दिल्ली को देश बनाने की कोशिश

दिल्ली को देश बनाने की कोशिश

दिल्ली हमारे देश की राजधानी है इसलिये यह चर्चा में बनी रहे तो किसी को कोई  परेशानी नहीं होनी चाहिये लेकिन आजकल दिल्ली देश की राजधानी होने के कारण नहीं बल्कि कई अन्य कारणों से चर्चा में बनी रहती है। मीडिया, केजरीवाल सहित कई नेता इसे जरूरत से ज्यादा महत्त्व दे रहे हैं। दिल्ली में केन्द्र सरकार सहित सभी राज्यों के कार्यालय हैं इसलिये दिल्ली बेहद महत्त्वपूर्ण हो जाती है लेकिन पिछले कई दिनों से मीडिया ने अपना सारा ध्यान दिल्ली पर इस कदर केन्द्रित कर रखा है जैसे दिल्ली ही देश हो और दिल्ली की समस्याएं ही असली समस्याएं हों पूरा देश सुख-शान्ति से हो, पूरे देश में कोई समस्या न हो, केवल दिल्ली में ही मुख्यमंत्राी हो और कहीं भी कोई मुख्यमंत्राी न हो।
प्रिन्ट मीडिया का विस्तार पूरे देश में है और वो फिर भी सभी जगहों को महत्त्व देने की कोशिश करता है लेकिन इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिये तो दिल्ली से बाहर निकलना मुश्किल लग रहा है। ज्यादातर राष्ट्रीय चैनलों के कार्यालय दिल्ली में हैं तो वो दिल्ली में घूमकर सारे देश को कवर करने की बात कहते रहते हैं और यही कारण है कि उन्हें मुख्यमंत्राी के रूप में केवल केजरीवाल ही दिखायी देते हैं, दिल्ली में फैली हुई बीमारियाँ दिखाई देती हैं, दिल्ली के गड्डे दिखायी देते हैं, दिल्ली की रोडरेज की घटनायें दिखायी देती है, दिल्ली के बलात्कार दिखायी देते हैं।
हमारे देश की व्यवस्था के हालात दिल्ली से बाहर ज्यादा बुरे हैं इसलिये दिल्ली को देखकर देश के हालातों को नहीं जाना जा सकता। रोज ही हम केजरीवाल की मोदी जी को दी जाने वाली धमकी को सुनते हैं। एक अर्धराज्य का मुख्यमंत्राी देश के प्रधानमंत्राी को रोज चुनौती देता है कि वो उसके पीछे पड़े हुए हैं और मीडिया इस खबर को लेकर दिखाने लग जाता है। आप स्वयं सोचिये कि क्या केजरीवाल की इतनी औकात है कि पूर्ण बहुमत की सरकार वाला प्रधानमंत्राी उस व्यक्ति के पीछे पड़ा हुआ हो जिसके पास संसद में केवल दो सांसद ही बचे हों और वो जिस राज्य का मुख्यमंत्राी हो, उस राज्य के महत्त्वपूर्ण फैसले लेने का अधिकार ही उसे न हो। ऐसे मूर्खतापूर्ण दावों पर कोई मूर्ख ही विश्वास कर सकता है लेकिन जाने क्यों मीडिया को इन बातों पर विश्वास होने लगता है।
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पिछले कई दिनों से दिल्ली में डेंगु,चिकनगुनिया और मलेरिया का प्रकोप छाया हुआ है जिसके कारण पूरी दिल्ली के अस्पतालों में भीड़ लगी हुई है। लोग मर रहे हैं। अब बात आती है कि क्या केवल दिल्ली में ही ऐसा हो रहा है। नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में हालात खराब है। कुछ हिस्सों में तो दिल्ली से भी ज्यादा हालात खराब है लेकिन जब आप टीवी पर न्यूज चैनल लगाते है तो आप पाते हैं दिल्ली में ही लोग बीमार हो रहे हैं और वहीं मर भी रहे हैं। बाकी पूरा देश स्वस्थ हैं, वहाँ मच्छर लोगों के कान में गाना सुना रहे हैं, कोई बीमारी नहीं फैला रहे हैं।  केजरीवाल अपनी बीमारी के सिलसिले में दिल्ली से कुछ दिन बाहर गये हुए थे और उनके कुछ मंत्राी भी बाहर थे तो मीडिया दिल्ली को लावारिस बता रहा था। कहा जा रहा था कि लोग परेशान हैं और दिल्ली सरकार गायब है। मेरा कहना है कि इन मंत्रियों ने क्या दिल्ली के लोगों का इलाज कर देना था जबकि दूसरी तरफ दूसरे राज्यों में मंत्रियों के रहते हुए कोई कुछ नहीं कर पा रहा है। दिल्ली में प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है और यह हर साल चलता रहता है। अब यह अलग बात है कि कोई इससे बचाव  की पहले से कोई तैयारी नहीं करता है।   अब मैं चण्डीगढ़ की ही बात करूं तो यह दिल्ली के आकार को देखते हुए चण्डीगढ़ दिल्ली का बीसवां हिस्सा ही बनता होगा लेकिन चण्डीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में हालात बेहद खराब थे जो अब कुछ सम्भल रहे हैं लेकिन हालात सुधरने के लिये प्रशासन से ज्यादा मौसम जिम्मेदार है। यह इलाका बेहद साफ-सुथरा है। इसके बावजूद मच्छरजनित बीमारियों से बुरी तरह ग्रस्त हो गया था और यहाँ भी दिल्ली की ही तरह हर साल यही होता रहता है।
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मेरा अनुभव यही रहा है कि दिल्ली का प्रशासन यहाँ से कहीं ज्यादा इन बीमारियों से बचाव के लिये सक्रिय रहता है लेकिन फिर भी हमेशा दिल्ली के प्रशासन पर ही उंगलियाँ उठती है। दिल्ली की जनसंख्या को देखते हुए चण्डीगढ़ में अपराध कहीं ज्यादा महसूस होते हैं जबकि यहाँ जनता-पुलिस का अनुपात कहीं बेहतर है। पिछले कई महीनों से हम देख रहे हैं कि केजरीवाल के मंत्राी एक-एक करके विभिन्न अपराधों में जेल जा रहे हैं या मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि क्या केवल आम आदमी पार्टी के ही विधायक अपराधों में संलिप्त है। मेरा मानना है कि सत्ता  का नशा सभी जगहों पर नेताओं के सिर पर चढ़ा हुआ है और वे वही सब कर रहे हैं जो केजरीवाल के विधायक करते हुए पकड़े जा रहे हैं लेकिन वो इसलिये पकड़े जा रहे हैं क्योंकि दिल्ली पुलिस पर केजरीवाल का नियंत्राण नहीं है। अन्य राज्यों में राजनीतिक दल अपने दागी नेताओं को पुलिस पर दबाव बनाकर बचा ले जाते हैं लेकिन केजरीवाल मजबूरी में ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। अब यह अलग बात है कि उनकी नई राजनीति का मुखौटा उतर चुका है, उनके साथियों ने उनकी छवि को मिट्टी में मिला दिया है। इतनी जल्दी केजरीवाल का भेद खुल जाने का कारण है कि उनका दिल्ली पर इतना नियन्त्राण नहीं है
कि वे अपने साथियों का बचाव कर सके।क्या आप जानते हैं कि सभी सांप जहरीले नहीं होते ?…रहस्यों से भरा है सांपों का संसार

