जरा चाल पर भी ध्यान दें

जरा चाल पर भी ध्यान दें

जैसे चेहरा दिल का दर्पण होता है, वैसे ही हमें अपनी चाल पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि हमारी चाल से भी हमारे व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है। नियमित प्रयास से ही हम अपनी चाल में सुधार ला सकते हैं।
– चलते समय बातें करते वक्त हाथ इधर उधर नहीं घुमाने चाहिए।
– अकेले चलते समय अपने आप से बातें नहीं करनी चाहिए। इससे आप के अवचेतन मन में चल रही हलचल प्रदर्शित होती है।
– बूट, चप्पल या स्लीपर घसीट कर नहीं चलना चाहिए। इससे आपके बेपरवाह एवं मूर्ख होने का आभास होता है।
– बार बार इधर-उधर या पीछे नहीं देखना चाहिए।– नीचे पत्थर, फिसलन और रास्ता देख कर चलना चाहिए। गिरने पर आप हंसी का पात्र बन सकते हैं।
– चलते समय आप के बूट के तस्में बंधे होने चाहिएं। खुले तस्में होने पर आप गिर सकते हैं।
– गर्दन अकड़ा कर या नीचे करके न चले। बांहें पहलवान छाप फैला कर न चलें। टांगें चौड़ी करके न चलें।– चलते समय सांस नाक द्वारा लें। इससे आपको थकान नहीं होगी।
– गु्रप में चलते समय सारी सड़क घेर कर मत चलें।
– विजेन्द्र कोहली

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