जान भी ले सकता है एस्बेस्टस

जान भी ले सकता है एस्बेस्टस

एस्बेस्टस के उपयोग से होने वाली परेशानी एवं बीमारी को ध्यान में रखकर विश्व के पचास से अधिक शीर्ष देशों ने उस पर प्रतिबंध लगा दिया है किंतु अपने भारत में यह बेखौफ बिक्री व उपयोग किया जा रहा है। अनेक शासकीय भवन अभी भी उसी की छत, केबिन व दीवार के भीतर संचालित हो रहे हैं। अपना देश व अपने देशवासी भी उसके उपयोग से होने वाले नुक्सान से भली भांति वाकिफ हैं, उसके बाद भी सरकार की उदासीनता एवं लोगों में जागरूकता के अभाव में अब भी इसका प्रयोग छिट पुट रूप से हो रहा है।
भवन, मकान व कार्यालय को पक्के बनाने के पक्ष पर भले ही एस्बेस्टस को नापसंद भी करते हैं, फिर भी यत्र तत्र एस्बेस्टस की चादर का उपयोग होता दिख जाता है। कई देशों में त्वचा की बीमारियों के लिए इसे जिम्मेदार ठहराया गया है और इस पर संपूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
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दुनियां भर के शोधकर्ता, डाक्टरों एवं वैज्ञानिकों ने हाल ही में यह बताया है कि एस्बेस्टस के उपयोग पर बचे देश आगे रोक नहीं लगायेंगे तो वहां यह लाखों उपयोगकर्ता लोगों की जान ले सकता है और इन लोगों की जान बेवजह जाएगी।
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उसके उपयोगकर्ता भवन निर्माण में सबसे सस्ता माध्यम बताकर उसका उपयोग जारी रखे हैं। वैज्ञानिकों एवं डाक्टरों का कहना है कि जिस तरह का एस्बेस्टस हो एवं जैसा भी उपयोग किया जा रहा हो, यह सदैव उसके पास रहने वाले को नुक्सान जरूर पहुंचायेगा। एस्बेस्टस सफेद, भूरा व नीले रंग में मिलता है। तीनों हानिकारक हैं।
-सीतेश कुमार द्विवेदी

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