ताली बजाएं, तंदुरूस्ती पाएं

ताली बजाएं, तंदुरूस्ती पाएं

ताली खुशी प्रकट करने का जरिया है। अंदर की खुशी व्यक्त करने के लिए हम ताली बजाकर उसे पूर्णता प्रदान करते हैं। पूजा अर्चना के समय या खुशी प्रगट करने के लिए ताली बजाना एक स्वस्थ प्रक्रि या है। आज विभिन्न शोधों द्वारा यह बात सिद्ध हो गई है कि ताली बजाना स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभदायक है। इससे कई रोग भी ठीक हो जाते हैं इसीलिए इसे कई रोगों का प्राकृतिक उपचार माना गया है। ताली बजाने से चार पांच मिनट में ही शरीर का खून गर्म होना शुरू हो जाता है। इससे एकदम स्फूर्ति आने लगती है, आलस्य दूर हो जाता है। बोरियत व डिप्रेशन दूर होते हैं। सोच सकारात्मक हो उठती है।
बुढ़ापे में जब जोड़ों का दर्द, गठिया व संधिवात परेशान करने लगते हैं और दवाइयां कारगर नहीं होती, बहुत स्टे्रेन वाले व्यायाम संभव नहीं होते, ऐसे में दोनों हाथों को आपस में मिलाते हुए इस तरह ताली बजाएं कि हथेली हथेली पर और उंगलियां उंगलियों पर पड़ती रहें। इसके निरंतर अभ्यास करते रहने से जोड़ों की जकडऩ से छुटकारा मिलता है।
ताली बजाने की धार्मिक प्रथा का वैज्ञानिक महत्त्व अब धीरे-धीरे लोगों को समझ में आने लगा है। पुरानी प्रथाओं मान्यताओं व परंपराओं का तिरस्कार करने वाले आधुनिक लोग भी जब इसी बात को बड़े-बड़े धर्मगुरू, योगाचार्य, सेलिब्रेटिज को कहते देखते हैं तो अंधश्रद्धा से उसे मानने लगते हैं और फॉलो करते हैं।
ताली विश्वभर में सबसे सरल और उपयोगी ‘सहज योग है जिसे करने में किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होती। रोजाना कम से कम एक दो मिनट नियम से ताली बजाई जाए तो अन्य आसनों की आवश्यकता ही न होगी।
रोगों के आक्र मण से बचाव करना हो या रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ानी हो तो ताली बजाइए। लगातार बजती ताली से हमारे शरीर में मौजूद श्वेत कणों को शक्ति मिलती है। रोग प्रतिरोधक शक्ति इसी कारण बढ़ती है। क्या शारीरिक, क्या मानसिक, दोनों तरह की बीमारियों के लिए है ताली।
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आज की जीवनशैली कुछ इस तरह बन गई है कि मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। तनाव से जुड़ी अन्य सभी बीमारियों में से एक कॉमन बीमारी है अनिद्रा रोग। नींद नहीं आती तो सोने से पूर्व यही विधि अपना कर देखिए। पंद्रह बीस मिनट जोर जोर से ताली बजाएं। इससे नींद तो आएगी ही, कैलरीज भी बर्न होंगी। मोटापा छंटेगा। जो विचार दुष्चक्र बनकर आपको परेशान कर तनाव का कारण बने हैं, उनसे छुटकारा मिलेगा। विकेंद्रीकरण होने से वे छितरा कर लुप्त हो जाएंगे।
हृदय रोग, श्वास संबंधी परेशानी, फ्रोजन शोल्डर, सरवाइकल स्पांडिलाइटिस, उच्च निम्न रक्तचाप, सभी में ताली बजाना फायदेमंद साबित होता है। यह एक तरह से एक्युप्रेशर थेरेपी है। हाथों में चालीस इकतालीस प्रतिबिंब केंद्र हैं जो ताली बजाने से आपस में टकराते हैं। इनका इस प्रकार एक्टिवेट होना ऑक्सीजन की तरह ही प्राणदायी साबित होता है।
उच्च रक्तचाप के लिए कई प्रकार की दवाएं हैं लेकिन निम्न रक्तचाप में जब रोगी पूर्णत: पस्त होकर बैठ जाता है और बहुत ही कमजोरी महसूस करता है, केवल ताली बजाने मात्र से जानदार बन सकता है। इसके लिए यानी लो ब्लडप्रेशर नॉर्मल करने के लिए सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को सामने ताली बजाते हुए नीचे से ऊपर की ओर जाकर गोलाकार घुमायें।
उच्च रक्तचाप के लिए उपर्युक्त विधि को उल्टी दिशा में करें। इसमें हाथों को पीछे से ऊपर गोलाकार में ले जाते हुए सामने लाकर ताली बजाएं। हाथों को नीचे लाकर वापस पीछे से ऊपर ले जाते हुए ताली बजाने का क्र म रखना चाहिए।
ध्यान लगाने में ताली प्रभावकारी है। अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि क्या करें, ध्यान में मन एकाग्रचित हो ही नहीं पाता। इधर उधर के ख्याल आते रहते हैं। बाह्य तौर से आवाजों से व्यवधान होता है लेकिन अगर आंखें बंद कर तेजी से ताली बजाई जाए तो ध्यान सिर्फ ताली की ताल पर केंद्रित होगा। यूं बाहरी बातों से संपर्क टूट जाएगा और ध्यान स्वत: ही केंद्रित होने लगेगा। इसे निरंतर अभ्यास द्वारा साधा जा सकता है।
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ताली आसन, हालांकि सबसे ज्यादा आसान सहज योग है लेकिन उसके भी कुछ नियम हैं और अन्य किसी भी व्यायाम की तरह इसे अंधविश्वास से फॉलो नहीं करना चाहिए।
एक तो ताली बजाने का तरीका सही होना चाहिए। दोनों हाथों के बीच 12 से 20 इंच का फासला रख कर दोनों हाथों को सीधा करके बाजुओं को ढीला व हल्का छोड़ कर आमने सामने रखकर बजाएं। दोनों हाथों के पंजे उंगलियां व पोटे व हथेलियां आपस में टकरानी चाहिए। ताली बजाने से पहले हाथों पर सरसों या नारियल का तेल मल लें। ताली खुली जगह में बजा सकें तो अच्छा है। पैर ढक के रखें ताकि तरंगों का असर ज्यादा हो।
इस प्राकृतिक थेरेपी के साथ अप्राकृतिक चीजों से परहेज करना होगा। शराब, तम्बाकू, सिंथेटिक शीतल पेय आदि से दूर रहें तथा आवश्यक पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन लें।
करतल ध्वनि, चिकित्सा के साथ-साथ निस्संदेह एक दुख हरण सुख देनेवाला सनातन अहसास है। यह न केवल शारीरिक व्याधियों को दूर करती है, इम्युनिटी बढ़ाती है बल्कि आसपास के माहौल को भी रोमांचक, जीवंत स्फूर्तिदायक और आनंदमय बना देती है। यह हंसी की तरह ही इंफेक्शस हैं। आनंद वितरण करती तालियां बजाने में देर कैसी, झिझक कैसी, परहेज क्यों? फिर हो जाएं शुरू, दे ताली लेकिन उम्र, सेहत, स्टेमिना को देखते हुए सूझबूझ व सावधानी के साथ।
– उषा जैन ‘शीरीं’

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