जीवन में आगे बढऩे के लिए…कार्य और पढ़ाई में रखें समय संतुलन..!

जीवन में आगे बढऩे के लिए…कार्य और पढ़ाई में रखें समय संतुलन..!

 चौबीस घंटे प्रतिदिन का समय निश्चित है। 6 घंटे नींद द्वारा विश्राम अनिवार्य है तन मन को स्वस्थ रखने के लिए। शेष 18 घंटों में दैनिक कर्म, खान-पान, मनोरंजन इत्यादि के लिए औसतन 4 घंटे देने होंगे। अब हमें 14 घंटे मिलते हैं जिसका अधिकतम सदुपयोग हमें करना है।
इन 14 घंटों में सर्विस या बिजनेस के साथ जीवन में आगे बढऩे के लिए अपनी शिक्षा का स्तर बढ़ाना है, पढ़ाई करनी है, परीक्षा देनी है। कार्य एवं पढ़ाई में 14 घंटों में ही टाइम मैनेजमेंट अर्थात समय का बजट बनाना है।
कार्य आजीविका के लिए 8 से 10 घंटे देने होंगे। प्राइवेट संस्थान हो, आने जाने में समय अधिक लगता हो तो यह अवधि 12 घंटे भी हो जाती है।
शेष बचे हुए 2 या 4 घंटों में ही आगे की शिक्षा के लिए पढ़ाई करने हेतु टाइम टेबिल बनाना होगा। रात्रि के 4 घंटों की पढ़ाई प्रात: काल के 2 घंटों की पढ़ाई के बराबर है।
गुणवत्ता (क्वालिटी) महत्वपूर्ण है। घंटे गिनना (क्वांटिटी) गौण है। ड्यूटी पर जाने से पहले प्रात: 5 से 7 बजे तक की पढ़ाई करना सर्वश्रेष्ठ समाधान है। दिन भर ड्यूटी करने के पश्चात रात्रि में 10 बजे मोबाइल टी.वी, फोन, इंटरनेट को बंद करके सो जाइये। सुबह 4 बजे उठकर दो तीन घंटे पढ़ाई कर लीजिए। गुणवत्ता की दृष्टि से पढ़ाई के लिए यह सर्वोत्तम समय है।
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समय का दुरूपयोग कम करने के लिए हर व्यक्तिगत कार्य को परखिए। क्या इस कार्य की उपयोगिता है? आवश्यक नहीं हो तो उस कार्य को मत करिए। बचा हुआ समय पढ़ाई में लगाइये। फोन, मोबाइल, कम्प्यूटर व टीवी का सदुपयोग आवश्यकतानुसार ही कीजिए। समय की बहुत बचत हो जाएगी।
धन की सेविंग से अधिक महत्त्वपूर्ण है इंवेस्टमेंट। इसी प्रकार समय की बचत को पढ़ाई में निवेश करिए। जहां भी जितना भी समय बचा सकें, बचाने का प्रयास करें एवं इस बचे हुए समय को पढ़ाई में लगाइए।
इस समय का त्याग बाद में वर्षों तक मीठा फल देगा। अभी समर्पण से मेहनत करनी होगी। मनोरंजन कम करना होगा। अर्जुन की तरह पढ़ाई का लक्ष्य बनाकर जुटना होगा। अच्छे परिणाम स्वत: ही मिलेंगे।
आफिस में कई बार रूटीन कार्य होते हैं। शिफ्ट करने वालों को सायंकाल व रात्रि पारी में कुछ समय अपने लिए मिल जाता है। अगर आप के साथ भी ऐसा कार्य है तो एक पुस्तक आफिस में रखिए। एक दो घंटे का समय भी आफिस में मिल जाता है तो इस समय को पढ़ाई में लगाइए।
सामाजिक व्यवहार, मित्रों से गपशप, गमी खुशी के अवसर इत्यादि की समीक्षा करिए एवं सोचिए आप कहां कितना समय बचा सकते हैं।
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सार्थक उपयोगिता नहीं हो तो इन कार्यों को मना करना सीखिए। बहुत समय आप बचा लेंगे। वह समय आप को पढ़ाई में काम आएगा।
मोबाइल फोन पर संक्षिप्त व टू द प्वाइंट बात करें। समय का मूल्य समझें। ऊर्जा की बचत होगी। समय की बचत होगी। अमीर गरीब मध्यम वर्ग सभी के पास 24 घंटे हैं। आप के पास भी 24 घंटे हैं।
चरित्र व स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए। स्वस्थ रहेंगे तो तन-मन में ऊर्जा रहेगी। आफिस में भी अच्छा काम कर सकेंगे व पढ़ाई भी कर सकेंगे। समय चल रहा है। आपको समय के साथ चलना होगा। अपनी प्राथमिकता निश्चित करनी होगी। परीक्षा से पूर्व 10 से 15 दिन का अवकाश लेना होगा।
जिस दिन आफिस की छुट्टी है, उस दिन के आफिस के 10 घंटों में से 5 घंटे पढ़ाई के एकाउंट में डालने होंगे। संक्षेप में तनाव रहित होकर समय का पूरा सदुपयोग करना होगा।
शिक्षा का ऊंचा स्तर संस्थान में आप को ऊंची पोस्ट देगा। परिवार व समाज में सम्मान व प्यार देगा। आत्म विश्वास बढ़ेगा, आय बढ़ेगी। शिक्षा महत्त्वपूर्ण गहना है। शिक्षा के पेड़ पर हमेशा फल लगेंगे।
संतुलन बनाना होगा। अपनी परिस्थिति के अनुसार अपना टाइम टेबिल बनाना होगा।
अमल करना होगा। समीक्षा से सुधार करना होगा। बड़े होने से अधिक महत्त्वपूर्ण है अच्छा बनना। समय का रिमोट अपने हाथ में रखिए, लक्ष्य बनाइए, सफलता मिलेगी ही। समय संतुलन की राह पर चलने से मंजिल मिलेगी ही।
– दिलीप भाटिया

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