ढलती उम्र में सौंदर्य सुरक्षा

ढलती उम्र में सौंदर्य सुरक्षा

यौवन में प्राय: सभी महिलाएं सुंदर दिखती हैं लेकिन ज्यों-ज्यों उम्र ढलती है, उनका सौंदर्य गायब होने लगता है। यौवन में सुंदर दिखना कोई कमाल की बात नहीं है लेकिन यौवन के बाद भी सुंदर दिखना एक प्रशंसनीय काम है। आइये सौंदर्य निखारने तथा उम्र छिपाने के कुछ उपायों पर चर्चा करें:
बाल – स्त्री के सौंदर्य में बालों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। आप हमेशा यही कोशिश कीजिए कि आपके बाल सफेद न होने पायें। इसके लिए आप समय-समय पर किसी विशेषज्ञा से सलाह लेती रहें ताकि बालों को डाई करने की नौबत ही न आये लेकिन यदि आ ही जाती है तो फिर ऐसा करिए कि आप बालों को हमेशा हल्के शेड में डाई कीजिए। एकदम चटकीले काले बाल आपकी उम्र के अनुसार अस्वाभाविक लग सकते हैं।
उम्र बढऩे के साथ त्वचा का रंग भी फीका पडऩे लगता है और ऐसी त्वचा के साथ हल्की सौम्य ‘डाई’ ही अच्छी लगेगी। बेहतर होगा कि आप बिना मांग की केश सज्जा करें क्योंकि डाई हल्की पडऩे पर सबसे पहले मांग के बाल ही सफेद नजर आते हैं। आप नियमित ‘डाई’ करती रहें। इससे नये सफेद और पुराने काले बालों का अंतर ढका रहेगा।
होंठ – उम्र ढलने के साथ होंठों का आकर्षण कम होने लगता है। होंठों में रेखाएं उभर आती हैं तथा सिकुडऩ पडऩे लगती है। आप अपने होंठों की आउटलाइन (खुला भाग) एकदम स्पष्ट और उभरी हुई रखिए। फैली हुई लिपस्टिक कभी न लगायें। सर्वप्रथम लिप पैंसिल से बाहरी रेखा बनाइये, फिर उसे रूई की ‘बड’ से अंदर की ओर मिलाइये। अब अंदर के हिस्से को लिपब्रश की सहायता से भरिए। इस बात का ध्यान रखें कि होंठों पर पड़ी प्रत्येक धारी लिपस्टिक से ढकी रहे। ऐसा करने से चेहरा ताजा और यौवन मंडित दिखाई देगा।
जबड़ा – ज्यों-ज्यों उम्र ढलती जाती है, जबड़े का कसाव ढीला होता जाता है जिससे चेहरा ऊबड़-खाबड़ दिखने लगता है। आप सही भंगिमा और व्यायाम के प्रयोग से जबड़े को चिकना, कसावयुक्त और आकर्षक बनाए रखिए। व्यायाम ऐसे कीजिए-कसकर मुटठी बांधिए तथा इस मुटठी को जबड़े के नीचे रखिए। अब मुंह खोलने का प्रयत्न कीजिए लेकिन साथ ही मुटठी से दबाव डालकर मुंह खोलने में रुकावट डालिए। ऐसा कई बार कीजिए। इससे जबड़ा मजबूत होगा तथा चेहरा आकर्षक बनेगा।
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आंखें – उम्र बढऩे के साथ आंखों में दृष्टि दोष हो जाता है, अत: पास या दूर की वस्तुओं को सही ढंग से देखने के लिए आंखें सिकोड़ कर देखना पड़ता है और कुछ समय बाद आंख सिकोड़ कर देखने की आदत पड़ जाती है। ऐसा करते समय माथे पर लकीरें उभर आती हैं जो देखने में भद्दी लगती हैं, अत: आप चालीस वर्ष की उम्र के आसपास संकोच त्याग कर बारीक काम के लिए चश्मा पहनना शुरू कर दें।
