दांपत्य जीवन में खड़ी न करें शक की दीवारें..!

दांपत्य जीवन में खड़ी न करें शक की दीवारें..!

दांपत्य जीवन में मधुरता और सुखद प्रेम संबंध बना रहे, इसके लिए जरूरी होता है कि पति-पत्नी दोनों एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पित और विश्वासी बने रहें। पति-पत्नी के मध्य विश्वास ही वह मजबूत कड़ी है जो दोनों को मजबूती से बांधे रहती है। दांपत्य जीवन को यही स्थायित्व प्रदान करता है।
पति-पत्नी दोनों में से किसी के द्वारा भी दूसरे के विश्वास को जब चोट पहुंचायी जाती है, तब दांपत्य जीवन की मधुरता और शांति खत्म होने लगती है और उनका स्थान कड़वाहट और टकराहट ले लेते हैं। कभी कभी स्थिति बिगड़ जाती है और सुखद दांपत्य जीवन को बिखरते देर नहीं लगती। पति-पत्नी के मध्य सुखद प्रेम संबंध बने रहें, इसके लिए जरूरी है दोनों एक दूसरे को विश्वास की नजर से देखें।
पति-पत्नी के मध्य गहरा भावनात्मक संबंध होता है। जब किसी कारण से दोनों में से किसी के भी मन में दूसरे सहभागी के प्रति शक पैदा हो जाता है तब दांपत्य जीवन में धीरे-धीरे दरार पैदा होने लगती है। अगर इस दरार को समय रहते नहीं पाटा गया तो यह दरार बढ़कर नफरत, अलगाव की पृष्ठभूमि और तलाक की स्थिति उत्पन्न कर देती है।
आज के तनाव भरे वातावरण में पति-पत्नी छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में उलझ पड़ते हैं। यदि किसी कारण से पति को दफ्तर में देर हो जाये और वह देर से घर आए तो पत्नी के मन में तरह-तरह की शंकाएं पैदा होने लगती हैं। इसी तरह पत्नी दफ्तर से लौटते समय किसी सहेली के पास रुक जाये और देर से घर पहुंचती है तो पति महोदय आपा खो बैठते है। वे यह नहीं सोचते कि अपनी किसी सहेली के घर चली गई होगी या दफ्तर के काम में ही देर हो गई होगी। मौसम के खराब होने या टै्रफिक जाम की वजह से भी आने में देर हो सकती है। पत्नी के आचरण को लेकर उनके अंदर शक का कीड़ा कुलबुलाने लगता है।
शक्कर जब बन जाए जहर, सेहत तबाह करती है शक्कर..!

आज ऐसी छोटी-छोटी अनेकों गलतफहमियां हैं जो पति-पत्नी दोनों के मध्य ईष्र्या या नफरत पैदा करती हैं जबकि गंभीरतम परिस्थितियों में भी पति-पत्नी को एक दूसरे के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास बिलकुल नहीं खोना चाहिए। कभी-कभी अड़ोसी-पड़ोसी और सगे संबंधी भी पति-पत्नी के मध्य शक का वातावरण पैदा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई स्त्री हैल्थ क्लब जाती है, खरीदारी करने जाती है या मुहल्ले के किसी महिला संगठन के कार्यक्रम में भाग लेने जाती है तो पड़ोस के लोग उसके पति को दब्बू समझते हैं। कभी दब्बू कहकर चिढ़ाते भी हैं।
दूसरी तरफ यदि पति दफ्तर से देर से घर लौटते हैं या किसी क्लब में जाते हैं या किसी स्त्री से खुलकर बातें करते हैं तो पड़ोस की महिलाएं उनकी पत्नी के कान भरती हैं कि तुम्हारे पति के अमुक स्त्री से नाजायज संबंध है। ऐसी छोटी-छोटी बातें दांपत्य जीवन को बरबाद करने का कारण बनती हैं।
पत्नी की उठायें पूरी जिम्मेदारी

दुनियां में कोई भी घटना अकारण नहीं होती। उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। किसी व्यक्ति द्वारा व्यक्त क्रोध उसकी असंतुष्टि की अभिव्यक्ति होती है। अधिकतर मामलों में देखा गया है कि पति ही पत्नी को शक की नजर से देखते हैं और शक की अभिव्यक्ति अपने गुस्से से करते हैं। यदि पति के गुस्से का जवाब पत्नी गुस्से से ही दे तो यह स्थिति दांपत्य जीवन के लिए हितकर नहीं होती।पत्नी के लिए उचित होगा कि वह पति के गुस्से का कारण जानने का प्रयास करे। यदि आप उन कारणों को जान लेंगी तो पति के साथ मिलकर उसका समाधान भी निकाल सकती हैं। यदि पत्नी पति की उचित बातों को मान ले और उस पर अमल करे तो निस्संदेह पति को गुस्सा होने का मौका ही नहीं मिलेगा।
पति को भी पत्नी के प्रति अपने कर्तव्य को सदा याद रखना चाहिए। पति को चाहिए कि वह पत्नी को समझे और उसे भरपूर प्यार दे। पत्नी एक अच्छी दोस्त की भूमिका निभाती है, वहीं वह एक कुशल गृहिणी भी होती है। यदि गृहिणी भ्रम का शिकार हो जाए तो पूरे परिवार का नाश कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि पति और पत्नी एक दूसरे के व्यवहार का वस्तुगत विश्लेषण करें और कहीं कमी दिखलाई दे तो अपने मृदु व्यवहार से पूरा करें। इससे पैदा शक स्वत: दूर हो जायेगा और दांपत्य जीवन मधुर व सुखद बना रहेगा।
– राजा तालुकदार

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