जनता के पैसों पर ऐश करते पूंजीपति और राजनेता

जनता के पैसों पर ऐश करते पूंजीपति और राजनेता

aapki baatभारत सरकार ने बैंकों के बड़े बड़े कर्जदारों से नरमी बरतने का आदेश दिया है। सरकार का यह आदेश बैंकिंग प्रणाली और जनता के जमा धन पर बड़े-बड़े पूंजी पतियों को ऐश करने और उन्हें कर्ज नहीं चुकाने के लिए संरक्षण दे रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप देश में विजय माल्या जैसे बड़े बड़े घराने जनता की पूंजी लूट कर या तो भाग जाते हैं, या वंâपनियों को दिवालिया घोषित कर अलग हो जाते हैं । भारत में अमीरों के लिए अलग कानून है। गरीबों के लिए अलग कानून काम कर रहे हैं। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था दिनों-दिन कमजोर होती जा रही हैं। आम जनता का विश्वास विधायिका और कार्यपालिका से पहले ही लगभग खत्म हो गया है। अब न्यायपालिका भी देश में दोहरे कानून की प्रतीक बनकर आम जनता का विश्वास खो रही है। आम जनता में वर्तमान नियम कानून और व्यवस्थाओं के साथ-साथ न्यायपालिका के आदेशों से भी जनता का आक्रोश बढ़ रहा है। लोकतंत्र के तीनों स्तंभ इन दिनों अपनी सत्ता और अधिकार के मद में चूर है। जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ें जड़ से उखाड़ने लगी हैं।भारतीय सरकारी बैंकों का रिलायंस समूह पर १२५ लाख करोड़, वेदांता समूह पर 103 लाख करोड़ ऐस्सार समूह पर 101 लाख करोड़, अडानी समूह पर 96031 करोड़, जेपी समूह पर 75163करोड, जिंदल स्टील पर 58971 करोड़ जीएमआर समूह पर 46906 पर करोड़, लैंको समूह पर 45102 करोड़  वीडियोकान समूह पर 43045 करो़ड़, जीवीके समूह पर 34000 करोड़ रूपया बैंकों का कर्ज बकाया है। इन समूहों की कई कंपनियां पूर्व में एनपीए हो चुकी हैं । बैंक और सरकार इनसे कर्ज वसूली करने के स्थान पर उन्हें विशेष छूट दे रही है । सरकार एनपीए में गई कंपनियों को आर्थिक सहायता भी सरकारी खजाने से दे देती है । बैंक भी इन कंपनियों के ब्याज माफ कर देते हैं। कर्ज की पुनर्अदायगी के लिए नई शर्तों के साथ पुनः कर्ज भी इन कंपनियों को दे दिया जाता है। कुछ समय बाद कर्ज नहीं चुका पाने पर यह कंपनियां अपने आप को दिवालिया घोषित कर बीमार उद्योग को बैंकों को सौंपकर कंपनियां बैंकों के कर्ज और जनता की शेयर में निवेश किए गए पैसों से कुछ वर्षों तक इन के संचालक ऐश करते हैं । कंपनियों के कर्ज को संचालकों की निजी संपत्ति से वसूल करने का प्रावधान नहीं है। यमुना पावर लिमिटेड जो अनिल अंबानी समूह की कंपनी है। यह दिल्ली में पावर वितरण का काम करती है। दिल्ली के विद्युत नियामक आयोग द्वारा कंपनी के दस्तावेजों की जांच से यह प्रमाणित हो गया था, कि यमुना पावर लिमिटेड ने दुगनी कीमत में सामान खरीद कर अपनी सहयोगी कंपनियों को फायदा पहुंचाया है। कंपनी की बिलिंग छुपाकर कंपनी की आय छुपाकर जनता को महंगी बिजली दी जा रही थी। किंतु इसके बाद भी  केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। उल्टे यमुना पावर लिमिटेड को बचाने के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उन्हें बचा लिया। कुछ इसी तरह की स्थिति उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी समूह के रिलायंस कंपनी की है । इन्होंने भी केजी बेसिन में गैस की चोरी की। सरकार के साथ जो अनुबंध किया था । उसे बीच में तोड़कर तोड़कर गैस की कीमत बढ़ा ली। टैक्स चोरी की फाइलें सुप्रीम कोर्ट से गायब हो गई। किंतु इस सब के बाद भी इन पर कभी कोई कार्रवाई सरकार और न्यायालय ने नहीं की ।
