जब बाहर खाना खाने जाये…!

जब बाहर खाना खाने जाये…!

 चलो आज कहीं बाहर खाना खायें। इस तरह की चर्चा अक्सर भारतीय परिवारों में होती रहती है। वैसे भी आधुनिकता के चलते बाहर खाना खाने का चलन दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। यही कारण है कि आज किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में जाकर लोगों का जमावड़ा देखा जा सकता है।
एक बार हम स्वयं एक रेस्टोरेंट में गये जहां पर खाना खाने वाले लोगों की भारी भीड़ थी। एक से एक शालीन लोग उस रेस्टोरेंट की शोभा बढ़ा रहे थे। वहीं दूसरी ओर एक ऐसा भी परिवार उस रेस्टोरेंट में बैठा था जिसने वहां की शान्ति को भंग करने की कसम खाई थी। उनके इस व्यवहार को सभी लोग देख रहे थे क्योंकि वे लोग वहां पर जोर-जोर से बातें कर रहे थे। उनके बच्चे इधर उधर घूम रहे थे।
यदि आप चाहते हैं कि आप बाहर जाकर सभ्य होने का परिचय दें तो अपनी आदतों में थोड़ा परिवर्तन अवश्य लाएं जैसे:-
– यदि आप अपने परिवार के साथ खाना खाने किसी होटल या रेस्टोरेंट में जा रहे हैं तो शान्ति से उस स्थान में प्रवेश करें न कि चिल्लाते या शोर मचाते हुए।
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– यदि उस होटल या रेस्टोरेंट में वेटर की सुविधा नहीं है अर्थात सैल्फ सर्विस है तो परिवार का एक सदस्य सबके आर्डर जानकर सर्विस काउन्टर पर जाए।
– रेस्टोरेंट या होटल में वेटर की सुविधा हो तो उन्हें बुलाने के लिए शिष्टता के साथ इशारे से बुलाएं न कि जोर से आवाज देकर अपनी तरफ बुलाएं।
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वहां के खाने में किसी भी प्रकार की कोई कमी हो तो वेटर पर न बरसें बल्कि इसकी शिकायत जाकर वहां के मैनेजर से करें।
खाना खाते समय जोर-जोर से आवाज न करें, न ही जोर-जोर से बातें करें क्योंकि इससे अन्य लोगों को परेशानी होती है।
– भाषणा बांसल

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