दलहन की बुआई बढ़ी, पर कीमत को लेकर अनिश्चितता

दलहन की बुआई बढ़ी, पर कीमत को लेकर अनिश्चितता

नयी दिल्ली। देश में इस बार अच्छे मानसून के मद्देनजर किसानों ने खरीफ के दौरान दलहनी फसलों की खेती पर ज्यादा जोर दिया है जिससे इसके उत्पादन में भारी वृद्धि का अनुमान है, जबकि किसानों को इसका कितना लाभ मिलेगा इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 

दलहनी फसलों की बुआई इस बार एक लाख 64 हजार हेक्टेयर में की गयी है, जबकि पिछले साल एक लाख 20 हजार हेक्टेयर में की गयी थी। इस प्रकार इसके खेती के क्षेत्र में 44 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। सरकार ने दालों के मूल्य में स्थिरता लाने तथा पर्याप्त मात्रा में दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 20 लाख टन दालों का बफर स्टॉक बनाया है। इसमें घरेलू खरीद और आयात से दालों का भंडारण किया जाता है । पिछले वर्षों के दौरान दालों की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर रहा था, जिसके कारण बड़े पैमाने पर इसका आयात किया गया था। इसके अलावा दालों की जमाखोरी होने के कारण इसका मूल्य काफी अधिक हो गया था। एक बार तो इसका मूल्य 200 रुपये किलोग्राम से भी अधिक हो गया था। मोदी सरकार अगले दो से तीन साल में दाल के उत्पादन में आत्मनिर्भर होना चाहती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा ने विश्वास व्यक्त किया है कि किसानों, केन्द्र और राज्य सरकारों के सहयोग से दो से तीन साल में दालों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा कि दलहनों की कई किस्मों का विकास किया गया है, जिनकी फसल काफी कम समय में तैयार हो जाती है। मूंग और अरहर की कुछ ऐसी किस्में विकसित की गयी है, जो कम समय में तैयार होती है और उनमें बीमारियां भी कम होती है।
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डॉ. महापात्रा के अनुसार दलहनों के अनुसंधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और दलहनी फसलों में कीटों का कम से कम प्रकोप हो और पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो इस संबंध में अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है । किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराये जा रहे हैं और अधिक से अधिक प्रदर्शन किये जा रहे हैं, ताकि किसान खुद वैज्ञानिक ढंग से दलहनों की खेती की जानकारी प्राप्त कर सकें। सरकार ने दलहनों की खेती के क्षेत्र में वृद्धि के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत एक विशेष योजना शुरू की है तथा इसके लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं। देश के पूर्वी हिस्से में बहुत से किसान धान की फसल लेने के बाद जमीन खाली छोड़ देते थे। इन खाली खेतों में किसान दलहनी फसलों की खेती करें इसके लिए 2016-17 में विशेष योजना शुरू की गयी है और इसके लिए राशि आवंटित की गयी है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत भी दलहनों के उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत धान के खेतों की मेड़ पर अरहर की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2016-17 के दौरान 574 कृषि विज्ञान केन्द्रों पर 31000 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन किये गये। राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों में 150 दलहन बीज हब स्वीकृत किये गये हैं। वर्ष 2015-16 के दौरान दलहनों का कुल उत्पादन एक करोड़ 63 लाख टन से अधिक हुआ था, जो 2016-17 में बढ़कर दो करोड़ 21 लाख टन से अधिक हो गया। इस बार दलहनी फसलों की खेती के क्षेत्र में वृद्धि से उत्पादन और बढऩे का अनुमान है। इस बार अनेक स्थानों पर दलहन का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गया है।

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