टीवी चैनल पर प्रतिबंध के मायने ..प्रतिबंध आपातकाल की तरह

टीवी चैनल पर प्रतिबंध के मायने ..प्रतिबंध आपातकाल की तरह

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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी प्रेस को मैनेज करने की कोशिशें पत्रकारिता के प्रारंभिक दौर से होती रही हैं, यही वजह है कि ‘पीत पत्रकारिता’ का भी उदय हुआ और उसने व्यवसायिकता का स्थान ले लिया। जब मीडिया मैनेज नहीं हुआ तो आपातकाल का काला अध्याय भी भारत में लिख दिया गया। अब जबकि एनडीटीवी इंडिया पर लगाए गए एक दिन के प्रतिबंध की आपातकाल से तुलना की जा रही है तो उसकी निंदा करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू कहते हैं कि हिंदी न्यूज चैनल के खिलाफ कार्रवाई ‘देश की सुरक्षा’ के हित में की गई। वैसे एनडीए सरकार मीडिया की स्वतंत्रता का बेहद सम्मान करती है और इस प्रकार के मुद्दों से केवल देश की सुरक्षा और संरक्षा प्रभावित होगी। उन्होंने आपातकाल के काले दिनों के बारे में बात करने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को आड़े हाथ लिया। वहीं राज्य सभा सांसद और जी मीडिया ग्रुप के प्रमुख सुभाष चंद्रा ने चैनल पर लगे प्रतिबंध को सही ठहराते हुए ट्विट किया कि एक दिवसीय प्रतिबंध नाइंसाफी है, यह सजा बहुत कम है। उन्होंने इसके लिए आजीवन प्रतिबंध की मांग करके सभी को चौंका दिया।आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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