जब पड़ जाए किसी को दिल का दौरा

जब पड़ जाए किसी को दिल का दौरा

दिल का दौरा अक्सर अचानक पड़ता है। पहले से इसके लक्षण बाहरी रूप से प्रकट नहीं होते। कभी कभी इतना खतरनाक दिल का दौरा पड़ता है कि अचानक सामने वाला दुनियां छोड़कर दूसरी दुनियां में पहुंच जाता है। अक्सर अच्छे खासे व्यक्ति का जीवन अपने भरे पूरे यौवन में ही इसकी चपेट में आ सकता है।
वैसे तो इसके प्रारंभिक लक्षणों की पहचान होना मुश्किल होता है पर जैसे ही इसके लक्षणों का पता चले और रोगी को उचित डॉक्टरी सहायता मिल जाए तो कुछ रोगियों को बचाया जा सकता है। वैसे इसके लक्षण रोगियों में भिन्न हो सकते हैं। कुछ कॉमन लक्षण हैं छाती में जबर्दस्त दर्द, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, कंधों, बांहों, गर्दन, जबड़े व पीठ की ओर बढ़ता दर्द, पेट में गैस का अहसास, बेचैनी महसूस होना, होंठों व नाखूनों का नीला होना, चक्कर आना, अधिक पसीना आना, बेहोशी महसूस होना, तेज धड़कन, सांस फूलना, नब्ज धीमी या तेज चलना, ब्लड प्रेशर में गिरावट ना आदि।
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अनुसंधानों से पता चलता है कि दिल के दौरे के हर दो मरीजों में से एक की मृत्यु हो जाती है। यदि पास खड़ा व्यक्ति उन्हें एकदम डॉक्टर के पास ले जाए या पुनर्जीवन की तकनीक जानने वाला हो तो उन्हें इस घोर संकट से बचाया जा सकता है।
दिल का दौरा उन लोगों से अधिक पडऩे की आशंका होती है जिनका कोलेस्ट्रॉल कांउट 220 से अधिक हो, ब्लड प्रेशर 140/80 से अधिक हो, वजन आदर्श वजन से अधिक हो, जो लोग अधिक धूम्रपान करते हों, अधिक चिकनाई वाला भोजन करते हों, निष्क्रि य जीवन शैली होने पर, जरूरत से अधिक काम करने वालों को, मधुमेह रोगियों को, आनुवंशिक बीमारी चली आ रही हो तो।
तरल आहार में क्या लें
अचानक दिल का दौरा पड़ जाए तो उनके साथ वाले लोगों को निम्न उपाय प्रयोग में लाने चाहिए।
– सर्वप्रथम एम्बुलेंस बुलवाएं। एम्बुलेंस के आने का इंतजार न करें। आस पास के डॉक्टर के पास ले जाएं।
– यदि डॉक्टरी मदद शीघ्र न मिल पाए तो मरीज को सीधा लिटाएं, गर्दन के नीचे तकिया न रखें, पांवों को ऊंचा करें ताकि रक्त का बहाव मस्तिष्क को पहुंचता रहे।
– मरीज के आस पास भीड़ न लगाएं। खुली हवा आने दें।
– मरीज के दांत अगर बनावटी हों तो निकाल लें और चेहरे को एक तरफ करें।
– अगर पुनर्जीवन तकनीक की जानकारी हो तो प्रक्रि या प्रारंभ कर दें।
कभी कभी प्राथमिक मदद देकर रोगी की जान को बचाया जा सकता है।
– सुनीता गाबा

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