दूरदर्शी और कर्मठ नेता

दूरदर्शी और कर्मठ नेता

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार से दूर रहते हुए श्री अरुण सिंह ने जिस निष्ठा और उत्साह से कार्य किया उसे बहुत कम लोग जानते हैं। संघ की दीक्षा लेने वाले इंडिया रैंकिंग के सीए श्री अरुण सिंह उड़ीसा राज्य के भाजपा प्रभारी हैं और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व भी निभा रहे हैं। उड़ीसा में जिला परिषद के चुनाव में भाजपा को जिस तरह आशातीत सफलता मिली और वहां की प्रमुख विपक्षी कांग्रेस काफी नीचे पहुंच गयी, उसका श्रेय भी अरुण सिंह को ही दिया जा सकता है। भाजपा की यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपना राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले  अरुण सिंह जनसेवा की भावना से ओत-प्रोत हैं और इसीलिए पार्टी में वह निरन्तर आगे बढ़ते जा रहे हैं।
राजनीति का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि लोग सरकारी नौकरी छोड़कर जनसेवा के क्षेत्र में आ जाते हैं लेकिन वस्तुत: जनसेवा की भावना उनमें नहीं होती है। ऐसे लोगों की राजनीति में भरमार हो गयी है लेकिन कुछ लोग जनसेवा की भावना से ही राजनीति में आए हैं उन्होंने उच्च शिक्षा भी प्राप्त की और अनुशासित रहकर दूरदर्शिता और कर्मठता सीखी है। वे राजनीति के विशाल फलक पर देदीप्यमान सूर्य की तरह भले ही अभी नहीं चमके लेकिन उनमें वह क्षमता है जिसके चलते आने वाले कल में उन्हें जन-जन पहचानेगा। भारतीय जनता पार्टी में एक ऐसे ही नेता हैं अरुण सिंह जो पार्टी के कर्मठ नेता हैं और पार्टी उन्हें जो दायित्व सौंपती है, उसे जी जान लगाकर पूरा करते हैं। अपनी कर्मठता और निष्ठा के चलते ही वह इस समय पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी ने उन्हें उड़ीसा जैसे राज्य का प्रभारी बनाया है। उड़ीसा में भाजपा की स्थिति राजनीतिक रूप से काफी कमजोर हुआ करती थी लेकिन जब से  अरुण सिंह ने वहां का प्रभार संभाला, भाजपा ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। इसका नतीजा अभी हाल में सम्पन्न हुए जिला परिषद के चुनाव में दिखाई पड़ा। भाजपा कभी वहां तीसरे नम्बर पर हुआ करती थी लेकिन अब उसने कांग्रेस को काफी पछाड़ते हुए दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है।
कर्मठता, अनुशासन और दूरदर्शिता जैसे गुण किसी में यूं ही नहीं आ जाते। इसके लिए कर्म-साधना करनी पड़ती है। श्री अरुण सिंह ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के बैधापुर गांव में जन्म लिया तो ग्रामीण परिवेश की कर्मठता और अभावों का साक्षात अनुभव उन्हें वहीं हो गया। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद दिल्ली से सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) का कोर्स किया। प्रतिभाशाली छात्र थे, इसलिए इण्डिया रैंकिंग में वह सीए बनें। उन्होंने स्टेट बैंक आफ इण्डिया और यूनियन बैंक में सलाहकार के रूप में कई वर्षों तक सेवा की। इस बीच विद्यार्थी जीवन से ही उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लगाव पैदा हुआ जहां अनुशासन और सच्चरित्र का पाठ सीखा। संघ से दीक्षा लेकर वह भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा में वाइस प्रेसिडेंट और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का दायित्व सफलतापूर्वक निभाते रहे। उनकी कार्य क्षमता को देखते हुए भाजपा ने इन्वेस्टर सेल का नेशनल कन्वेनर बनाया। सन् 2009 से 2014 तक वह पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य रहे। भाजपा ने 2014 में जब  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रचण्ड बहुमत से केन्द्र में सरकार बनायी तो  अरुण सिंह को उड़ीसा राज्य का पहले सहप्रभारी बनाया गया और बाद में उन्हें राज्य का प्रभार सौंप दिया गया।  अरुण सिंह ने नरेन्द्र मोदी के चुनाव प्रचार अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसीलिए जब 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हुए, तब उन्हें प्रचार अभियान का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया।
