त्योहार होली पर मर्यादाओं का न करें उल्लंघन..!

त्योहार होली पर मर्यादाओं का न करें उल्लंघन..!

इस बार भी हर वर्ष की तरह होली का त्योहार आ गया। कुछ पुरानी कड़वी यादें और खट्टे अनुभवों को साथ लिए हर साल की होली की तरह ही यह होली है। इसका कारण भी स्पष्ट है क्योंकि होली के अवसर पर हमारे या हमारे अन्य किसी रिश्तेदार व परिचित के साथ कोई न कोई घटना दुर्घटना होती है। शायद इसी के कारण होली अभी आई ही नहीं कि पिछली होली से जुड़ी हुई कुछ मीठी परंतु ज्यादातर कड़वी यादों का सिलसिला प्रारंभ हो गया। कई चित्र, कई चेहरे और कई हादसे याद आ रहे हैं जिससे जुड़ी कोई न कोई याद है।
‘बुरा न मानो होली है’ जैसे जुमले का नाजायज फायदा उठाते हुए पारिवारिक व सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ देना होली के दौरान आम बात है। इस जुमले की आड़ में हम कितनी ही असभ्यता व अश्लीलता का प्रदर्शन करते हैं व उचित अनुचित का ख्याल न रखकर बकवास करते हुए विवेकहीनता का परिचय देते हैं।
आपके सामने दो दोस्त राम और श्याम का ही उदाहरण है। राम ने अपने दोस्त श्याम की पत्नी के गालों पर गुलाल लगा दिया। अब श्याम ने इसका इतना गलत अर्थ लगाया तो राम व श्याम में तो मनमुटाव हुआ ही, श्याम और उसकी पत्नी के बीच भी दरार आ गई। इससे यह स्पष्ट है कि आपके द्वारा ‘बुरा न मानो होली है’ कहने के बावजूद बुरा मानने वाले तो बुरा मानेंगे ही। इसलिए यही सोच विचार कर दूसरे पर रंग डालना चाहिए कि किस स्थान पर, किस व्यक्ति से किस सीमा तक होली खेलनी है।
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मसलन साथ पढऩे वाली लड़की, साली या दोस्त की साली, इनको रंग लगाने पर भी लोग गलत अर्थ निकाल बैठते हैं। इसलिए जरूरी है कि होली शालीनता और पारिवारिक, सामाजिक मर्यादाओं के भीतर रहकर ही खेली जाये।
होली के त्योहार पर लोग भांग और शराब का भी सेवन करते हैं तथा इस परंपरा के साथ जोड़ते हैं। यह बिलकुल गलत है। केवल खुद के स्वार्थ के लिए नशा करना, फिर घर बाहर का माहौल खराब करना कतई तर्क-संगत नहीं है। नशे की हालत में होने के कारण अक्सर लड़ाई झगड़ा व स्वयं के नुकसान ही हैं। ऐसे में इस प्रकार की परंपराएं औचित्यहीन हैं।
होली के अवसर पर कई लोगों को देखा गया है कि वे अपने घर के दरवाजे बंद कर भीतर बैठ जाते हैं मगर होली के हुड़दंग में मस्त उनके दोस्तों की टोली उसके घर पर आ जाती है तथा दरवाजा खोलने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग दरवाजा तोड़कर अंदर जाकर होली खेलने की तमन्ना पूरी कर लेते हैं। होली खेलते वक्त वे यह कभी नहीं सोचते कि हमारी इस होली ने उस व्यक्ति के घर का कितना सामान,दरवाजा, दीवार, कपड़े आदि सब रंग से खराब कर डाले। इसका परिणाम सामने है आपस में गाली-गलौज, यहां तक की मारपीट भी। इससे क्या मिलेगा?
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ऐसे में लोगों को समझदारी से काम लेते हुए पहले से ही ध्यान रखना चाहिए कि या तो अपने दोस्तों की अपनी होली नहीं खेलने के इरादे को विनम्रता के साथ क्षमा सहित बता दें। यदि इसके बावजूद भी भीड़ यदि आपसे रंग खेलने आ सकती है तो ऐसे में घबराने की या रूष्ट होने की बजाय उनसे प्रेम से थोड़ा गुलाल लगवा लें।
आज सामाजिक माहौल विद्वेष भरा है। ऐसे में एक वर्ग जो होली उत्साह-पूर्वक मनाता है वह अपनी होली की मस्ती में उस वर्ग का नुकसान करने की सोचता है जो होली से अलग है। हमें चाहिये कि हम उस वर्ग की भावनाओं को समझें तथा यह सोचें कि अगर उस वर्ग को होली में गुलाल का या अन्य किसी प्रकार के मजाक से परहेज है तो फिर हम क्यों उस वर्ग के ऊपर अपनी भावनाओं को थोपें।
इस प्रकार आप सावधानी रखते हुए होली खेलिये तथा दूसरों को भी खेलने दीजिये। रंगों में स्वयं सरोबार होइये तथा दूसरों को भी रंगों में डुबोइये मगर सब कुछ केवल उसी सीमा तक कीजिये जहां तक सभ्यता हो तथा रंगों के इस त्योहार पर कोई आंच न आए।
– नवरतन शर्मा

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