झूठ क्यों बोलती हैं लड़कियां?

झूठ क्यों बोलती हैं लड़कियां?

3 आजकल झूठ का सहारा लेकर अपनी छवि को दूसरों की नजरों में उठाने वाली लड़कियों व औरतों का वर्ग फैलता जा रहा है। खुद को ऊंचा दिखाने की होड़ में बेमतलब झूठ बोलती हैं। ऐसी लड़कियां स्कूल, दफ्तर, बाजार हर जगह देखने को मिल जाती हैं।
झूठ बोलने से लड़कियों की गरिमा कम हो जाती है। उनके व्यक्तित्व में छोटापन आ जाता है। उनके बारे में लोगों की गलत धारणा बन जाती है। वे यह मान लेते हैं कि यह लड़की जो भी कह रही है, झूठ कह रही है और फिर वह किसी की विश्वसनीय नहीं बन पाती हैं। कोई उसकी बातों पर भरोसा नहीं करता।
लड़कियों में झूठ बोलने की आदत का विकास बचपन से ही होता है। कई लड़कियां पढ़ाई लिखाई में बिल्कुल होशियार नहीं होती। वे बहाने बना कर पढ़ाई से बचना चाहती हैं और बहाने बनाने की आदत से ही उन में झूठ बोलने की आदत पड़ती है। कई लड़कियां स्कूल का काम नहीं करती, बाद में अध्यापिका की पिटाई से डरकर झूठ बोलने लगती हैं कि कापी घर पर छूट गई, कल बिजली चली गयी थी इसलिए होम वर्क नहीं किया। इसी तरह कई लड़कियां घर के काम करने के समय झूठ बोलेंगी कि मेरे सिर या पेट में दर्द हो रहा है। बार बार ऐसे किसी झूठ का सहारा लेकर वे काम से छुटकारा पाना चाहती हैं। उन के इन झूठों से कई बार उन्हें काम से तो छुट्टी मिल जाती है मगर धीरे-धीरे झूठ उन की हर बात पर हावी होने लगता है।
यूं बहकते हैं कदम किसी और की तरफ

दरअसल झूठ बोलने की आदत एक तरह की बीमारी है जिसे डाक्टर मियोमैनिया कहते हैं, ‘इस रोग से पीडि़त लड़कियां बिना किसी कारण के यूं ही झूठ बोलती हैं। वे सच बोल कर भी परिस्थिति को सामान्य बनाना नहीं चाहती बल्कि झूठ बोल कर सामान्य परिस्थितियों को भी असामान्य बना देना चाहती हैं। जिस बात से उनका कोई मतलब नहीं है और जिस बात से उनका कोई फायदा नहीं है, वहां भी वे बेमतलब झूठ बोलती हैं। अलग-अलग औरतों और लड़कियों में इस रोग के लक्षण अलग-अलग होते हैं। कई औरतें केवल अपने अहम के कारण झूठ बोलती हैं तो कई अपनी बदचलनी और कामुक प्रवृति को छिपाने के लिए झूठ बोलती हैं। झूठ बोलने वाली औरतें यह नहीं सोचती कि जब लोगों को सच्चाई पता चलेगी तो उस का प्रभाव उन पर, उनके परिवार पर, उनके बच्चों पर क्या पड़ेगा। तब वे सब की नजरों में तो गिरेंगी ही, साथ ही सब की घृणा की पात्र बनेंगी।
यूं बहकते हैं कदम किसी और की तरफ

यह सच है कि बहुत सी बातें बताने योग्य नहीं होती। उन्हें छिपाने के लिए झूठ बोलना पड़ता है लेकिन कोशिश यह करनी चाहिए कि जब परिस्थितियां सामान्य हो जाएं तो सच बात बता देनी चाहिए क्योंकि झूठ को बहुत कोशिश करके भी सच नहीं बनाया जा सकता।
मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी झूठ बोलने वाली लड़कियों को सुधारने का एक मात्र तरीका यही है कि उनको प्यार से समझाया जाए और उनकी मदद की जाए। उन्हें छल, कपट की प्रवृति से मुक्त कराने के लिए उनके झूठ को पकड़ा जाए और उसे गलत साबित किया जाए।
ऐसी औरतों व लड़कियों के घरवालों का यह कर्तव्य बनता है कि वे झूठी बातों का विरोध करें। बोलें तो खुल्लम खुल्ला कहिए कि तुम्हारी तो हर बात सफेद झूठ होती है। घर वालों के इस तरह टोकने से उन्हें दुख: अवश्य होगा मगर वह दुख उस तिरस्कार से कम होता है जो उन्हें बाहर के लोगों से मिलता है। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि कुंठित व हीन भावना से ग्रस्त महिलाएं ही झूठ बोलती हैं। उनकी कुंठा को दूर करना चाहिए, तभी इन की आदत को सुधारा जा सकता है।
– ओंकार सिंहआप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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