डायबिटीज से किया जा सकेगा बचाव,किया जा रहा है प्रोग्राम तैयार

डायबिटीज से किया जा सकेगा बचाव,किया जा रहा है प्रोग्राम तैयार

नयी दिल्ली,13 जुलाई – “जानकारी ही बचाव है” के सिद्धांत पर चलते हुए वैज्ञानिकों ने एक एेसा शिक्षण कार्यक्रम विकसित किया है जिसके जरिए एेसे लोगों में टाइप टू मधुमेह होने के खतरे को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है जिनमें इसके होने की आशंका बेहद अधिक है।
दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यक्रम में शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने ,दिनचर्या में परिवर्तन तथा लोगों के सशक्तिकरण पर ही जोर दिया गया है।
लंदन के लेसेस्टर डायबिटीज सेंटर ने ‘लेट्स प्रिवेंट डायबिटीज’ नाम का एक नया समूहिक शिक्षा कार्यक्रम तैयार किया है जिसकी मदद से लोगों में टाइप टू मधुमेह के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
‘लेट्स प्रिवेंट डायबिटीज’ कार्यक्रम को तैयार करने वाली प्रोफेसर मिलाने डेविस कहतीं हैं कि इस तरह के कार्यक्रमों को यदि ठीक ढंग से लागू किया जाए तो यह बेहद प्रभावी होते हैं साथ ही इनमें लोगों की जीवनशैली को सुधारने और उसे बेहतर बनाने की भी क्षमता होती है।
टाइप टू मधुमेह की रोकथाम स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकताओं में हैं लेकन इस बात के उदाहरण बेहद कम हैं कि किस प्रकार से बचाव के तरीकों को देख रेख के प्रारंभिक तौर तरीकों में शामिल किया जाए।
डेविस कहती है,“ हमने इस बात का आंकलन किया कि क्या जीवन शैली और आदतों में बदलाव के लिए शिक्षण कार्यक्रम चला कर उन लोगों में टाइप टू मधुमेह को रोका जा सकता है जिनमें इसके होने का खतरा बेहद अधिक है।
” दो साल के इस कार्यक्रम में एक मुख्य सेशन और दो फोलो अप्स हैं।
अपने शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 880 एेसे लोगों को चुना जिनमें किसी न किसी प्रकार की बेहद मामूली शल्यक्रियाएं हो चुकी थीं।
सुश्री डेविस ने बताया कि इन्हें दो समूह में बांटा गया और इनमें से एक की उच्च स्तरीय देखभाल की गई जबकि दूसरे को शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने और दिनचर्या में परिवर्तन आधारित छह घंटे का शिक्षण कार्यक्रम ।
इसके अलावा दोनों समूहों को लिखित में भी जानकारी दी गई और तीन वर्षों तक समय समय पर इनकी जांच की गई।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने मुख्य सेशन और एक अन्य सत्र में भाग लिया उनमें टाइप टू मधुमेह होने का खतरा 60 प्रतिशत तक कम था जबकि पूरे शिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वालों में इसका खतरा 90 प्रतिशत तक कम पाया गया।

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