मीडिया को चाहिये कि अन्य राज्यों को भी इतना ही महत्त्व दें जितना कि वो दिल्ली को देते हैं। वैसे यह भी एक सच्चाई है कि दिल्ली को देश बनाने में केजरीवाल ही ज्यादा जिम्मेदार है। उन्होंने ही मीडिया का सहारा लेकर अपने आपको राजनीतिक पटल पर पेश किया और मीडिया के सहारे ही वो दिल्ली की गद्दी पर जा बैठे। अब मीडिया ही केजरीवाल की जड़े खोदने में लग गया है। केजरीवाल से संबंधित हर मुद्दे को मीडिया बड़ी मुस्तैदी से लपक लेता है और जल्दी से छोड़ता नहीं है।
केजरीवाल अपना कद बड़ा करने के चक्कर में  ऐसी गलतियाँ कर चुके हैं कि वो अपना वास्तविक कद भी बचा नहीं पाये हैं। उनका कद बड़ा करने में मीडिया का हाथ था और अब छोटा करने में भी मीडिया का ही हाथ है। राष्ट्रीय मीडिया का केजरीवाल और दिल्ली में उलझ जाना देशहित में नहीं है। मीडिया को दिल्ली को देश बनाने से बचने की कोशिश करनी होगी। दिल्ली केवल देश की राजधानी है और राजधानी ही रहनी चाहिये।  इस समय देश में कई जगहों पर कई परेशानियाँ खड़ी हुई हैं। मीडिया को चाहिये कि वो उन पर ध्यान केन्द्रित करे ताकि सरकार उनके समाधान की ओर ध्यान दे सके। मीडिया का यही दायित्व है कि वो सरकार को  वो करने के लिये मजबूर करे जो सरकार को करने की जरूरत है। मीडिया अपनी ताकत का नाजायज इस्तेमाल न करें बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए  देशहित में काम करे।-सीमा पासी 

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