चुनावी दंगल : भाजपा के सतरंगे सेनापति – रामबहादुर राय

चुनावी दंगल : भाजपा के सतरंगे सेनापति – रामबहादुर राय

खबर यह नहीं है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के स्टार प्रचारक कौन नहीं है। इसे दूसरे नजरिए से देखने की जरूरत है। वह यह कि मुकाबले में कौन है? भाजपा ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची दे दी है। जैसे ही उसे जारी किया गया और वह सूची चुनाव आयोग में पहुंची कि खबर चली कि उसमें कौन-कौन नहीं है। मसलन लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नाम दूरबीन से देखे गए। नहीं मिले तो यही खबर चला दी गई। कोई भी चुनाव चाहे छोटा हो या बड़ा, होता है अपने आप में एक मुकम्मल महाभारत। जैसे महाभारत की कथा अदभुत है, वैसे ही हर चुनाव अपने हर चरण में सबको चकित करता चलता है। महाभारत की कथा में सबसे पहले एक जिज्ञासा है। कौन है मुकाबले में। इससे वह कथा शुरू होती है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में यही सबसे ज्यादा गौर करने लायक बात है। इसका बड़ा कारण है। 2014 का चुनाव तीन साल पहले हुआ। उसमें भाजपा ने चमत्कारिक जीत हासिल की। आंकलन का वही आधार बना हुआ है। 2012 के विधानसभा चुनाव को उसने पीछे छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति ने काया पलट कर लिया है। इस चुनावी रणक्षेत्र में देखने की जरूरत है कि किसकी सेना कितनी सजी है। कौन-कौन हैं उसके सेनापति। इस लिहाज से प्रधान सेनापतियों पर ज्यादा सवाल नहीं है। सभी जानते हैं कि भाजपा के प्रधान सेनापति नरेंद्र मोदी हैं। उनके मुकाबले में अखिलेश यादव, मायावती और राहुल गांधी के नाम भी सुपरिचित ही हैं। सवाल सेनापतियों का है। इसी कसौटी पर भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची को देखा जाना चाहिए। केंद्र के 16 मंत्री सेनापतियों की सूची में हैं। उनका चयन भी एक संदेश देता है। लेकिन गौर करने लायक नाम वे हैं जो इस कतार के पीछे खड़े हैं। यह प्रारंभिक सूची है। अंतिम नहीं। हर युद्ध में जरूरत पड़ने पर सेनापति बदले भी जाते हैं। भाजपा ने यह सूची पहले होने वाले तीन चरणों के चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई है। इसीलिए दूसरी कतार में हेमा मालिनी, जनरल वीके सिंह, संतोष गंगवार, मनोज तिवारी, एसपी सिंह बघेल, डॉ. रामशंकर कठेरिया, रविकांत गर्ग, नरेंद्र कश्यप, अवतार सिंह भड़ाना और लोकेश प्रजापति के नाम दिए गए हैं।
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चौथे चरण में यह सूची संशोधित होगी। उसमें नए नाम जुड़ेंगे। तभी इस सवाल का जवाब भी मिल जाएगा कि मनोज सिन्हा का नाम क्यों नहीं इसमें आया। वैसे तो सभी जानते हैं कि वे स्टार प्रचारकों में हैं। पर सड़क दुर्घटना के कारण उनको अभी अगले चरण के लिए सुरक्षित रखा गया है। तब तक वे तूफानी दौरों के लिए तैयार भी हो जाएंगे। पिछली सदी के पांचवें और छठे दशक में सामाजिक आधार पर कांग्रेस का जैसा सतरंगा नेतृत्व हुआ करता था वही आज भाजपा का है। इस सूची से यही सूचना ऊंचे पहाड़ से गूंज रही है। जिसे मैदान में खड़े लोग सुन रहे हैं और इसका अर्थ भी समझ रहे हैं। मुकाबले में क्या किसी दूसरी पार्टी में ऐसा नेतृत्व है? खोजना पड़ेगा। मुकाबले की हर पार्टी एक रंगी है। हमेशा चुनाव में स्थापित नेतृत्व ही वोट की आवाजाही को दिशा देता है। अगर समाज के सभी समुदायों और समूहों के अलावा वर्गीय हितों का नेतृत्व में प्रतिनिधित्व है तो रणक्षेत्र में विजय की संभावना प्रबल हो जाती है। इसी दृष्टि से स्टार प्रचारकों की सूची को देखना चाहिए। 

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