जयंत को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाने का फैसला…क्या रालोद, जदयू और बीएस फोर के साथ चुनाव लडेगा..?

जयंत को मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनाने का फैसला…क्या रालोद, जदयू और बीएस फोर के साथ चुनाव लडेगा..?

ajit-singh राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और बी एस फोर ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लडऩे और रालोद नेता जयंत चौधरी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा की है।रालोद के अध्यक्ष चौ. अजित सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और बी एस फोर के नेता आर.के. चौधरी ने मंगलवार को  बडौत में एक विशाल  जनसभा में यह घोषणा की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर रखने का लोगों से आह्वान किया।इन नेताओं ने कहा कि इसके लिए तीनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। सभा में  जयंत चौधरी को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया । इस मौके पर जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव तथा कई अन्य नेता मौजूद थे। जनसभा से पहले  नीतीश कुमार ने यहां पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय  चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा का भी अनावरण किया, ये प्रतिमा कई साल से अनावरण का इंतजार कर रही थी । चौ  अजित सिंह  ने इस मौके पर कहा कि लोकसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश के लोगों को एक सपना आता था और वे रालोद को विजयी बनाते थे, लेकिन गत लोकसभा चुनाव से पूर्व यहां के लोगों को बुरा सपना आया और वे भूल कर बैठे, जिसकी वजह से केन्द्र में भाजपा की सरकार बन गई।
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 रालोद को लोकसभा चुनाव ने सबसे बड़ा दर्द दिया है,जिससे अभी पार्टी उभर नहीं पा रही है,ये सही है कि पहले पश्चिम के ग्रामीणों ,खासतौर से जाटो को चुनाव से पहली रात सपने में चौधरी चरण सिंह दिख जाते थे और वे रालोद को अपनी वोट दे दिया करते थे,लेकिन इस चुनाव में ऐसा नहीं हो सका,जिसका दर्द अजित सिंह जाहिर कर रहे थे |
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दरअसल लोकसभा चुनाव से पहले मुजफ्फरनगर दंगो के दौरान अजित सिंह अपने जाट-मुस्लिम समीकरण को बचाने के लिए उस समय मुजफ्फरनगर नहीं आये थे ,जिसका जाटो को बहुत बुरा लगा था और उन्होंने रालोद को छोड़कर भाजपा को समर्थन दे दिया था,मुस्लिम तो जाट से वैसे ही नाराज थे क्योंकि ज़्यादातर हिंसा जाट बाहुल्य इलाकों में हुई थी ,रालोद के लिए पिछला चुनाव न खुदा ही मिला,न विसाले
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सनम वाला हो गया ,मुस्लिम रालोद को जाट पार्टी मानकर मिले नहीं और जाट भी इसलिए नाराज हो गए कि जब हम मर रहे थे ,तब चौधरी कहाँ थे..?अब भाजपा से जाट नाराज चल रहे है जिसके चलते अजित सिंह को फिर सम्भावना लग रही है कि वे जाटो को अपने साथ वापस ले आयेंगे ,इसी के लिए जयंत को आगे करके युवाओं को लुभाने की कोशिश की गयी है..
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नीतीश और आर.के चौधरी के सहारे ये गठबंधन कहीं कुछ असर दिखा पाता है या बडौत में कल भारी भीड़ जुटा कर अपनी ताकत दिखा चुका  रालोद फिर किसी और के साथ नयी पारी शुरू करता है,इस पर सबकी नजर लगी हुई है |फ़िलहाल प्रदेश में अपनी वापसी के लिए जीतोड़
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कोशिश कर रही भाजपा भी अजित सिंह कितनी ताकत वापस बटोर रहे है,इस पर नजर लगाये हुए है ,रालोद के लिए ये चुनाव जीवन-मरण का सवाल बना हुआ है इसलिए वो सब प्रयास कर रहा है,पर रालोद मुखिया की विश्वसनीयता के संकट के चलते कोई उन पर यकीन नहीं कर पा रहा है,पर ये भी सच है कि चुनाव से पहले रालोद क्या करेगा,इसी पर पश्चिम की राजनीति  और रालोद का भविष्य तो काफी हद तक  निर्भर करेगा ही ..पर उसी से  2017 में  भाजपा की सम्भावना भी तय होंगी …!
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