ताकि छुट्टियों में बच्चे करें कुछ नया सा

ताकि छुट्टियों में बच्चे करें कुछ नया सा

छुट्टियां आते ही काम काजी माता-पिता जो एकल परिवार वाले हैं, उन्हें चिंता सताने लगती है कि इन छुट्टियों में बच्चों को कैसे व्यस्त रखें जिनसे कि वे बोर न हों, कुछ नया सीखें और स्वयं को व्यस्त रखें।
आधुनिक युग स्पर्द्धात्मक युग है। हर कोई चाहता है कि वह और उसका परिवार अन्य लोगों से दो कदम आगे रहे। चुनौती भरे युग में माता-पिता के लिए बहुत बड़ी समस्या है कि वे छुट्ट्टियों में बच्चों को टी. वी. और कम्प्यूटर से कैसे दूर रखें ताकि उनका विकास सही हो और वे अपने समय का पूरा लाभ उठा सकें।
इसके लिए माता-पिता को छुट्टियां आने से पूर्व ही योजना तैयार कर लेनी चाहिए कि इस बार छुट्टियों में बच्चें क्या करें ताकि उनकी छुट्टियां यादगार छुट्टियां बनें।
– छोटे बच्चों को चित्र बनाना और उनमें रंग भरना बहुत अच्छा लगता है तो दे डालिए रंग, ब्रश और स्केच बुक। उनको उनकी मर्जी से ड्राइंग बनाने के लिए उत्साहित करें जिससे उनकी कल्पना शक्ति भी बढ़ेगी और समय भी कट जाएगा।
– यदि बच्चे कुछ बड़े हैं तो उन्हें कुछ विषयों पर अपने विचार लिखने को उत्साहित करें। उन विचारों के साथ उन्हें कहें कि वे चित्र भी बनाएं या चित्रों द्वारा अपने विचारों को प्रकट करें। ऐसा करने से बच्चों की छिपी क्षमता में निखार आता है।
– यदि घर के पास कोई ऐसी संस्था हो जो ग्रीष्मकालीन कोर्स करवाती हो तो बच्चों की रूचियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें वहां प्रवेश दिलवा कर उनकी प्रतिभा में निखार लाया जा सकता है जैसे डांस, म्यूजि़कल इंस्ट्रूमेंट बजाना, स्केरिंग, ड्राइंग, पेंटिंग, पब्लिक स्पीकिंग कोर्स आदि करवाना।
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– थोड़े बड़े बच्चों में पुस्तकें पढऩे के शौक को विकसित किया जा सकता है। उन्हें अच्छे साहित्य, कामिक्स, बच्चों की मैगजीन और ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों के प्रति प्रेरित करें ताकि बड़े होकर वे पुस्तकों को अपना साथी बना सकें।
– छुट्टियों में बच्चों को घर के पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी दे सकते हैं जैसे प्रतिदिन पौधों की सफाई करना, पानी देना आदि। इससे बच्चों में प्रकृति के प्रति प्यार बढ़ता है और पौधों को बढ़ता देख बच्चे खुश भी होते हैं। एक दो गमलों में उनसे बीज लगवाएं और उन्हें कहें कि प्रतिदिन उन गमलों में देखें कि बीज कैसे फूटते हैं और आगे वे पौधों का कैसे रूप लेते हैं। उन्हें उन पौधों से विशेष प्यार हो जाएगा और वे पौधों के प्रति संवेदनशील भी बनेंगे।
– बच्चों को छोटी-छोटी कुकिंग संबंधित जानकारी दे सकते हैं। उनसे थोड़ी मदद भी लें। बच्चों को आनन्द भी मिलेगा और आपको आराम भी। बच्चों को सलाद सजाना, टेबल ले आउट करना सिखाएं ताकि उनका समय भी व्यतीत हो और कुछ नया भी सीख पाएं। उन्हें सैंडविच बनाना, नूडल्स बनाना भी सिखाया जा सकता है।
– बच्चों को कुछ ज्ञानवर्द्धक इन्डोर गेम्स खेलने के लिए दें ताकि दोपहर के समय वे घर में बैठकर उन गेम्स को खेलकर अपना समय व्यतीत कर सकें।
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– कभी-कभी बच्चों को पास के बच्चों के साथ खेलने के लिए उनके घर भेजा जा सकता है और कभी-कभी छुट्टी लेकर पास के बच्चों को अपने घर बुलाया जा सकता है। उन्हें खेलने के लिए इन्डोर गेम्स दें। हो सके तो कुछ समय आप भी बच्चा बन उनके साथ समय बिताएं। बच्चों को कहें कि वे कुछ एक्ट कर दिखाएं ताकि सभी अपने गुणों को बखूबी बिना हिचक कर दिखा सकें। इनसे उनकी अभिनय क्षमता भी उभर कर सामने आएगी।
– यदि घर में काफी जगह हो तो बच्चों को अलग खेलने का कमरा दें ताकि वे बेहिचक खेल सकें। बीच बीच में उन पर नजर भी रखें कि क्या खेल रहे हैं। खेलने के बाद अपना सामान संभालने की आदत भी डालें।
– बच्चों को स्वयं भी अधिक से अधिक समय दें ताकि वे उपेक्षित महसूस न करें। उनकी भावनाओं को शेयर करें। बच्चों की छुट्टियों का साथ अपनी छुट्टियों का मेल रखें ताकि उन्हें सुरक्षा मिल सके।
– कभी-कभी बच्चों को किसी एक कमरे की सफाई करने हेतु जिम्मेदारी सौंपें और अपनी अल्मारी, बुकशेल्फ, खिलौनों को साफ करने को कहें जिससे उनका समय भी व्यतीत होगा और वो सफाई के प्रति जागरूक भी बनेंगे।
– हो सके तो बच्चों को छुट्टियों में कहीं घुमाने भी ले जाएं। यदि लम्बे समय हेतु न जा पाएं तो शॉर्ट ट्रिप के लिए ले जाएं।
– नीतू गुप्ता

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