टीचर- “इस शेर का मारवाड़ी अनुवाद करो … !”

टीचर- “इस शेर का मारवाड़ी अनुवाद करो … !”

टीचर- “इस शेर का मारवाड़ी अनुवाद करो … !”
“खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तदबीर से पहले . . .
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है ?”पप्पु – “शायर केवे है कि खुद इत्ता ऊँचा चढ जाओ .. इत्ता ऊँचा…हिमालय हूँ भी ऊँचा … बुलंदी माथे . . .जद थाने सर्दी लागण लागे और थे काम्पण लागो … जद भगवान थाणे खुद पुछेला ,,
पप्पुडा थारी रजाई कठे है ।टीचर बेहोश

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