दुखी होकर नहीं सोना चाहिए, जानिए क्यों

दुखी होकर नहीं सोना चाहिए, जानिए क्यों

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लंदन। दुनिया के कई तरह के शोध होते रहते है जिसमें कई चौंकने वाले निष्कर्ष निकाल कर बाहर आते है उसी कड़ी में चीन में एक शोध किया गया। जिसमें बताया गया कि मानव को कभी भी दु:खी होकर नहीं सोना चाहिए। कारण, सोने के बाद दिमाग दिनभर हुई घटनाओं और बातों को याद करने के लिए उन्हें व्यवस्थित करता है।ऐसे में दुखी होकर सोने पर बुरी यादें हमेशा के लिए दिमाग में बस जाती हैं और उन्हें भुला पाना मुश्किल हो जाता है। चीन के शोधकर्ताओं ने अपनी बात साबित करने के लिए प्रतिभागियों के दिमाग में नकारात्मक यादें पैदा कीं।
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उन्होंने पाया कि रात को नींद के बाद में यादों को भुला पाना मुश्किल होता है। शोधकर्ताओं ने दावा किया कि उनके नतीजे क्लीनिकल सेटिंग में उपयोगी हो सकते हैं। इससे पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के बारे में और अधिक जानकारी हासिल की जा सकती है। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि याददाश्त को बनाए और जानकारियों को व्यवस्थित रखने में नींद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह जिस प्रक्रिया द्वारा होती है उसे कन्सॉलिडेशन कहा जाता है। बीजिंग नॉर्मल विश्वविद्यालय में युंझी लियू और उनके सहयोगियों ने नकारात्मक यादों को दबाने में नींद और मेमोरी कन्सॉलिडेशन के प्रभाव को देखा। उन्होंने पाया कि नकारात्मक यादें दबाने में सक्षम होना अहम है और यह मानसिक स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जानकारियों को प्रॉसेस करने और उसे लंबे समय तक याद रखने में यह हमारी गलतियों से सीखने में मदद करता है।
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