जीएसटी के बाद सबसे बड़ा एकल बाजार बनेगा भारत

जीएसटी के बाद सबसे बड़ा एकल बाजार बनेगा भारत

RR Tiwariवर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे में सबसे बड़ा सुधार है। संविधान के 122वें संशोधन के बाद जीएसटी देशभर में लागू हो जाएगा। इस बिल के लागू होने के बाद सभी केंद्रीय और राज्य स्तर के करों के जगह एक ही कर लगाया जाएगा। जीएसटी लागू होने से वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे। केंद्र की मोदी सरकार ने आजादी के बाद देश सबसे बड़े कर सुधार की दिशा में मील का पत्थर हासिल कर लिया। सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति के बाद राज्यसभा में 3 अगस्त को करीब 7 घंटे की चर्चा के बाद जीएसटी बिल को सर्वसम्मति से हरी झंडी दे दी गई। समान वैट की व्यवस्था के तहत वस्तु एवं सेवा कर राज्यों के विभिन्न करों और स्थानीय करों की जगह लेगा। इसके लागू होने से भारत दुनिया के सबसे बड़े एकल बाजार में बदल जाएगा। बिल के समर्थन में सदन में उपस्थित सभी 2०3 सदस्यों ने वोट दिए। उच्च सदन के इस फैसले को आर्थिक सुधार के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। जीएसटी पर पिछले 10 साल से एक दूसरे का तीखा विरोध कर रही भाजपा और कांग्रेस ने आपसी सहमति दिखा कर एतिहासिक आर्थिक सुधार का रास्ता खोल दिया। दरअसल, जीएसटी को देश हित में बताते हुए यह भी कहा जा रहा है कि इसके लागू होने से पहले महंगाई बढ़ेंगी, फिर बाद में वह धीरे-धीरे कम होती चली जाएगी। यानी जीएसटी का जाल पहले कंगाल बनाएगा, फिर धीरे-धीरे अपनी चाल सुधारेगा।
देश में महंगाई पर अक्सर चर्चा शुरू हो जाती है, लेकिन जब सरकार कोई अच्छे फैसले करती है तो उसका कोई जिक्र नहीं करता। 22 जुलाई को गोरखपुर की रैली में यह कहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति और आर्थिक प्रबंधन की सबसे पुरानी दुविधा को स्वीकार कर रहे थे, जिसने किसी प्रधानमंत्री का पीछा नहीं छोड़ा। कई अच्छी शुरुआतों के बावजूद महंगाई ने अच्छे दिन के राजनैतिक संदेश को बुरी तरह तोड़ा है। पिछले दो साल में सरकार महंगाई पर नियंत्रण की नई सूझ या रणनीति लेकर सामने नहीं आ सकी, जबकि अंतरराष्ट्रीय माहौल कच्चे तेल और जिंसों की घटती कीमतें भारत के माफिक रहा है। सरकार की चुनौती यह है कि अच्छे मॉनसून के बावजूद अगले दो वर्षों में टैक्स, बाजार, मौद्रिक नीति के मोर्चे पर ऐसा बहुत कुछ होने वाला है, जो महंगाई की दुविधा को बढ़ाएगा। जून में उपभोक्ता कीमतें सात फीसदी का आंकड़ा पार करते हुए 22 माह के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। महंगाई का ताजा इतिहास 2008 के बाद गवाह है कि सफल मानूसनों ने खाद्य महंगाई पर नियंत्रण करने में कोई प्रभावी मदद नहीं की है अलबत्ता खराब मानसून के कारण मुश्किलें बढ़ जरूर जाती हैं। पिछले पांच साल में भारत में महंगाई के सबसे खराब दौर बेहतर मानसूनों की छाया में आए हैं। इसलिए मानसून से महंगाई में तात्कालिक राहत के अलावा दीर्घकालीन उम्मीदें जोडऩा तर्कसंगत नहीं है। भारत की महंगाई जटिल, जिद्दी और बहुआयामी हो चुकी है। नया नमूना महंगाई के ताजा आंकड़े हैं।
समझा जा रहा है कि जीएसटी के लागू होने के बाद धीरे-धीरे देश की आर्थिक दशा में सुधार आएगा और महंगाई भी कम होगी। जीएसटी कानून के बाद सेंटर जीएसटी, स्टेट जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी के लिए कानून बनना है। विपक्ष ने इन बिलों को मनी बिल की जगह वित्त बिल के रूप में पेश किए जाने का भरोसा दिए जाने की मांग की। हालांकि सरकार ने इस पर कोई आश्वासन नहीं दिया और जीएसटी को 1 अप्रैल 2017 तक लागू करने की मंशा जाहिर की। इससे पहले बिल पर उच्च सदन में उच्च स्तरीय चर्चा हुई। बिल का समर्थन करने पर राजी हुई कांग्रेस की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम कई सुझाव देने के साथ ही बार बार इस बिल का श्रेय लेते दिखाई दिए। इस पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने बिल को कानूनी जामा पहनाने की सिरदर्दी का हवाला देते हुए कहा कि जीएसटी लागू कराना दुरूह कार्य है। कांग्रेस की ओर से चिदंबरम और आनंद शर्मा ने कई मौकों पर सरकार पर तीखा हमला बोला। वित्त मंत्री ने जीएसटी की कई खूबियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर चोरी करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कहा कि इससे कर मामले में पारदर्शिता आने के साथ ही व्यापार करना आसान होगा। राज्यों के अधिकार के हनन और इसके जरिए केंद्र को वीटो हासिल होने के आरोप को वित्त मंत्री ने आधा सच बताया। राज्यों के पास अधिकार होना चाहिए, मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि केंद्र के हाथों में अधिकार के बिना संघीय ढांचे का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
