दहेज: करे कोई, भरे कोई

दहेज: करे कोई, भरे कोई

भारतीय समाज की सबसे बड़ी कुरीति ‘दहेज’ है। जिसको लड़की के लिए प्रारंभ से ही अभिशाप माना गया, उसी को वधू पक्ष बढ़ावा दे रहा है। आज वर पक्ष को अपने हाथ फैलाने की जरूरत ही नहीं। वधू पक्ष इतना समझदार हो गया है कि बिन मांगे ही वह वर पक्ष को इतना कुछ दे देता है कि लड़के वालों की आंखें चकाचौंध हो जाती हैं और उनके लालच और बढ़ जाते हैं। इसका परिणाम सब लड़की वालों को भुगतना पड़ता है। वर पक्ष से आए बाराती जब इन उपहारों को देखते हैं तो उनकी आकांक्षाएं भी अपनी आने वाली बहू से बढ़ जाती हैं। इसके लिए वे ऐसे समृद्ध परिवारों को ढूंढते हैं जो उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति कर सकें। इसके परिणामस्वरूप वे माता-पिता जो ऐसे उपहार देने में असमर्थ हैं, उन्हें एक अच्छा वर तलाशने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। तंग आकर (मजबूरन) उन लोगों को भी कर्ज उठाकर अपनी बेटी का विवाह शानो-शौकत से करना पड़ता है और उपहार भी देने पड़ते हैं चाहे सारी जिंदगी वे उस कर्ज की अदायगी में पिसते रहें। दहेज में दिए जाने वाले उपहारों की संख्या भी कुछ कम नहीं है। स्कूटर भला कोई देने की चीज है। अब तो बड़ी कारें उसका स्थान ले चुकी हैं। इसके अलावा फ्रिज, टी.वी., वी.सी.आर, एअर कंडीशनर, सीडी प्लेयर, वाशिंग मशीन, प्लाट, फ्लैट, ज्वैलरी, सोफा सेट, पलंग, डे्रसिग टेबल, सेंट्रर टेबल, डाइनिंग टेबल और इसके साथ अगर नकद राशि भी हो जाए तो क्या कहना।
ढलती उम्र में सौंदर्य सुरक्षा
एक तरह से एक घर बनाने में जितनी वस्तुओं की जरूरत होती है वह सब घर समेत और इस बात की भी गारंटी नहीं कि यह सब लेकर भी वर पक्ष संतुष्ट है या नहीं। इन सभी कारणों से लड़के वालों के मुंह खुल रहे हैं परन्तु इन सब को बढ़ाने का जिम्मेदार भी कन्या पक्ष है। कुछ लोगों की गलतियों के कारण न जाने कितनी लड़कियों को बिना गलती के ही सजा भुगतनी पड़ती है और तो और, आज लड़की भी यह चाहती है कि उसे भी यह दहेज रूपी उपहार मिले ताकि ससुराल में उसकी इज्जत बढ़े और यह न सुनना पड़े कि फ्लां लड़की दहेज में कार लायी थी और वह नहीं लायी।
आप भी बन सकते हैं अच्छे जीवन-साथी
लड़के वालों को यह समझना चाहिए कि लड़की स्वयं ही एक अनमोल उपहार है तो फिर उसके होते इन सब की क्या जरूरत। कन्या पक्ष वालों को भी चाहिए कि उपहार के रूप में वह अपनी बेटी को ऐसे संस्कार दें जिससे कि वह अपने घर को सुघड़ता से चला सके और अपने कर्तव्यों का भली-भांति पालन कर सके।
– सोनी मल्होत्रा

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