दो तिहाई बाजार पर किफायती एयरलाइंसों का कब्जा

दो तिहाई बाजार पर किफायती एयरलाइंसों का कब्जा

airplaneनई दिल्ली। किफायती विमान सेवा कंपनियों की बढ़ती संख्या से देश के विमानन बाजार में पिछले एक दशक में बहुत बड़ा बदलाव आया है और दो-तिहाई बाजार पर इन एयरलाइंसों का कब्जा हो चुका है। भविष्य में इनकी बाजार हिस्सेदारी और बढऩे की संभावना है।
विमानन क्षेत्र के लिए बाजार अध्ययन करने वाली संस्था सेंटर फॉर एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (दक्षिण एशिया) कपिल कौल ने बताया कि घरेलू विमान सेवा क्षेत्र में यात्रियों की संख्या में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी किफायती विमान सेवा कंपनियों के दम पर है। वर्ष 2007 में घरेलू विमानन बाजार में इन एयरलाइंसों की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत थी। यह वर्तमान में बढ़कर 64 प्रतिशत पर पहुँच गई है। जिस रफ्तार से इनकी पैठ बढ़ रही है अगले दो साल में उनकी बाजार हिस्सेदारी 75-80 फीसदी या इससे भी ज्यादा हो सकती है। दुनिया की शीर्ष 20 किफायती विमान सेवा कंपनियों में साप्ताहिक क्षमता के आधार पर इंडिगो सातवें स्थान पर थी।
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  अगस्त 2016 में यह चार पायदान ऊपर चढ़कर तीसरे स्थान पर पहुँच गई। यदि एकल आधार पर देखा जाये तो इंडिगो दुनिया में सबसे तेजी से बढऩे वाली किफायती विमानन कंपनी (एलसीसी) है। साल दर साल आधार पर इसकी वृद्धि दर 28 प्रतिशत रही है। अगले डेढ़ साल में इंडिगो ने अपने बेड़े में 50 और विमान शामिल करने की योजना बनाई है। इसके बाद इसकी वृद्धि की रफ्तार और बढ़ जायेगी।
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  भारतीय विमानन क्षेत्र की वृद्धि की संभावनाएँ इसके विमानों के ऑर्डर में साफ झलकती हैं। देश में इस समय सभी एयरलाइंसों के पास संयुक्त रूप से 430 विमान हैं। वहीं, 783 के लिए ऑर्डर किये जा चुके हैं जबकि 250 से 300 विमानों के लिए ऑर्डर पाइपलाइन होने का अनुमान है। स्पाइसजेट ऑर्डर पर विचार कर रहा है। विस्तारा भी ऑर्डर करने की प्रक्रिया में है।
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  ये सभी पुराने विमानों के बदले स्थानापन्न विमान के लिए ऑर्डर हैं। यदि कोई विमान सेवा कंपनी सीट क्षमता बढ़ाने पर विचार करती है तो ऑर्डरों की संख्या बढ़ भी सकती है।

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