दुबलापन कोई बीमारी नहीं

दुबलापन कोई बीमारी नहीं

weaknessबहुत से लोग अपने दुबले-पतले शरीर को लेकर दुखी रहते हैं। जब वे किसी हृष्ट-पुष्ट व्यक्ति को देखते हैं तो उन्हें अपने आप पर ग्लानि महसूस होती है। वैसे मोटे-ताजे शरीर को ही अच्छी सेहत की निशानी मानते हैं। कई माताएं भी अपने दुबले-पतले बच्चे को लेकर परेशान रहती हैं।
वे इलाज के लिए बच्चे को लेकर पहुंचती हैं ताकि इलाज से बच्चा हृष्ट-पुष्ट हो सके लेकिन ऐसा सोचना केवल मन की कमजोरी है।
आजकल अपने मोटे शरीर से परेशान लोग मोटापे से छुटकारा पाने के लिए डाक्टर के पास जाते हैं, उसी तरह पतले शरीर वाले लोग भी हृष्ट-पुष्ट बनने के लिए डाक्टर के पास आते हैं।
दोनों ही स्थिति में बिना किसी बीमारी के कई लोग बचपन में ही मोटे हो जाते हैं तो कई लोग दुबले-पतले रह जाते हैं। बिना किसी बीमारी के मोटा या पतला होना आनुवंशिक कारणों से होता है। एक ही माता पिता की संतानों में कोई मातृ वंश तो कोई पितृवंश की शारीरिक संरचना बिना किसी बीमारी के प्राप्त कर सकता है।
किसी दुबले-पतले व्यक्ति का शारीरिक वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले यह देखना जरूरी होता है कि वह किसी बीमारी का शिकार तो नहीं है, जिसके कारण उसके शरीर का वजन नहीं बढ़ रहा है। बार-बार पेशाब आना, टी.बी. या हारमोन जनित बीमारी के कारण शरीर का वजन नहीं बढ़ता। फिर यह भी देखना होता है कि रोगी पौष्टिक आहार ले रहा है या नहीं। कार्बोहाइड्रेट एवं चर्बी वाले खाद्य पदार्थ उपयुक्त मात्र में सेवन नहीं करने से शरीर दुबला हो जाता है। जो लोग पौष्टिक आहार कम मात्र में सेवन करते हैं तथा ज्यादा परिश्रम करते हैं, उनका शरीर भी दुबला-पतला रह जाता है।
लिवर की क्रि या खराब हो जाने पर चर्बी व तेल वाला आहार हजम नहीं हो पाता जिसके कारण शरीर दुबला रह जाता है।
व्यायाम या शारीरिक श्रम करने से भोजन अच्छी तरह हजम होता है और शरीर का वजन बढ़ता है लेकिन अधिक व्यायाम या शारीरिक श्रम करने तथा उस अनुपात में पौष्टिक आहार नहीं ग्रहण करने से बिना किसी बीमारी के शरीर का वजन घटता जाता है और शरीर दुबला हो जाता है। भरपूर नींद लेने से शिशु और वयस्कों का वजन घट सकता है।
वजन बढ़ाने के लिए माता-पिता द्वारा चिकित्सक के पास ले जाने वाले बच्चों में से अधिकांश बच्चों को कोई बीमारी नहीं होती बल्कि खाने की लापरवाही और अनियमितता ही उनके दुबलेपन का कारण होता है। बच्चों की जिद पर उन्हें रोटी, चावल व सब्जी के बदले तली चीजें, मसालेदार आहार बच्चों को सेवन कराकर दवा द्वारा उनका वजन बढ़ाना खतरनाक हो सकता है।
कुछ लोग हृष्ट-पुष्ट होने के लिए ब्रांडी पीते हैं और स्टीरायड वर्ग की दवाएं सेवन करते हैं जो हानिकारक होती हैं। इस तरह वजन बढ़ाने का परिणाम अच्छा नहीं होता। यदि आप अपने बच्चे का वजन बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें विटामिन एवं खनिज युक्त आहार का सेवन कराएं। बिना किसी कारण के केवल वजन बढ़ाने के लिए बच्चों को दवा का सेवन कराना सही नहीं है। पौष्टिक आहार, व्यायाम, अच्छा परिवेश तथा स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन करके बिना किसी दवा के वजन बढ़ाने के लिए किसी भी दवा का प्रयोग हानिकारक हो सकता है।
दुबले-पतले लोगों को लेकर किये गए एक सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि वैसे दुबले-पतले लोग जिन्हें किसी प्रकार की बीमारी नहीं है, वे ज्यादा कार्यकुशल और बुद्धिमान होते हैं। वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। मोटे लोग प्राय: किसी न किसी रोग से अवश्य ग्रसित रहते हैं। ऐसे लोग कार्यकुशल भी नहीं होते तथा शारीरिक और मानसिक रूप से भी वे पिछड़े होते हैं।
होम्योपैथिक इलाज द्वारा दुबले – पतले शिशुओं और वयस्कों को हृष्ट-पुष्ट बनाया जा सकता है। इलाज द्वारा धातुगत कमी को दूर करके स्वास्थ्य को सुधारा जा सकता है। वैसे तो सरसरी निगाह से देखने पर दुबले-पतले शिशुओं या वयस्कों में कोई बीमारी नहीं दिखाई देती लेकिन बारीकी से देखने में उनमें धातुगत कमी पायी जाती है जिन्हें साधारण लोग शरीर का सामान्य धर्म मान लेते हैं। पसीने से बदबू, शिशु का बहुत चिड़चिड़ा होना, ठंडे पेय पीने की इच्छा, सर्दी से परेशानी, सर्दी जुकाम की प्रवृत्ति आदि धातुगत कमी के कारण ही पैदा होते हैं। ऐसी स्थिति में होम्योपैथिक दवाओं से लाभ मिल सकता है।
-राजा तालुकदार

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