छोटी-सी तारीफ भी स्त्रियों को देती है बड़ी खुशी..करके तो देखिये…!

छोटी-सी तारीफ भी स्त्रियों को देती है बड़ी खुशी..करके तो देखिये…!

कोई भी महिला तब और निखर उठती है, जब कोई उसकी खूबसूरती की तारीफ करने वाला हो। कोई उसकी छोटी-छोटी जरूरतों का खयाल रखने वाला हो। अगर वह अपने साथी के लिए कुछ करे तो वह उसे नोटिस करे। जब साथी इन बातों का खयाल रखता है तो दांपत्य जीवन खुशियों से महक उठता है।आज सुबह से ही तन्वी का मन कुछ उदास था, न जाने किस सोच में गुम थी। पिछले काफी समय से सोच रही थी कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में कुछ कमी-सी है लेकिन तभी मोबाइल पर आए एक मैसेज ने जिंदगी में छाई सारी निराशाओं को पल भर में मानो दूर भगा दिया और तन्वी के मन में एकाएक नई उमंगें तैरने लगीं। इसमें लिखा था-‘कैसी हो स्वीटहार्ट’? तुम्हारा दिन कैसा बीत रहा है?यह मैसेज पढ़ते ही तन्वी का उदासी में डूबा दिन खुशनुमा हो उठा। उसके मन में शाम की कई प्लानिंग चलने लगीं। आईने में खुद को बार-बार निहारने लगी। वाकई में तन्वी जितनी खुश थी, उसकी चमक उसके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दे रही थी। उसके बाद ही तन्वी ने भी पूरी गर्मजोशी से मैसेज का जवाब भी दिया और उसके खुश रहने के साथ पूरे घर का माहौल खुशनुमा हो गया।
क्या चाहती हैं महिलाएं
अक्सर पुरुष सोचते हैं कि स्त्रियों को खुश करना बड़ा मुश्किल है, लेकिन वे नहीं जानते कि उनकी जीवनसंगिनी खुश होने के लिए बेशकीमती तोहफा नहीं चाहती, उसे तो प्यार से दी गई एक कैंडी भी खुश कर सकती है। लंबे से मेल के बजाय प्यार में डूबी छोटी-सी पंक्ति भी जीवनसाथी को प्रसन्ना कर सकती है। बस, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
बस थोड़ी-सी केयर
सचाई यह है कि करियर में कोई स्त्री कितनी भी कामयाब क्यों न हो जाए, उसे सबसे बड़ी खुशी तब मिलती है, जब उसका साथी उसकी छोटी-छोटी ख्वाहिशों को समझता हो, उनका खयाल रखता हो। दरअसल, ऐसा करते हुए वह यह जता देता है कि वह उसके लिए कितनी खास है। महिलाएं हमेशा से चाहती हैं कि उनका साथी कार में पहले खुद बैठने की बजाय उनके लिए कार का दरवाजा खोले। ये चाहत इसलिए नहीं है कि वह यह काम खुद नहीं कर सकती या फिर शारीरिक रूप से कमजोर हैं, वह सिर्फ अपने पार्टनर से एक स्नेह भरे रिश्ते की अपेक्षा रखती हैं।प्रकृति ने पुरुष को फिजिकली मजबूत बनाया है। वह मेहनत करता है, परिवार चलाता है। स्त्री उसका खयाल रखती है। आदिकाल से ऐसा ही होता रहा है लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव भी आया है। अब स्त्रियां घर-ऑफिस साथ संभाल रही हैं। पुरुष उनकी मेहनत की कद्र करता है, लेकिन कहीं न कहीं वह इसका इजहार करने से चूक जाता है।

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