जीएसटी के मौजूदा प्रस्तावों से केन्द्र राज्य में हो सकता है टकराव: उद्योग

जीएसटी के मौजूदा प्रस्तावों से केन्द्र राज्य में हो सकता है टकराव: उद्योग

GST-Bill_0नई दिल्ली। उद्योग जगत ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक के मौजूदा प्रारूप पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे भविष्य में राज्यों का केन्द्र के साथ टकराव हो सकता है।
उद्योग एवं वाणिज्य संगठन फिक्की तथा एसोचैम के प्रतिनिधिमंडलों ने राजस्व सचिव डॉ हसमुख आधिया को जीएसटी विधेयक के मौजूदा प्रारूप पर अपने सुझाव दिये हैं जिनमें इन संगठनों ने यह बात भी कही है। फिक्की ने जारी बयान में बताया कि उसके प्रतिनिधिमंडल ने श्री आधिया से जीएसटी के मौजूदा प्रारूप पर बातचीत की और अपना फीडबैक उन्हें सौंपते हुए केन्द्र एवं राज्य का दोहरा प्राशासनिक नियंत्रण, कर प्राधिकरण को बहुत अधिक अधिकार, अपील फाइल करने से पहले राशि जमा करने को अनिवार्य बनाये जाने आदि पर आपत्ति जाहिर की। उसने कहा कि भविष्य में विवाद पैदा करने की आशंका वाले प्रावधानों पर कानून बनने से पहले पुन: विचार किया जाना चाहिए। एसोचैम ने बताया कि उसके प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटी विधेयक के प्रारूप में बदलाव करने के कुछ सुझाव दिये जिसे वस्तु एवं सेवा को अलग-अलग पारिभाषित करने, बिजली को भी जीएसटी में शामिल करने, दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच विवाद की स्थिति में इसे सुलझाने का तंत्र विकसित करने आदि के सुझाव दिये गये हैं। प्रतिनिधिमंडलों ने विधेयक प्रारूप में कुछ खामियों का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने वस्तुओं के आपूर्तिकर्ता की स्थिति और प्राप्तकर्ता की स्थिति और अंतरराज्यीय एवं अंत: राज्यीय को पारिभाषित नहीं किये जाने को सामने रखा। विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) की आपूर्ति के लिए कोई प्रावधान नहीं किये जाने की बात कहते हुए उन्होंने सेज अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया और कारण बताओ नोटिस जारी करने की अवधि सीमित नहीं करने पर भी आपत्ति की गयी है।

Share it
Top