भौंहें – जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, आंखें और भौंहों के बीच कसाव ढीला पड़ता जाता है और वह हिस्सा नीचे की ओर ढलकने लगता है तथा आंख का आकर्षण कम हो जाता है। इसके लिए भौंहों के कोने केवल आधा इंच ‘ट्वीज’ कीजिए। अब पैंसिल से उस स्थान से आधा इंच ऊपर भौंह का आकार देकर पूरी भौंह बना दीजिए। अब आपकी भौंह, आपकी खिंची हुई भौंह से ऊपर उठकर दिखाई पड़ेगी तथा चेहरा भी जवान व सुंदर लगेगा।
पीठ और रीढ़ की हड्डी – नौजवान चेहरा और आकर्षक चाल आपके सौंदर्य में चार चांद लगाते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि आप अपनी रीढ़ की हड्डी को हमेशा सही अवस्था में रखें। सीधी चलिए। चलते समय न तो कंधे झुकाइये और न ही गर्दन। आप कितनी भी थकी क्यों न हों, रीढ़ की हड्डी झुकाकर कभी भी न चलें। चलते समय हमेशा चुस्ती-फुर्ती बनाये रखें। सीधी तनी हुई रीढ़ की हड्डी एक स्फूर्तिवान व्यक्तित्व प्रदान करती है तथा शरीर देखने में अधिक जवान दिखाई देता है।
वक्षस्थल – शरीर का यह हिस्सा सौंदर्य की दृष्टि से बहुत ही महत्त्व का है। वक्षस्थल की विकृति उम्र को बढ़ाती है। शरीर के इस हिस्से को पुष्ट और सुडौल बनाये रखिए। लगभग बीस वर्ष की उम्र के बाद हमेशा सही नाप की ‘ब्रा’ ही पहनिये। किसी सौंदर्य विशेषज्ञा से ‘ब्रा’ का चुनाव करते समय यदि सलाह ले लें तो अच्छा रहेगा। बस सोते समय या तैरते समय (स्नान के समय) ही ‘ब्रा’ उतारिए।
वक्षस्थल को सुडौल और पुष्ट बनाने के लिए व्यायाम और तैराकी नियमित रूप से करते रहिए।
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बांहें – बांहों में ज्यादा चर्बी एकत्र हो जाने से ये अनाकर्षक व बेडौल दिखने लगती हैं। बांहों को आकर्षक बनाए रखने के लिए एक साधारण व्यायाम है। आप दरवाजे के बीच में खड़ी होकर दोनों ओर के फ्रेम पर दोनों हाथ टिकाइये, अब शरीर को आगे की ओर धकेलिए तथा हाथों को मजबूती से फ्रेम पर जमे रहने दीजिए, अब शरीर को पुन: पूर्वावस्था में ले जाइये। यह क्रिया अधिक से अधिक जितनी बार हो सके, कीजिए।
पेट – पेट पर फालतू चर्बी बढ़ जाने से पेट का सौंदर्य नष्ट हो जाता है तथा अनेक रोग घेर लेते हैं। इससे बचाव के लिए प्रतिदिन हथेली के मजबूत दबाव से पेट के मांस को ऊपर की ओर तेजी से बढ़ाइये। इस व्यायाम को लगभग 15 मिनट तक करने से पेट सुडौल, पतला व आकर्षक बन जाता है। योग और मालिश से भी पेट की चर्बी घटाई जा सकती है।
जांच और कूल्हे – चर्बी जमने से यह हिस्सा मोटा और थुलथुल होकर अनाकर्षक दिखने लगता है। प्रतिदिन संतुलित भोजन लेकर, व्यायाम करके तथा मालिश करके चर्बी को कम किया जा सकता है। पानी खूब पीजिए लेकिन नशीले पेय व कोल्ड ड्रिंक्स बिलकुल न लें।
पैर – पैरों का आकर्षण नष्ट होने से बचाने के लिए नियमित रूप से प्रात: खुले मैदान में नंगे पैर टहलना चाहिए तथा सही आकार के आरामदेह जूते या चप्पल ही पहनने चाहिए। पैरों को आक्सीजन देने के लिए समय-समय पर जूते या चप्पल उतार दें।
– गजेन्द्र सिंह

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