दहेज कानून की आड़ में ब्लैकमेलिंग..! मोटी रकम ऐंठने का गुपचुप खेल

दहेज कानून की आड़ में ब्लैकमेलिंग..!  मोटी रकम ऐंठने का गुपचुप खेल

 आजकल महिला आरक्षण, महिला सुरक्षा अधिनियम तथा महिलाओं से संबंधित अनेकों अधिकार महिलाओं के पक्ष में बनाए गये हैं लेकिन इन कानूनी मान्यताओं व अधिनियम के तहत महिला उत्पीडऩ और घरेलू हिंसा के आधार पर तलाक के मामलों में काफी वृद्धि ही हुई है न कि इनमें कमी आई है। दिल्ली व एनसीआर में घरेलू हिंसा के नाम पर इस कानून के तहत 90 प्रतिशत मुकदमे वुमेन सेल में लंबित हैं जिसमें अधिकांश महिलाएं शादी के कुछ महीने के बाद दहेज व घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराकर तलाक की आड़ में मोटी रकम ऐंठने का गुपचुप खेल खेल रही हैं जिससे वर पक्ष अपने आपको असहाय व ठगा महसूस कर रहा है। इस संदर्भ में दिल्ली की अदालतों, न्यायाधीशों व सुरक्षाकर्मियों का यह मानना है कि कुछ महिलाएं इस कानून का दुरुपयोग कर वर पक्ष को हानि पहुंचा रही हैं। वूमेन सेल में अधिकांश दर्ज केसों की जांचकर्ता महिला अधिकारी ही होती हैं जिसमें पुरुष पक्ष पर गौर करने या उसके न्यायिक पक्ष का कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं होता जिसके कारण वर पक्ष को महिला अधिकारियों द्वारा कमतर आंका जाता है तथा उनके कथनों को कम तरजीह दी जाती है व वधू पक्ष के कथनों को ज्यादा सही मानकर अलग रहने की सलाह दी जाती है।
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पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला हाई कोर्ट में सामने आया जिसमें वर पक्ष को अलग मकान लेकर रहने की सलाह दी गई और ऐसा न करने पर जेल जाने को तैयार रहने के लिए भी कहा गया। इस फैसले को लेकर कुछ लोगों की राय है कि दिल्ली जैसे महानगर में अलग रहना आज के समय में टेढ़ी खीर से कम नहीं है जो महंगाई के दौर में और भी जोखिम भरा कार्य लगता है। इस तरह के फैसले के बाद जहां अलग रह रहे परिवार में असुरक्षा का भय तो रहेगा ही, साथ ही परिवार में मानसिक तनाव भी बढ़ जाएगा। इसके साथ ही महंगाई के इस दौर में इस तरह के फैसला करते समय आर्थिक तथ्यों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए जिससे परिवार में आर्थिक समस्या के चलते भविष्य में कोई दुर्घटना न घटे।
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कुछ लोगों का कहना है कि शादी से पहले वर-वधू पक्ष को यह अवश्य तय कर लेना चाहिए कि वे शादी के उपरांत परिवार में रहेंगी या परिवार से अलग जिससे इस तरह की भविष्य में होने वाली समस्या उत्पन्न न हो। हमारे देश में जिस तरह छोटी-छोटी बातों को लेकर तलाक के मामले सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए एक ठोस समाधान की आवश्यकता है। इन छोटी-छोटी समस्याओं के चलते अदालत में तो तलाक के फैसले हो जाएंगे मगर भविष्य में इससे एक गलत धारणा उत्पन्न हो जाएगी और लोग शादी के नाम से ही कतराने लगेंगे।
– मुसाफिर देहलवी

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