जब देनी हो बच्चे को दवा की खुराक..उसकी उम्र और वजन के अनुसार ही दी जानी चाहिए !

जब देनी हो बच्चे को दवा की खुराक..उसकी उम्र और वजन के अनुसार ही दी जानी चाहिए !

 स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बुखार में दवा की खुराक को भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले स्पून (चम्मच) को हम टी स्पून मान लेते हैं जो तीन मिलीमीटर से लेकर छह मिलीमीटर के साइज में होते हैं।
अलग-अलग घरों में अलग-अलग साइज के चम्मच होते हैं। इससे दवा की खुराक में अंतर आ जाता है जिससे बड़ी गड़बड़ हो जाती है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह होती है कि बच्चों को दवा की खुराक उसकी उम्र और वजन के अनुसार ही दी जानी चाहिए।
सर्दी, खासी और बुखार के समय में दवा की सही मात्र का होना बहुत ही आवश्यक हैं। खासकर तब जब दवा किसी बच्चे को दी जा रही हो। सही मात्र में दवा लेना किसी भी दवा के असरकारी होने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।
वास्तव में बुखार बच्चों को होने वाला एक ऐसा रोग है जो अभिभावकों को अनचाही दवाएं देने को बाध्य कर देता है लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि सरल और सुरक्षित दवाएं ही इसमें तुरंत लाभ प्रदान करने वाली होती हैं।
ज्यादा देर तक न पकाएं खाना…स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है अधपका भोजन

बुखार बच्चों में पायी जाने वाली सबसे आम बीमारी है और इसको लेकर माता-पिता को चिन्तित होने की कोई खास आवश्यकता नहीं है। बुखार शरीर में होने वाले किसी इंफेक्शन के विरूद्ध एक प्रोटेक्टिव रिस्पांस है। अधिकतर रोगियों को बुखार होने की वजह ‘वाइरल इंफेक्शन है जो स्वत: ठीक हो जाता है। बुखार का पता तभी लगता है, जब शरीर का तापमान सौ डिग्री फारेनहाइट से ऊपर बढ़ जाता है।
बच्चों में दवा का इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब पारा 101 डिग्री तक पहुंच जाए या बुखार के साथ सरदर्द, बदन दर्द भी हो। इन लक्षणों में डाक्टर के सलाह अनुसार ‘पैरासिटामोल’ की उचित खुराक बच्चों को दी जानी चाहिए। दवा चम्मच से देने के बजाय एक प्लास्टिक मापक से दी जानी चाहिए क्योंकि दवा की सही मात्रा का आकलन आवश्यक होता है। इस तथ्य को भी जान लेना आवश्यक है कि हर रोगी पर पैरासिटामोल अनचाहे ढंग से प्रभावशाली नहीं होता और कभी-कभी यह बच्चों के लिए हानिकारक भी हो सकता है। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा की दृष्टि से एवं प्रभावी दवा होने के कारण पैरासिटामोल न सिर्फ बच्चों के लिए ही बल्कि हर वर्ग के लोगों के लिए भी लाभकारी है।
100 कृषि विज्ञान केन्द्रों में किसानों का होगा कौशल विकास :राधामोहन
इसे घरेलू उपचार के तौर पर चिकित्सक से परामर्श लेकर उपयोग में लाया जा सकता है। यह भी आवश्यक है कि बुखार से पीडि़त बच्चे को हवादार कमरे में रखा जाए तथा उसे अधिक कम्बल या चादर से न ढ़का जाय। पानी एवं तरल पदार्थों का सेवन पीडि़त बच्चे को अधिकाधिक कराते रहा जाये। एंटीबायोटिक देने के बाद भी अगर बुखार एक सौ चार डिग्री तक पहुंच जाए तो रोगी के माथे पर पानी की पट्टी बराबर रखते रहनी चाहिए। इससे शरीर का तापमान कम होने लगता है। सभी अभिभावकों को यह चाहिए कि वे बच्चे की दवा के प्रकार एवं दवा की खुराक के विषय में डाक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतें।
-आनंद कुमार अनंत

Share it
Top