दांपत्य को तनावमुक्त रखें

दांपत्य को तनावमुक्त रखें

आज की व्यस्त जिंदगी में बहुत कम पति-पत्नी ऐसे होंगे जिन्हें एक दूसरे के लिए पर्याप्त समय मिल पाता होगा। इसी कारण उन दोनों में अक्सर तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार यह स्थिति इतना गंभीर रूप धारण कर लेती है कि अलगाव की नौबत आ पहुंचती है। दांपत्य में ऐसी स्थिति न आने पाए, पेश हैं इसके लिए कुछ टिप्स:-
हीन भावना से दूर रहें:- अगर आप जीवनसाथी से किसी भी मामले में कमतर हैं तो स्वयं को हीन न समझें। आपके अंदर भी कुछ ऐसी खूबियां अवश्य होंगंी जो जीवन साथी को प्रभावित करती होंगी, इसलिए जीवनसाथी के सामने आत्मविश्वास बनाए रखें क्योंकि अगर आप स्वयं को उससे हीन समझते रहेंगे तो आप भी तनावग्रस्त रहेंगे, साथ ही जीवनसाथी भी परेशान होगा।
परिवार को सहयोग दें:- पति पत्नी दोनों मिलकर पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभायें। अपने बुजुर्गों, रिश्तेदारों व बच्चों को पर्याप्त समय दें। अगर आप दोनों कामकाजी हैं तो मिल बांटकर पारिवारिक कार्यों में सहयोग दें।
समय पर काम करें:- अपनी-अपनी जिम्मेदारियां समय पर निपटायें। अगर आप में से एक अपने कार्य को सही ढंग से नहीं कर पा रहा है तो उसे उचित सहयोग दें। अपने कार्य को लटका कर रखने की आदत न डालें। काम समय पर होगा तो काम के बोझ का तनाव आप पर नहीं होगा।
संगीत सुनें:- संगीत तनाव को दूर करने का अच्छा साधन है। जब भी समय मिले, दोनों इकटठे बैठकर अपना मनपसंद संगीत सुनें। इससे जहां आप संगीत सुनेंगे, वहीं एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का लुत्फ भी उठा पायेंगे।
मित्रों को मिलें:- छुट्टी के दिन या किसी त्योहार पर अपने-अपने दोस्तों से मिलने जाएं व पुरानी यादों को ताजा करें। हंसी मजाक करें, इकटठे बैठकर खायें-पियें। इससे व्यस्तता का जो तनाव आप पर हावी है, वह छंट जाएगा।
अपने लिए समय निकालें:- अपनी व्यस्त दिनचर्या में से अपनी रूचियों को पूरा करने में भी कुछ समय लगाएं। इससे आपका तनाव काफी दूर होगा।
दूसरों की मदद करें:- पति-पत्नी मिलकर जरूरतमंदों व असहायों की यथासंभव सहायता करें। अगर आप किसी के लिए कुछ करते हैं तो इससे आप को आत्मिक प्रसन्नता की प्राप्ति होगी।
सकारात्मक सोचें:- एक दूसरे के प्रति ईष्र्या व द्वेष की भावना मन में न लाएं व न ही एक दूसरे के लिए नकारात्मक सोचें क्योंकि ऐसी भावनाएं आप दोनों के बीच तनाव की स्थिति पैदा करती हैं। अगर कोई भी गलतफहमी या समस्या हो तो उसे मिल बैठकर सुलझायें। एक-दूसरे से खुलकर बात करें।
– शैली माथुर

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