर में आगमन होता है। इस बार लोगों की ओर से धनतेरस पर खरीददारी की जा रही है, लेकिन उतनी नहीं हो रही है जितनी पहले हुआ करती थी। विश्व में आई मंदी का असर धनतेरस पर साफ दिखाई देता है। वह बर्तन की दुकानें जहां लोगों को धनतेरस पर पांव रखने तक को जगह नहीं मिलती थी, वह आजकल ग्राहकों के इंतजार में रहते हैं। मंदी का असर इतना व्यापक पड़ा है कि लोगों की ओर से बेचने के लिए लाए जाने वाले बर्तनों को भी दुकानदार खरीदने में संकोच कर रहे हैं। क्योंकि प्रत्येक दिन आता उतार-चढ़ाव उनके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। उधर, दुकानदारों के पास बने माल का भी कोई खरीददार नहीं है। गौरतलब है कि धनतेरस पर बर्तनों की खरीद का विशेष महत्व है। धनतेरस पर कोई न कोई बर्तन खरीदकर घर ले जाना पुरातन समय से चला आ रहा है और इसे लोग शुभ भी मानते है। इस बार पूरे विश्व सहित देश में आर्थिक मंदी है। बर्तन विक्रेता भी इससे आहत है। तैयार माल के दाम कम नहीं हुए है, जबकि कच्चा माल सस्ता हो चुका है। बर्तन विक्रेताओं के लिए बड़ी मुश्किल है कि वे तैयार माल व कच्चे माल में तालमेल कैसे कायम करे। स्क्रैप के रूप में ग्राहकों की तरफ से दिए जाने वाले एल्यूमीनियम, पीतल, तांबा, स्टील आदि खरीदने पर बर्तन विक्रेता को नुकसान का अंदेशा लग रहा है, क्योंकि मार्केट लगातार नीचे गिर रही है। बर्तन विक्रेता धनतेरस पर बहुत आशाएं लगाए बैठे है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु मां लक्ष्मी के साथ मृत्यु लोक में विचरण करने को आए। उन्होंने कहा कि मैं दक्षिण दिशा में जा रहा हूं उधर मत देखना, लेकिन लक्ष्मी जी भी उनके पीछे चल पड़ी। रास्ते में गन्ने के खेत से लक्ष्मी जी ने गन्ना लेकर चू्सना शुरू कर दिया। तत्क्षण भगवान विष्णु भी लौट आए और उन्हें ऐसा करते देख बहुत क्रोधित हुए और श्राप दे दिया कि 12 साल तक वह किसान की सेवा करे। यह कहकर भगवान क्षीर सागर चले गए। लक्ष्मी जी ने किसान के घर में बेटी के रूप में प्रवेश किया और किसान को धन से पूर्ण कर दिया। 12 साल पूरे होने के बाद भगवान विष्णु जब मां लक्ष्मी को लेने आए तो किसान ने जाने से रोक लिया। इस दौरान गंगा जी ने किसान को बताया कि उनकी बेटी मां लक्ष्मी हैं। गंगा जी ने कहा कि अगर लक्ष्मी जी को जाने दिया तो दोबारा गरीब हो जाओगे। किसान ने वापस आकर लक्ष्मी को न ले जाने की जिद की। भगवान विष्णु ने श्राप संबंधी सारी बात बताई, लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़ा रहा। आखिर लक्ष्मी जी ने किसान से कहा कि कल तेरस है। तुम अपना घर स्वच्छ कर रात्रि दीपक जलाकर रखना मैं तुम्हारे घर में पुनः  प्रवेश करूंगी। दूसरे दिन किसान ने कहे अनुसार पूजन किया और धन-धान्य से पूर्ण हो गया।
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किसानों की देखादेखी अन्य लोगों ने भी लक्ष्मी जी की पूजा शुरू कर दी। इसके चलते तेरस के दिन लक्ष्मी की पूजा शुरू हो गई। इसके अलावा इस संबंध से बर्तन इत्यादि खरीदना भी इसी धारणा से जुड़ गया।भारत की नई पीढ़ी अपने त्योहारों को भूलती जा रही है। धनतेरस भी ऐसा त्योहार है जिसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते। आम तौर पर धनतेरस को लक्ष्मी पूजन का दिन माना जाता है लेकिन यह अकाल मृत्यु से निजात पाने का सबसे बड़ा दिन है, इसके बारे में कोई नहीं जानता। धनतरेस के बारे में प्रसिद्ध ज्योतिषी बताते है  कि धनतेरस पर यमराज की उपासना का विशेष महत्व है। यमराज की पूजा से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। इस दिन लोगों को अपने घरों के बाहर दहलीज पर दीपदान करना चाहिए। दीपदान करते हुए मंत्र श्मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यापा सह त्रयोदश्यां दीपदानां सूर्यज प्रीचतामिविश् का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। उन्होंने बताया कि धनतेरस पर नवीन वस्तुओं की खरीददारी करना शुभ होता है। वैसे तो इस दिन बर्तनों की खरीद को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है लेकिन आभूषण, वस्त्र व आम उपभोग की सभी वस्तुओं की खरीददारी की जानी चाहिए। सभी को अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ न कुछ नया खास कर बर्तन जरूर खरीदने चाहिए। धनतेरस पर घरों की सफाई की तरफ विशेष ध्यान देना चाहिए। आम तौर पर लोग दीवाली पर ही घरों की साफ-सफाई करते है। उन्हे यह मालूम नहीं है कि धनतेरस पर घरों की साफ-सफाई दीवाली से भी ज्यादा जरूरी है। साफ-सफाई के बाद घरों की सजावट भी की जानी चाहिए। इसी के साथ मां लक्ष्मी की परिवार सहित आराधना करनी चाहिए।
-प्रवीण मिश्रा
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