मनमोहन सिंह का सच यह कहकर बताती हैं कि 24 जुलाई 1991 में भारत के दरवाजे जिस तरह वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया के लिये खोले वह अपने आप में एक अद्भभूत कदम था। हर रिपोर्ट दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की मौजूदगी दर्ज कराने के लिये मनमोहन सिंह को ही तमगा देती है। चाहे न्यूक्लियर डील हो या एक दर्जन सरकारी सेक्टर का दरवाजा विदेशी निवेश के लिये खोलने की पहल। वाह-वाही मनमोहन सिंह की पश्चिमी मीडिया झूम झूम कर करता है। लेकिन झटके में 2009 के बाद जब राडिया टेप से कलाई खुलनी शुरु होती है कि असल में देश में सरकार बनी तो नागरिकों के वोट से है लेकिन सारी नीतियां कारपोरेट के लिये कारपोरेट ही अपने कैबिनेट मंत्रियों की जरीये बना रहा है तो कई सवाल देश के भीतर भी खड़े होते है और कारपोरेट घरानों को भी समझ में आता है कि कौन सा घराना यूपीए के दौरान लाभ पाकर बहुराष्ट्रीय कंपनी होने का तमगा पा गया और कौन सा कारपोरेट संघर्ष करते हुये मंत्रियों और नौकरशाही के जाल में ही उलझता रहा। बहरहाल, राज्यसभा में बहुप्रतीक्षित जीएसटी से जुड़े संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर देश में नई परोक्ष कर प्रणाली के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया गया। इससे पहले सरकार ने कांग्रेस के एक प्रतिशत के अतिरिक्त कर को वापस लेने की मांग को मान लिया तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया कि जीएसटी के तहत कर दर को नीचे रखा जाएगा। संशोधित प्रावधानों के अनुसार जीएसटी को केंद्र एवं राज्यों अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच आपस में होने वाले विवाद के निस्तारण के लिए एक प्रणाली स्थापित करनी होगी।
16 साल पहले वाजपेयी सरकार ने इसकी शुरुआत की थी, लेकिन बहुमत नहीं होने और विपक्ष के विरोध के कारण ये टलता रहा। 2009 में यूपीए सरकार बनने पर उसने भी इसे पारित कराने की कोशिश की, लेकिन बीजेपी के विरोध और ज्यादातर राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें होने के कारण उसे भी कामयाबी नहीं मिली। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स केंद्र और राज्यों के 20 से ज्यादा अप्रत्यक्ष करों की जगह लेगा। इसके लागू होने पर एक्साइज, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, वैट, सेल्स टैक्स, मनोरंजन कर, लक्जरी टैक्स और ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स जैसे कई टैक्स खत्म हो जाएंगे। पूरे देश में एक समान टैक्स लागू होने से कीमतों का अंतर घटेगा। यहां ये बताना भी जरूरी है कि जीएसटी लागू होने के बाद भी पेट्रोल, डीज़ल, शराब और तंबाकू पर लगने वाले टैक्स में कोई बदलाव नहीं होगा। सरकार और उद्योग जगत दोनों का ही मानना है कि जीएसटी लागू होने से पूरे देश में कारोबार करना आसान होगा, जिससे जीडीपी में कम से कम 2 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में फिलहाल 3० से 47 फीसद टैक्स लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स 20 से 22 फीसद तक आ जाने की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में जीएसटी नहीं है। वहां की जीडीपी 2.57 प्रतिशत है। भारत में इस वक्त जीएसटी नहीं है। भारत की जीडीपी 7.26 प्रतिशत है। जिन 140 देशों में जीएसटी लागू हुई क्या सभी की जीडीपी में उछाल आया। भारत में जीएसटी के बाद डेढ़ से दो फीसदी की उछाल के दावे का आधार क्या है। जीएसटी के नए अनुभव होंगे और सुधार होता चलेगा। इतना बड़ा बदलाव एक बार में सर्वगुण संपन्न तो नहीं हो सकता लेकिन जो गुण है और जो दोष है उस पर हम बात तो कर सकते हैं। बहरहाल, कहा जा रहा है कि जीएसटी से ई-कामर्स में भयंकर उछाल आएगा। जीएसटी से कर प्रणाली पहले से बेहतर होगी जिसका लाभ हर सेक्टर को मिलेगा। खैर, देखना यह है कि आगे क्या होता है।
राजीव रंजन तिवारी

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