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औद्योगिक समूह अपनी मर्जी से टैक्स देते हैं। नहीं देना होता है तो कोर्ट में जाकर स्थगन ले आते हैं। उसके बाद सरकार भी भूल जाती है । जनता से टैक्स वसूल कर सरकारी खजाने में जमा करने के स्थान पर धोखाधड़ी कर उस धन से भी ऐश करते हैं। मुकेश अंबानी ने हजारों करोड़ रुपए की लागत से अपना आशियाना मुंबई में बनाया है।कंपनी के पैसे से कई हवाई जहाज, पानी के जहाज, लग्जरी बसें, कारें जो करोड़ों रुपए की लागत की हैं। देश विदेश में इन संपत्तियों का उपयोग स्वयं और परिवार कर रहा है। अपने चहेते राजनेताओं, नौकरशाहों और न्यायविदों को भी ऐश कराकर सरकारी खजाने और जनता के धन को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। पिछले एक दशक में इन उद्योग समूहों के संचालकों की निजी संपत्तियों तेजी के साथ बढ़ती ही जा रही है। वहीं इन संचालकों की कंपनियां लगातार घाटे में जाकर बैंक का कर्ज भी नहीं चुका पा रही हैं। रिलायंस समूह का उल्लेख इसलिए किया गया है कि इस समय वह भारत के शीर्ष उद्योगपति हैं । वह भारत ही नहीं सारी दुनिया के रोल मॉडल बनकर हम सभी के सामने हैं । दूसरे क्रम में अदानी समूह का नाम आता है, जिन्होंने पिछले एक दशक में अंबानी बंधुओं की राह पर चलते हुए सत्ता में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। आज वह सत्ता के सबसे बड़े करीबी विश्वसनीय उद्योगपति बनकर हम सभी के सामने हैं ।
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देश के आम नागरिकों के लिए सारे नियम कानून-कायदे हैं। स्थानीय संस्थाएं, राज्य सरकारें और केंद्र सरकार के विभाग, बैंक अपने टैक्स और कर्जो की वसूली के लिए ३ माह के अंदर ही निम्न एवं मध्यम वर्ग के लोगों की कुर्की डिग्री करके उन्हें सड़क पर लाकर खड़ा कर देते हैं । उनका कर्जा जमानतदार और उनके परिवारजनों से वसूल किया जाता है। निम्न एवं मध्यम वर्ग का व्यक्ति खुद का पैसा लगाकर अपना धंधा तथा व्यापार करता है । कुछ पैसा बैंको से जरूर मिल जाता है किंतु इनके कर्ज की राशि बहुत कम होती है। गरीबों एवं मध्यम वर्ग के लिए सरकार ने विशेष न्यायालय बना दी है जो टैक्स और कर्ज की वसूली के लिए कुछ माह के अंदर ही इनकी संपत्ति छीनकर इन्हें सड़क पर खड़ा कर देती है। इनके उद्योग व्यापार बंद हो जाते हैं। वह मालिक से नौकर बनने के लिए विवश हो जाते हैं ।पिछले 2 साल में छोटे कारोबारियों ने हजारों की संख्या में आत्महत्या कर ली। कई कारोबारियों ने तो अपने परिवार को मारकर स्वयं आत्महत्या करने के देश में सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं । हजारों किसान हर साल बैंक से कर्जा लेकर कर्जा नहीं चुका पाने के कारण आत्महत्या कर चुके हैं। इसके बाद भी चाहे यूपीए की सरकार रही हो या वर्तमान में एनडीए की सरकार हो। सभी का निशाना मध्य एवं गरीब वर्ग ही होता है। इनके लिए सरकारों का नजरिया अलग है। बड़े-बड़े उद्योग पतियों के लिए सरकारों का नजरिया अलग है। भारत में बड़े-बड़े पूंजी पतियों को मनमाफिक न्याय खरीदने की आजादी है। उनके बड़े बड़े वकील लाखों करोड़ों रुपए की फीस लेकर न्यायालय में पैरवी करते हैं। जनता के पैसों से जनता के हकों को दबाने का काम सरकार और उद्योगपति कर रहे हैं । भारतीय न्यायालय ही इस काम में आंख में पट्टी बांधकर सरकार और समर्थ वर्ग के पक्ष में निर्णय देकर इस दोहरे कानून को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। जिसके फलस्वरुप अब न्यायपालिका के प्रति आमजनों का विश्वास तेजी के साथ खत्म हो रहा है । केंद्र सरकार और बैंकों ने यदि समय रहते इस भेदभाव को खत्म नहीं किया । तो जल्द ही इस के भीषण दुष्परिणाम सामने देखने को मिलेंगे ।दैनिक रॉयल बुलेunnamed
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