त्योहार साल की गति के पड़ाव हैं,

त्योहार साल की गति के पड़ाव हैं,

त्योहार साल की गति के पड़ाव हैं,
जहाँ भिन्न-भिन्न मनोरंजन हैं,
भिन्न-भिन्न आनंद हैं,
भिन्न-भिन्न क्रीडास्थल हैं।
– बरुआदुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते।
– प्रेमचंद

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