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उत्तर प्रदेश में प्रवास के दौरान ही अरुण सिंह से मिलने का सुअवसर मिला था और तब पता चला कि वह इस प्रदेश के बारे में क्या-क्या करना चाहते हैं। उन्होंने अपने गृह जनपद मिर्जापुर का ही उल्लेख करते हुए बताया कि पहले मिर्जापुर में पीतल के बर्तनों का बड़े पैमाने पर कारोबार होता था और कितने ही लोगों को इससे रोजगार मिलता था लेकिन यहां की पूर्व सरकारों ने वहां के इस विकसित उद्योग पर ध्यान ही नहीं दिया। फलस्वरूप व्यापार की बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा में मिर्जापुर का पीतल उद्योग धराशायी हो गया। इसी तरह बनारस का साड़ी उद्योग और भदोही का कालीन उद्योग भी दम तोडऩे लगा है। वह कहते हैं कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव के समय खैरात बांटने की घोषणा करते हैं, इससे क्या भला होने वाला है? किसी को दो हजार-तीन हजार देने से किसी का स्थायी भला नहीं होता बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किसी गांव में 2 से तीन करोड़ रुपये भी लगाए जाएं तो उस गांव का, उसमें रहने वालों का, सबका स्थायी विकास होगा। इसी क्रम में  अरुण सिंह ने बुंदेलखण्ड का उल्लेख किया था। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के हिस्से वाला बुंदेलखण्ड बहुत पिछड़ गया है। वहां मुख्य समस्या पानी और कर्ज की है। इसके चलते कितने ही किसानों ने आत्महत्या तक कर ली। सुनकर बहुत दुख होता है। इसके विपरीत मध्य प्रदेश के अन्तर्गत जो बुंदेलखण्ड आता है, वहां लोगों की स्थिति काफी बेहतर है। भौगोलिक परिस्थितियां दोनों जगह एक जैसी हैं क्योंकि मानसून से राहत नहीं मिलती लेकिन मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने वहां की समस्या को गंभीरता से लिया। किसानों की फसल यदि बर्बाद हो जाती है तो उन्हें सरकार भरपूर, मुआवजा देती है। इससे किसान कर्ज से नहीं दबते। इसके अलावा वहां तालाबों को पुनर्जीवित कर सिंचाई के साधन बनाये गये हैं। मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखण्ड में चुनाव के समय मतदाताओं का भाजपा के प्रति आकर्षण देखा गया और वे चाहते थे कि यहां भी भाजपा की सरकार बने।
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उड़ीसा में भगवा रंग कैसे चटख हुआ, इस पर अरुण सिंह कहते हैं कि बीजू जनता दल की सरकार के कुशासन से वहां की जनता तंग आ चुकी है। नवीन पटनायक की सरकार ने ऐसी कोई योजना ही नहीं बनायी, जिससे गरीबों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा राज्य का प्रभारी होने के नाते मैं तो वहां के गांव-गांव में जा चुका हूं। गांवों की हालत बदतर है। आदिवासी क्षेत्रों में तो लोगों के खाने तक का ठिकाना नहीं, लोग चंद रुपयों के लिए अपने बच्चों को बेंच देते हैं- ऐसा बुरा हाल है। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता उनकी यथासंभव मदद भी कर रहे हैं और उन्हें आश्वासन देते हैं कि भाजपा सरकार बनने पर उनकी सारी तकलीफें दूर हो जाएंगी। इसीलिए जिला परिषद चुनाव में भाजपा ने 297 सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस को वहां सिर्फ 60 सीटें मिल पायीं। भाजपा ने राज्य के 8 जनपदों में पूर्ण बहुमत हासिल किया है। विधानसभा के अगले चुनाव में भाजपा ही वहां सरकार बनाएगी। श्री अरुण सिंह कहते हैं कि अब हमारा सारा ध्यान उड़ीसा पर ही है।
श्री अरुण सिंह से बात करने के बाद यह महसूस होता है कि सचमुच निष्ठा और कर्मठता से जनसेवा की जाए तो जनता उसे ही नेता मानकर उसके पीछे-पीछे चल पड़ती है।
आर.एस कपूर

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