जीएसटी से महँगे होंगे आयातित सामान

जीएसटी से महँगे होंगे आयातित सामान

नई दिल्ली। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने आज कहा कि देश में 01 जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद आयातित सामान महँगे हो जायेंगे जिसका फायदा घरेलू कंपनियों को मिलेगा। हालाँकि, उन्होंने नयी कर व्यवस्था से महँगाई बढऩे की आशंका को खारिज कर दिया। श्री अधिया ने यहाँ जीएसटी पर संवाददाताओं के लिए आयोजित एक कार्यशाला में कहा कि नयी कर व्यवस्था में आयात पर सीमा शुल्क पहले की तरह बना रहेगा और साथ ही आयातित उत्पादों पर जीएसटी के स्लैब के हिसाब से भी कर लगाया जायेगा। उन्होंने कहा कि इससे आयातित उत्पाद महँगे होंगे और घरेलू बाजार में भारतीय कंपनियाँ ज्यादा प्रतिस्पद्र्धी होंगी जिससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। जीएसटी लागू करने वाले अन्य देशों में महँगाई बढऩे के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत में इससे मुद्रास्फीति नहीं बढ़ेगी क्योंकि यहाँ पहले से ही बहुस्तरीय कर प्रणाली मौजूद है। उन्होंने कहा कि जिन देशों में जीएसटी लागू करने से महँगाई बढ़ी है वहाँ ऐसा एक स्तरीय कर प्रणाली से बहुस्तरीय कर प्रणाली अपनाने के कारण हुआ है। देश में मूल्य वद्र्धित कर (वैट) लागू किये जाने के समय से ही बहुस्तरीय कर प्रणाली है इसलिए इससे मुद्रास्फीति बढऩे का खतरा नहीं है। जीएसटी में भी अनेक स्तरों पर कर संग्रह होगा, लेकिन यह एकल कर होगा।
श्री अधिया ने कहा कि निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के लिए जीएसटी में शून्य प्रतिशत कर होने से भारतीय निर्यातक कंपनियों को फायदा होगा। सस्ता होने के कारण उनके उत्पाद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पद्र्धी होंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को चुंगी तथा अन्य शुल्कों के रूप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान जरूर होगा। इसकी भरपाई के लिए संभव है कि वे प्रॉपर्टी पर कर और जनोपयोगी सेवाओं के शुल्क बढ़ा दें। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा लगाये जाने वाले मनोरंजन कर को भी जीएसटी में समाहित नहीं किया गया है। इससे भी उन्हें राजस्व प्राप्ति हो सकेगी। राजस्व सचिव ने कहा कि जीएसटी की तैयारी पूरी हो चुकी है और किस उत्पाद अथवा सेवा को किसी स्लैब में रखना है यह भी जल्द तय कर लिया जायेगा। कर जमा कराने वाले मौजूदा करदाताओं में 71 प्रतिशत ने जीएसटी के लिए पंजीकरण करा लिया है। छोटे व्यापारियों, कारोबारियों एवं सेवा प्रदाताओं को किसी प्रकार की समस्या न/न हो इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने दो सॉफ्टवेयर उपकरण तैयार किये हैं। यदि कारोबारी अपना रिकॉर्ड इन सॉफ्टवेयरों पर रखता है तो महीने के अंत में उसका जीएसटी रिटर्न अपने आप तैयार हो जायेगा। इसके बाद सिर्फ पाँच मिनट के लिए इंटरनेट से जुड़कर जीएसटीएन के पोर्टल पर रिटर्न अपलोड किया जा सकेगा। एक उपकरण जावा पर और दूसरा एमएस एक्सेल पर आधारित है।
जीएसटीएन के अलावा बोली के आधार पर 34 जीएसटी सुविधा प्रदाताओं का चयन किया गया है जो इसी तरह के अन्य उपकरण तैयार करेंगे। दूसरे चरण में और सुविधा प्रदाताओं का चयन किया जायेगा। इसके अलावा जीएसटी प्रैक्टिशनर कारोबारियों की मदद करेंगे। केंद्र तथा राज्य सरकारों के भवनों में रिटर्न भरने में मदद के लिए केंद्र बनाने की भी योजना है। साथ ही स्थानीय भाषाओं में हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किये जायेंगे।

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