दुर्व्यवहार की शिकार न बनें…फ्रेंडली रिलेशन रखें.!

दुर्व्यवहार की शिकार न बनें…फ्रेंडली रिलेशन रखें.!

लड़कियों के साथ बुरे व्यवहार की शिकायतें आम बात बन चुकी हैं लेकिन इसके कारण को अगर गहराई में जाकर ढूंढें तो गलती कहीं न कहीं लड़कियों की भी आ जाती है। अत्यधिक घूमने फिरने की स्वतंत्रता, नए-नए फिल्मों सरीखे कपड़े जो कि दिन प्रतिदिन छोटे होते जा रहे हैं, आदि ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनके फलस्वरूप वे स्वयं को छेड़छाड़ व भद्दे कमेंट जैसी शिकायतों में डाल रही हैं लेकिन डर कर विरोध न करके वह अपनी समस्याओं को और ज्यादा बढ़ा रही हैं।
कई बार तो ऐसी घटनाएं भी देखी गई हैं जब ज्यादा परेशान होकर लड़कियों द्वारा आत्महत्या भी की गई है। इनके ऐसे कदम से गुनहगार तो बच जाता है और शिकार हो जाती है निर्दोष लड़की, इसलिए लड़कियों को कुछ ऐसे तरीके अपनाने होंगे जिससे उनका भविष्य सुरक्षित रह सके और उनके मन से असुरक्षा की भावना दूर हो जाए। इसके लिए पेरेंट्स को भी बेटियों का हाथ थाम कर साथ देना है।
फ्रेंडली रिलेशन रखें:- माता पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ ऐसा फ्रेंडली रिलेशन रखें कि बच्चे भी अपनी सभी तरह की बातें उन्हें बताएं। माता पिता को बच्चों को इतना प्यार देना चाहिए कि बच्चों को इस बात का अहसास रहे कि हर तरह की परिस्थितियों में वे हमारे पास व साथ ही हैं। बच्चों के बड़े होने पर उन्हें हर बात खुलकर समझाएं। अगर बच्चों की कोई समस्या है तो उसे सुलझाने में मदद करें। प्यार-प्यार में ऐसा माहौल बना दें कि वह आपको अपना सबसे अच्छा दोस्त माने।
हीन भावना दूर करें:- कभी भी अगर आपके किसी काम से नुक्सान हो जाए तो स्वयं को इसका कारण न समझें। अपने भीतर आत्मग्लानि न रखें। अपने प्रति मन में सम्मान पैदा करें। किसी काम को करने से पहले, समाज क्या कहेगा, यह सही है या नहीं, जैसे ख्यालों को मन से निकाल दें क्योंकि जब आप अपनी लड़ाई में जीत जाएंगी तो वही समाज आपकी इज्जत भी करेगा। स्वयं को मानसिक तौर पर स्वस्थ बनाएं।
अध्यापक -छात्र से -‘बताओ तुम इतिहास पुरूष में सब से…

सहायता की संभावनाएं ढूंढें:- जब कभी कोई आपको ज्यादा परेशान करे और वह ऊंची पहुंच वाला हो तो उसके खिलाफ कोई कदम उठाने से पहले योजना बना लें। कोई कदम उठाने से पहले दिमागी तौर पर तैयार रहें। पेरेंट्स को विश्वास में लेकर कदम उठाएं। मीडिया व एनजीओ की भी मदद ले सकती हैं। इनके सपोर्ट से पुलिस भी सहायता करेगी लेकिन अगर फिर भी कोई हल न निकले तो अपने क्षेत्र के एम एल ए से मिलकर समस्या बताएं। इस तरह आपको सरकार की तरफ से भी सहयोग मिलेगा।
निडर बनें:- आपके साथ आपके कार्यालय, बाजार, बस में कोई छेड़छाड़ या आपत्तिजनक हरकतें करे तो उसी समय उसका जोरदार विरोध करें, डांटें ताकि अन्य लोग भी असलियत को जान जाएं। स्वयं को शोषण का शिकार न बनने दें।
आपकी शर्म, डर, हया का बाहर के लोग फायदा उठाते हैं इसलिए निडर बनें। एक बार निडर बन आवाज उठाएंगी तो आपका साथ देने के लिए और भी कई हाथ खड़े हो जाएंगे। डर कर नजरें झुका लेना या रास्ता बदल लेना समस्या का हल नहीं है। हालात से लड़ें। हार मान कर बैठ जाना ठीक नहीं है।
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बोलचाल, पहनावा, व्यवहार बदलें:-

अगर आप किसी से भी ज्यादा बोलती हैं या फिल्मी तरीकों के कपड़े पहन कर दूसरों को ज्यादा आकर्षित करने की सोचती हैं तो यह आदत भी बदलें क्योंकि आपको अपनी एक सीमा बनानी होगी। ज्यादा फिल्मी चक्कर भी कई बार ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है। अपने अंदर समझदारी का दायरा बढ़ाएं। जहां तक हो बोलचाल, पहनावा, व्यवहार का दायरा सीमित रखें जिससे समस्याएं कम से कम जन्म लें।
– विवेक शर्मा

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